बेंगलुरु दंगा: NIA ने सुलझाया केस, दंगे का मुख्य आरोपी सादिक अली गिरफ्तार

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हाइलाइट्स:

  • बेंगलुरु दंगा साजिशकर्ता सादिक अली को भी गिरफ्तार कर लिया गया
  • एनआईए की इस छापेमारी में दंगे से संबंधित अहम सुराग बरामद किए
  • बेंगलुरु का रहने वाला सैयद सादिक अली फरार चल रहा था

नई दिल्ली
11 अगस्त 2020 को बेंगलुरु दंगे (Bangalore Riots) के मामले में NIA (National Investigation Agency) ने गुरूवार को 30 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की। एनआईए की इस छापेमारी में दंगे से संबंधित अहम सुराग बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही इस मामले के एक अहम साजिशकर्ता सादिक अली को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

सादिक अली के साथ PFI पर भी रडार
एनआईए सूत्रों के मुताबिक सादिक अली एक बैंक के साथ रिकवरी एजेंट के तौर पर काम करता है। सूत्रों ने कहा कि बैंक रिकवरी एजेंट और कथित रूप से कांग्रेस के एक सदस्य सद्दीक के लिंक के साथ, भारतीय स्टेट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की भी जांच की जा रही है।

फरार था सादिक
बेंगलुरु हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। जिनमें से तीन की मौत पुलिस गोलीबारी में हुई थी। बेंगलुरु का रहने वाला सैयद सादिक अली फरार चल रहा था। वह केजी हल्ली पुलिस थाने पर हमले में कथित तौर पर संलिप्त था। इस हमले की वजह से पुलिस थाना परिसर में और आसपास के इलाकों में खड़े वाहनों सहित सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।

इस वजह से हुई थी हिंसा
जांच एजेंसी ने बताया कि 11 अगस्त को तीन हजार से अधिक लोगों ने हिंसक तरीका अपनाते हुए कांग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति, उनकी बहन जयंती और देवारा जीवनहल्ली के आवासों तथा कडुगोंडनहल्ली (केजी) पुलिस थाने को आग लगा दी थी। यह हिंसा पैगंबर मोहम्मद के बारे में सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाले जाने के कारण भड़की थी।

पुलिस ने दर्ज किए थे 65 मामले
एनआईए के मुताबिक अली एक बैंक के वसूली एजेंट के रूप में काम करता है और वह 11 अगस्त से फरार था। बेंगलुरु पुलिस ने हिंसा के सिलसिले में 65 मामले दर्ज किए थे और 350 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। 30 स्थानों पर हुई छापेमारी को लेकर एनआईए महानिरीक्षक सोनिया नारंग ने एक बयान में कहा, ‘तलाशी के दौरान एयर गन, छर्रे, धारदार हथियार, सरिया, डिजिटल उपकरण, डीवीआर तथा एसडीपीआई और पीएफआई से जुई कई आपत्तिजनक दस्तावेज एवं सामग्री जब्त की गई।’

ये है आरोप
उन्होंने कहा, ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के प्रदेश सचिव मुजमिल पाशा और एसडीपीआई/पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के अन्य सदस्यों ने नवीन, अखंड श्रीनिवास मूर्ति के आवास पर तथा डीजी हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने के परिसरों के बाहर भीड़ इकट्ठा की, जिन्होंने परिसरों में तोड़फोड़ की और आगजनी की। साथ ही, लोगों के बीच दहशत पैदा की।’



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