बॉम्बे हाईकोर्ट ने AI Bots को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय से मांगी जानकारी, जो तस्वीरों को कर देता है न्यूड

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हाइलाइट्स:

  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बॉट के बारे में मांगी सूचना
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)बॉट महिलाओं की तस्वीरों को कर देता है न्यूड
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में धारा 69 ए और 79 (3) (बी) के प्रावधान हैं, जिसके तहत हो सकती है कार्रवाई

मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से सवाल किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रयोग से एक ‘बॉट’ (एक प्रकार का सॉफ्टवेयर) से कथित तौर पर महिलाओं की तस्वीरों को न्यूड में बदल देने की हालिया खबरों पर वह क्या कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने बुधवार को एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएसजी) अनिल सिंह से कहा कि वह सूचना और प्रसारण मंत्रालय से इसकी जानकारी प्राप्त करें।

अदालत, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के संबंध में मीडिया की खबरों को लेकर दायर की कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ओर से दिखाई जा सब्जेक्टर के रेगुलेशन के लिए कोई कानूनी प्रावधान होना चाहिए या नहीं, इस पर अदालत एएसजी की दलीलें सुन रही थी। एएसजी ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि प्रेस के सेल्फ रेगुलेशन हो।

कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट की जानकारी करने को कहा
एएसजी सिंह ने कहा कि हालांकि यदि कोई मीडिया कंपनी किसी दिशा निर्देश का उल्लंघन करती है तो केंद्र सरकार कार्रवाई कर सकती है। यह सुनने के बाद अदालत ने अखबार में एआई बॉट से संबंधित उक्त खबर का हवाला दिया। पीठ ने कहा कि प्रिंट मीडिया ने जो छापा है उसके बारे में आप मंत्रालय से पूछ सकते हैं… हम चाहते हैं कि आप इस खबर में दुर्भावना का पता लगाएं। कृपया मंत्रालय से जानकारी प्राप्त करें।

‘मुद्दा बेहद गंभीर, उठाने होंगे कदम’
एएसजी ने अदालत को बताया कि उन्होंने खबर पढ़ी है और संबंधित अधिकारियों से बात की है और “सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सिंह ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून में ऐसे प्रावधान हैं जिनके तहत एआई बॉट के मसले पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके बाद पीठ ने कहा कि मामला बहुत गंभीर है और आपको (मंत्रालय) कदम उठाने होंगे। एएसजी ने पीठ को आश्वासन दिया कि मंत्रालय इस विषय पर कदम उठाएगा।



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