भारतीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व वाली टीम ने ब्लैक होल की चारदीवारी के ‘एक्स-रे’ साक्ष्य का पता लगाया

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नई दिल्ली
भारतीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने ब्लैक होल के चारों ओर अदृश्य चारदीवारी की पहचान से जुड़े ब्रह्मांडीय एक्स-किरणों के एक विशिष्ट साक्ष्य का पता लगाया है। यह खोज मुंबई स्थित टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) के सुदीप भट्टाचार्य सहित अन्य तारा-भौतिकविदों ने की है जिसमें उपग्रह द्वारा ब्रह्मांडीय एक्स किरणों पर जुटाई गई जानकारी का सहारा लिया गया।

वैज्ञानिकों ने कहा कि यद्यपि ब्लैक होल की कोई सतह नहीं होती, लेकिन यह अदृश्य चारदीवारी के दायरे में कैद होता है जिससे कोई चीज, यहां तक कि प्रकाश भी बचकर नहीं जा सकता और सब कुछ इसमें समा जाता है। इन (स्टेलर मास) तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल का अस्तित्व साबित करने के क्रम में अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि इन्हें न्यूट्रॉन तारों से अलग करने की आवश्यकता है जो कठोर सतह के साथ ब्रह्मांड में सबसे घनी वस्तुओं के रूप में जाने जाते हैं।

वर्तमान अध्ययन में वैज्ञानिकों ने अब सेवानिवृत्त हो चुके उपग्रह ‘रोसी एक्स-रे टाइमिंग एक्सप्लोरर’ द्वारा जुटाए गए आंकड़ों की मदद ली और उपग्रह द्वारा देखी गईं ब्रह्मांडीय एक्स किरणों से अब तक के छोटे, लेकिन अत्यंत कठोर ब्लैक होल के मजबूत साक्ष्य का पता लगाया।



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