भारत के साथ संबंधों पर रूस का बड़ा बयान, कहा- अमेरिका के कारण कमजोर हो रहे हमारे रिश्ते

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मॉस्को
रूस ने भारत से अपने द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों के कारण रूस के साथ भारत की करीबी साझेदारी एवं विशेष संबंध कमजोर हो रहे हैं। रूस की सरकारी थिंक टैंक रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल के एक कार्यक्रम में लावरोव ने आरोप लगाया कि अमेरिका के कारण भारत हमसे दूर होता जा रहा है।

एकध्रुवीय व्यवस्था लागू करना चाहता है अमेरिका
लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बहाल करना चाहते हैं, जिसमें सभी देश होंगे लेकिन रूस और चीन से वे बाद में निपटेंगे। रूस और चीन जैसे ध्रुवों के इसके अधीन होने की संभावना नहीं। हालांकि, भारत अभी पश्चिमी देशों की निरंतर, आक्रामक और कुटिल नीति की एक वस्तु है क्योंकि वे इसे हिंद-प्रशांत रणनीतियों, तथाकथित क्वाड को बढ़ावा देकर चीन विरोधी खेल में शामिल करना चाहते हैं।

भारत से संबंधों को लेकर अमेरिका पर बिफरा रूस
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि इस वक्त पश्चिमी देश भारत के साथ हमारी करीबी साझेदारी और विशेष संबंधों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका का लक्ष्य भारत का रूस के साथ सैन्य और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में नई दिल्ली पर बहुत सख्त दबाव बनाने का है। उन्होंने कहा कि 2018 में भारत और रूस ने यह घोषणा की थी कि उन्होंने अपनी रणनीतिक साझेदारी को एक विशेष रणनीतिक साझेदारी के मुकाम पर पहुंचाया है।

रूस से भारत खरीद रहा एस-400 डिफेंस सिस्टम
अक्टूबर 2018 में भारत ने एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की पांच इकाइयां खरीदने के लिए रूस के साथ पांच अरब डॉलर का एक सौदा किया था। भारत ने अमेरिकी प्रतिबंध लगाये जा सकने की ट्रंप प्रशासन की चेतावनी की परवाह नहीं करते हुए इस पर कदम बढ़ाया था। लावरोव ने कहा कि एक बहुध्रवीय विश्व व्यवस्था के गठन की कोशिशों को खारिज करते हुए अमेरिका नीत पश्चिमी देशों ने एक खेल शुरू कर दिया है।

क्वाड को लेकर अमेरिका ने कई बार दी है सफाई
अमेरिका, जापान, भारत और आस्ट्रेलिया ने 2017 में क्वाड के काफी समय से लंबित प्रस्ताव को मूर्त रूप दिया था। इस गठबंधन को इंडो पैसिफिक क्षेत्र में चीन के आक्रामक व्यवहार का मुकाबला करने के लिए बनाया गया है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि क्वाड कोई गठबंधन नहीं है बल्कि ऐसे देशों का समूह है जो साझा हितों एवं मूल्यों से संचालित होते हैं तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करने में रूचि रखते हैं।



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