महासचिव नहीं, 16 उपाध्यक्ष की लिस्ट में शामिल…राजनाथ के बेटे पंकज सिंह की ‘तरक्की’ हुई या ‘कद’ घटा?

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हाइलाइट्स:

  • केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा से विधायक पंकज सिंह को यूपी बीजेपी ने सौंपा उपाध्यक्ष का पद
  • योगी मंत्रिमंडल में दो बार जगह पाने से रह गए पंकज सिंह को मिले उपाध्यक्ष पद पर उठ रहे सवाल
  • यूपी बीजेपी की नई टीम में 7 महासचिव और 16 उपाध्यक्ष, ऐसे में पंकज सिंह के पद को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

लखनऊ/नोएडा
भारतीय जनता पार्टी ने करीब सात महीने बाद प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान किया। इसमें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा से विधायक पंकज सिंह को बीजेपी ने यूपी की नई टीम में उपाध्यक्ष बनाया है। योगी मंत्रिमंडल में जगह पाने से वंचित रहे पंकज सिंह को उपाध्यक्ष पद देना बीजेपी के लिए एक छोटी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यूपी बीजेपी ने अपनी नई कार्यकारिणी में जाति और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन कुछ फैसलों पर उनका एकाधिकार नहीं है। बीजेपी के अंदरखाने पकंज सिंह के मामले में भी कुछ ऐसा ही कहा जा रहा है।

योगी कैबिनेट में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को जगह मिलने की दो बार चर्चा हुई लेकिन दोनों बार ही उनके हाथ मायूसी लगी। पिछले साल अगस्त में ही जब योगी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो पंकज सिंह को जगह मिलने की पूरी संभावना जताई गई थी। लेकिन आखिरी तक उनके नाम के कयास लगते रहे और जब शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची जारी हुई तो उनका नाम गायब था। ऐसे में यूपी की नई कार्यकारिणी में बीजेपी ने उपाध्यक्ष पद देकर उस कमी को पूरा करने की कोशिश की है। हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्र का कहना है कि यूपी कार्यकारिणी में 16 उपाध्यक्ष और सिर्फ सात महासचिव होते हैं। ऐसे में महासचिव का पद निश्चित रूप से अधिक महत्व रखता है, जबकि उपाध्यक्ष का कार्य अधिक औपचारिक होता है। राजनीतिक जानकारों की माने तो पंकज को लगातार नजरअंदाज किया गया।

पढ़ें: यूपी: बीजेपी ने बनाई चुनावी टीम, जाति-क्षेत्र को तरजीह, सबसे ज्यादा ब्राह्मण

‘एक आदमी एक पद’ के सिद्धांत हवा में
यूपी बीजेपी के प्रमुख इस बात को दोहरा रहे हैं कि पार्टी ‘एक आदमी एक पद’ के सिद्धांत का पालन करती है, लेकिन कुछ मामलों में ऐसे सिद्धांत हवा में फेंक दिए जाते हैं। जेपीएस राठौर के मामला इसका ताजा उदाहरण है। पार्टी में उन्हें उपाध्यक्ष जैसा ‘ऊंचा’ पद दिया गया, जबकि राठौड़ यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। वहीं राजनाथ के वफादारों में शामिल रहीं बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष दर्शना सिंह के मामले में भी ऐसा ही देखा जा रहा है। वर्तमान महिला मोर्चा प्रमुख राज्य कार्यकारिणी में जगह पाने में असफल रही हैं। राजनाथ की तरह वह भी चंदौली जिले से हैं।

2017 में पहली बार लड़ा चुनाव

निवर्तमान कार्यकारिणी में विधायक पंकज सिंह महामंत्री थे। पंकज सिंह 2004 में प्रदेश कार्यकारिणी में बतौर सदस्य शामिल होने के बाद 2007 में बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने। इसी साल वह प्रदेश कार्यसमिति में शामिल हुए। 2009 में प्रदेश मंत्री बने। 2017 विधानसभा चुनाव में पंकज सिंह ने नोएडा विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा था और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सुनील चौधरी को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी।

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15 साल से भी अधिक समय से सक्रिय राजनीति में
पंकज सिंह 15 साल से भी ज्यादा समय से बीजेपी से जुड़े हुए हैं। कहा जाता है कि उन्हें यूपी की राजनीति और यहां की कमियों के बारे में काफी करीब से जानकारी है। यूपी की किस तरह के विकास की जरूरत है और उसके लिए क्या प्लानिंग सही रहेगी, इसके लिए उसके अनुभव को अब संगठन में इस्तेमाल किया जाएगा।



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