मां को ICU में छोड़कर की थी बहस, फिर भी किसी ने नहीं सुनी किसानों के लिए उठी मेरी आवाज: हरसिमरत

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हाइलाइट्स:

  • हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि उन्‍होंने अपनी मां को आईसीयू में छोड़कर संसद में बहस की थी
  • मुझे इस बात का दुख है कि किसानों के हित के लिए मेरी आवाज को सुना नहीं गया: हरसिमरत कौर
  • केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के विरोध में हरसिमरत कौर दे चुकी हैं केंद्रीय मंत्री पद से इस्‍तीफा

चंडीगढ़
किसान विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर बादल ने शुक्रवार को मीडिया से बात की। बादल ने कहा कि उन्हें दुख है कि किसानों के समर्थन में उठाई गई उनकी आवाज को नहीं सुना गया और साथ ही उन्होंने सरकार से इन विधेयकों को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की। बादल ने एक इंटरव्यू में कहा कि इन तीन विधेयकों पर संसद की बहस में भाग लेने और अपना विरोध दर्ज कराने का कर्तव्य निभाने के लिए मैं अपनी मां को अस्पताल के आईसीयू में छोड़कर आई। इसके बाद मैंने इन प्रस्तावित विधेयकों के विरोध में इस्तीफा दे दिया।

हरसिमरत कौर बादल ने अपने पति और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के गुरुवार रात लोकसभा में इन विधेयकों पर कड़ा विरोध करने के बाद इस्तीफा दे दिया था। सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया कि प्रस्तावित विधेयकों से पंजाब में कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा और उन्होंने घोषणा की कि हरसिमरत कौर बादल इन तीन विधेयकों के विरोध में सरकार में मंत्री पद छोड़ देंगी। हरसिमरत कौर बादल पहली बार 2014 में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री बनीं थीं और बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के 2019 से शुरू हुए दूसरे कार्यकाल में यह मंत्रालय उनके पास बना रहा। उन्होंने कहा कि वे सरकार से गुहार लगाती हैं कि किसानों की सहमति लिए बिना इन विधेयकों पर आगे न बढ़ें।

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सरकार से फिर की अपील
बादल ने कहा, ‘मैं मंत्रिपरिषद में अध्यादेश आने के बाद से इसका विरोध करती रही हूं। मैं किसानों के सभी संदेह और डर को दूर करने के लिए किसानों और सरकार के बीच सेतु का काम कर रही थी। मैं सरकार से अपील करती हूं कि जब तक किसानों की सभी आशंकाएं दूर न हो जाएं, तब तक इन विधेयकों पर आगे न बढ़ा जाए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे इस बात का बहुत दुःख है कि मेरी आवाज मंत्रिपरिषद में नहीं सुनी गई और सरकार ने इसे किसानों सहित सभी हितधारकों के साथ परामर्श के लिए संसद की प्रवर समिति को नहीं भेजा। अगर मेरी आवाज सुनी गई होती, तो किसान विरोध करने के लिए सड़कों पर न आते।’ बादल ने कहा कि सरकार को इन विधेयकों को पारित कराने पर जोर नहीं देना चाहिए और इन्हें संसद की प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए, ताकि सभी हितधारकों के साथ इस पर विचार-विमर्श किया जा सके।

अमरिंदर सिंह के आरोपों पर पलटवार
पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे को एक नाटक बताया था। इस पर पलटवार करते हुए कौर ने कहा कि अमरिंदर सिंह खुद सबसे बड़े नाटकबाज हैं और सबसे बड़े झूठे हैं। उन्होंने कहा, ‘अमरिंदर सिंह और कांग्रेस दोहरी बात कर रहे हैं। जब इन अध्यादेशों की योजना बनाई गई थी, तो सभी मुख्यमंत्रियों से परामर्श किया गया था और उन्होंने सहमति दी थी। साथ ही ये तीनों विधेयक 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र का हिस्सा थे।’ बादल ने कहा कि सिंह कांग्रेस पार्टी के घोषणापत्र के इस एक वादे को छोड़कर अन्य सभी वादों को पूरा करने में विफल रही है, इसका नतीजा है कि पंजाब में किसान सड़कों पर हैं।

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NDA के साथ रहने पर पार्टी करेगी फैसला: हरसिमरत
यह पूछने पर कि क्या शिरोमणि अकाली दल से भी बाहर होगा, उन्होंने कहा कि यह पार्टी को तय करना है और सभी वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर सामूहिक निर्णय लेंगे। पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। हरसिमरत कौर बादल ने प्रधानमंत्री को भेजे अपने त्यागपत्र में दोनों दलों के बीच दशकों पुराने सहयोग को याद किया है। दोनों दलों के बीच यह गठबंधन अकाली दर के वायोवृद्ध नेता सरदार प्रकाश सिंह बादल और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में किया गया। उन्होंने उम्मीद जाई कि पंजाब में सामुदायिक सदभाव और शांति के लिये दोनों दल मिलकर काम करते रहेंगे।



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