मिस्र में 2500 साल पुरानी ममी को ‘नींद’ से जगाया, अब सता रहा शाप लगने का डर

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गीजा
पिछले दिनों कायरो के दक्षिणी हिस्से में सक्कारा के कब्रिस्तान में मिट्टी की कब्रें मिलीं। दो महीने पहले शुरू हुए मिशन में 36 फीट गहराई में ये जगह मिली जिसमें 13 ताबूत थे। और गहराई में जाने पर और ज्यादा ताबूत मिलने लगे। इसके बाद पुरातत्वविद बेहद उत्साहित हो गए लेकिन इस खोज को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। दरअसल, कहा जाता था कि ममी को खोलकर उसे ‘नींद’ से जगाने वाले पर शाप लगता है। इसे लेकर डर भी फैलने लगा है लेकिन इससे ज्यादा सवाल इस बात पर हो रहे हैं कि आखिर सदियों पुराने ताबूतों को खोलना आखिर क्यों जरूरी था?

दरअसल, डर यह सामने आ रहा है कि 2500 साल पहले जिस वजह से इन लोगों की मौत हुई होगी कहीं उसका असर इन ताबूतों से छेड़छाड़ करने पर न दिखे। इस बात पर भी सवाल उठाए गए हैं कि जब ये ममी किसी फिरौन (Pharaoh) या महान हस्ती की नहीं हैं, तो इन्हें सिर्फ पर्यटन के लिए क्यों छेड़ा जा रहा है।

दिमाग निकालकर बनी थी ममी
गीजा के पिरामिड से 10 मील दक्षिण-पूर्व की ओर 59 ताबूत मिले जिनमें से 40 प्रेस को दिखाए गए। शुरुआती रिसर्च में माना गया है कि इनमें से ज्यादातर ताबूत पादरियों (priests), अधिकारियों और उच्च वर्ग के रहे होंगे। इन सभी के मरने के बाद परंपरा के मुताबिक इन्हें दफनाया गया। इसमें लोहे के हुक से उनकी नाक के रास्ते दिमाग निकालना भी शामिल था।

मिस्र में मिले ताबूत

अभी और ताबूत मिल सकते हैं
उम्मीद भी की जा रही है कि यहां और ज्यादा ताबूत अंदर दफन हो सकते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि यह और बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि सभी ताबूत एकदम अच्छी कंडीशन में हैं और उनमें ओरिजिनल कलर्स ही दिखते हैं। इन सभी ताबूतों को ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम ले जाया गया है जहां आम लोगों को इसे दिखाया जाएगा। मिस्र पुरात्तव खनन का इस्तेमाल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करता है।

मिस्र में मिलीं ममी

मिस्र में मिलीं ममी



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