मोरेटोरियम मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से डिटेल पेश करने को कहा

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरबीआई से कहा है कि वह वह केवी कामथ कमिटी की सिफारिशों को रेकॉर्ड में पेश करे। कमिटी ने कोविड 19 के मद्देनजर तमाम सेक्टर में आई आर्थिक परेशानी के कारण कर्ज के पुनर्गठन को को लेकर तमाम सिफारिशें की है। जिसके बाद से आरबीआई और केंद्र सरकार ने लोन मोरेटोरियम से लेकर तमाम नोटिफिकेशन और सर्कुलर जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तमाम फैसले और सर्कुलर की डिटेल रेकॉर्ड में पेश किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने अपने हलफनामा में कहा कि वह व्यक्तिगत लोन लेने वालों को ब्याज पर ब्याज की छूट देंगे और ये छूट दो करोड़ तक के लोन पर होगा। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि बैंकों ने एक मार्च से लेकर 31 अगस्त के बीच ईएमआई न दिए जाने के इंट्रेस्ट चार्ज कर रही है। इस आरोप के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और आरबीआई से कहा है कि वह एक हफ्ते में कमिटी की सिफारिशें. फैसले, लोन मोरेटोरियम को लेकर नोटिफिकेशन और रियल इस्टेट की ओर से जो मुद्दे उठाए गए हैं उस क्या विचार हुआ इस बारे में कोर्ट को अवगत कराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई और केंद्र सकार, इंडियन बैक असोसिएशन व अन्य से कहा है कि वह अतिरिक्त हलफनामा पेश करें और उसमें नीतिगत फैसले, सर्कुलर और डेडलाइन आदि के बारे में रेकॉर्ड में डिटेल पेश करें। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कहा है कि केंद्र सरकार ने दो अक्टूबर को जो हलफनामा पेश किया है उसमें कई बिंदुओं को कवर नहीं किया गया है। 2 करोड तक के लोन को आठ कैटगरी के लिए ब्याज पर ब्याज की छूट दी गई।

अदालत ने कहा है कि कामथ कमिटी की सिफारिश के रेफरेंस का हवाला देकर फैसला किया गया है ऐसे में कमिटी की सिफारिश को रेकॉर्ड पर लाया। ये जानना जरूरी है कि क्या सिफारिश हुई है और सरकार ने क्या-क्या स्वीकार किया है। ये बातें पब्लिक में आना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने 10 सितंबर को हलफनामा पेश करने को कहा था लेकिन डिटेल पेश नहीं हुआ है ऐसे में सरकार और आरबीआई व अन्य इस मामले में लिए गए फैसले के बारे मे ंडिटेल पेश करें और अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय कर दी गई है।

सुनवाई के दौरान वकील सीए सुंदरम ने कहा कि रियल इस्टेट सेक्टर के बारे में कोई विचार नहीं किया गया और उन्हें छोड़ दिया गया। हम बताना चाहते हैं कि हमारे मामले में विचार किया जाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में सभी सेक्टर पर विचार किया गया और फैसला हुआ है। अगर पक्षकार जवाब देना चाहते हैं तो हमें कोई ऐतराज नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने कमिटी की रिपोर्ट को रेकॉर्ड पर नहीं रखा। क्या-क्या सिफारिश की गई और क्या-क्या उस पर किया गया ये बताना चाहिए। रेकॉर्ड पर ये बातें आनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कुछ भी छुपा हुआ नहीं है। हम रेकॉर्ड पर पेश करेंगे।



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