म्यांमार से भागे रोहिंग्या मुस्लिमों के सामने डूबकर मरने का खतरा, बांग्लादेश सरकार के फैसले पर सवाल

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ढाका
बंगाल की खाड़ी में एक इलाका ऐसा है जहां सिर्फ एक चक्रवात पूरी जमीन को डुबो सकता है। इस साल से पहले वहां कोई नहीं रहता था लेकिन बांग्लादेश की सरकार ने ऐसा कदम उठाया है जिससे हजारों जानें मुश्किल में आ गई हैं। म्यांमार में जारी हिंसा से बचने के लिए बांग्लादेश में शरण लेने पहुंचे शरणार्थियों को भसन चार टापू पर भेजा जा रहा है। बीते शुक्रवार को ही सात नावों में 1,640 रोहिंग्या मुस्लिम पहुंचे हैं।

बिना मर्जी भेजे गए?
ऐमनेस्टी इंटरनैशनल के दक्षिण एशियाई कैंपेनर साद हम्मादी ने कहा है कि ऐसी जगह पर रोहिंग्या शरणार्थियों को भेजना मानवाधिकारों पर चिंता पैदा करता है जहां आज भी पत्रकार या मानवाधिकार कार्यकर्ता बिना इजाजत के नहीं जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया है कि ऐसे कई रोहिंग्या हैं जिन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ पुनर्स्थापित किया गया है। हालांकि, ऐसे कई लोग हैं जो बिना किसी दबाव के वहां जाने की बात कह रहे हैं। इनमें से कई ऐसे भी हैं जिनसे बड़े घरों और सुविधाओं का वादा किया गया है।

2017 के बाद बढ़े शरणार्थी
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि उसकी योजना एक लाख रोहिंग्याओं को भसन चार भेजने की है जिसे बांग्ला में ‘तैरता टापू’ भी कहते हैं। इसे रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या 2017 के बाद से बढ़ने लगी है। बांग्लादेश के शहर कॉक्स बाजार के पास तट पर कैंप बढ़ते चले गए जिससे आबादी बढ़ने लगी। इस कारण भूस्खलन और बाढ़ के साथ-साथ सीमित संसाधनों के लिए हिंसा भी होने लगी। वहीं, पास के जंगलों में रहने वाले हाथी इन कैंप से होकर गुजरने लगे जो उनके रास्ते में आते थे।

असल में कैसे हालात?
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय का दावा है कि भसन चार में सुविधाएं हैं, झीलें हैं और इन्फ्रास्ट्रक्चर है जो आपदाओं का सामना भी कर सकते हैं। हालांकि, वहां पहले से रह रहे शरणार्थियों ने कहा है कि टापू पर छोटे-छोटे बैरकों में लोग रह रहे हैं। मेडिकल सुविधा भी कम है और बाहर तूफान उठते रहते हैं। रिफ्यूजीस इंटरनैशनल के सीनियर ऐडवोकेट डैनियल सुलिवन ने इस प्लान को अमानवीय बताया है। पिछले महीने कई मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेश के विदेश सचिव को लिखे खत को सार्वजनिक किया था जिसमें भसन चार जाने की इजाजत मांगी गई थी। इसे माना नहीं गया।
(Source: न्यूयॉर्क टाइम्स)



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