रणवीर शौरी Exclusive: बॉलिवुड में 5-6 बड़े प्‍लेयर खुफ‍िया तरीके से रच रहे हैं साज‍िश

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बॉलिवुड के बेहतरीन अभिनेता रणवीर शौरी इन दिनों जमकर सुर्खियों में हैं। वजह है 7 अक्टूबर को OTT प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लेयर ( Mx Player ) पर उनकी वेब सीरीज ‘हाई’ रिलीज के लिए तैयार है, जिसकी कहानी का आधार है एक काल्पनिक ड्रग्स। ‘हाई’ के प्रमोशनल इंटरव्यू के दौरान नवभारतटाइम्स ऑनलाइन से हुई बेहद खास ( Exclusive ) बातचीत में रणवीर ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की।

रणवीर ने इन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में ग्रुपइज्म-गैंगइज्म-नेपोटिजम को लेकर चल रही बहस को अपने शब्दों में अलग ढंग से समझाते हुए कहा कि दुनिया भर में सभी तरह की इंडस्ट्री में कॉर्टिलाइजेशन के लिए कड़े कानून बनाये गए हैं, लेकिन बॉलीवुड को अब तक इंडस्ट्री का दर्जा नहीं मिला है, इस वजह से इंडस्ट्री कोई लिए बनाए गए कानून यहां काम नहीं करते हैं। इसी वजह से बॉलीवुड के बड़े लोग खुफिया तौर से कॉर्टिलाइजेशन ( Cartelisation ) खूब कर रहे हैं।

बॉलिवुड को मीडिया बदनाम कर रही है
रणवीर समझते हुए कहते हैं, ‘बॉलिवुड यानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को लेकर हर रोज अखबारों में जो नेगेटिव हेडलाइन बनती है और इस वजह से इंडस्ट्री की जो बदनामी हो रही है, इसकी सबसे ज्यादा जिम्मेदार मीडिया है।’

नेपोटिजम – रेप्युटिशन को लेकर शिकायत
‘नेपोटिजम को लेकर जो यह बात हो रही है कि एक फिल्मी परिवार अपने बेटे-बेटी या भतीजे का करियर बनाने के लिए करोड़ों-अरबों रुपए लगा रहे हैं तो हम जैसे आउटसाइडर को क्या तकलीफ है। मैं आपको यह समझा दूं कि बात करोड़ों रुपए लगाने की बिल्कुल भी नहीं है, यहां बात रेप्युटेशन सौंपने की हो रही है।’

वेल्थ दें भाइयों-भतीजों को, हमें कोई तकलीफ नहीं
‘इसे लोगों को अच्छी तरह समझना होगा कि बात क्या है। किसी ने मुझे नेपोटिजम को समझते हुए कहा कि एक नाई की दुकान है तो वह अपनी दुकान अपने बेटे को देना, न कि शहर के सबसे अच्छे नाई को। मेरा कहना यह है कि आप दुकान दे रहे हैं, उस पर कोई कुछ नहीं कह रहा है। आप अपनी वेल्थ ( संपत्ति ) अपने बच्चे को दे रहे हैं तो उस पर थोड़ी न कोई ऊंगली उठा सकता है।’

नेपोटिजम में अपनी प्रतिष्ठा-प्रसिद्धि दे रहे हैं
‘यहां ( बॉलिवुड ) में होता कि संपत्ति के साथ-साथ पूरी प्रतिष्ठा-प्रसिद्धि-ख्याति दे दी जाती है। अब भले नाई के बेटे ने कभी भी बाल न काटे हों, लेकिन गुडविल ऐसी बन जाती है, जैसे वही नाई का बेटा अब सबसे बेहतर नाई है। यह बात हो रही है नेपोटिजम की।’

आपकी संपत्ति है बेटे को दो या आग लगाओ, हमें क्या
‘आप अपनी शॉप या संपत्ति दीजिए अपने बच्चे को, कोई कुछ नहीं कह सकता है। आपकी अपनी संपत्ति है आप चाहे अपने बच्चे को दीजिए चाहे आग लगाइए, हमारा क्या लेना-देना है, लेकिन यह संपत्ति के साथ प्रसिद्धि देने का क्या सिस्टम है। यही प्रॉब्लम है।’

ग्रुपइज्म-गैंगइज्म-नेपोटिजम जैसी बातें खुल्लम-खुल्ला नहीं होती
‘फिल्म इंडस्ट्री में कुछ चीजें, जैसे काबिल होने के बाद भी फिल्म से निकाल देना, रोल काट देना, पैसे कम देना या ग्रुपइज्म-गैंगइज्म-नेपोटिजम जैसी बातें खुल्लम-खुल्ला नहीं होती हैं। यह सब बातें परदे के पीछे की जाती हैं। हां मैंने देखा है एक बड़ी फिल्म में मेरा पूरा रोल काट दिया गया था और फिल्म के सेकंड पार्ट में मुझे बिल्कुल भी नहीं रखा क्योंकि मैंने सवाल किया था कि आप पैसे भी क दे रहे हैं, रोल भी काट रहे हैं, ऐसा क्यों कर रहे हैं आप मेरे साथ।’

मल्टीस्टारर फिल्म में हमारा नाम तक नहीं लिखते बड़े निर्देशक
‘कई बार ऐसा भी हुआ है मेरे साथ कि कई स्क्रिप्ट के लिए मैंने हामी भरी, सारी बाते हुईं, लेकिन बाद में बिना जानकारी दिए, वह फिल्म किसी बड़े फिल्मी परिवार के भाई-भतीजे के साथ बनाई गई। मैंने यह भी देखा है कि यदि आप कोई मल्टीस्टारर फिल्म में बड़े दिल से काम कर रहे होते हैं तो बड़े निर्देशक 5 बड़े लोगों का नाम लिखते हैं, लेकिन हमारा नहीं, आपको साइडलाइन कर देते हैं।’

नेपोटिजम इतना है कि अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन तक नहीं मिलता
‘मैंने यह भी महसूस किया है और देखा है कि अवॉर्ड्स में भी अच्छे कलाकारों को नोटिस नहीं किया जाता, सिर्फ भतीजे-भांजो को नॉमिनेशन मिलता है और भी बहुत कुछ देखा है।’

फिल्म इंडस्ट्री में 5 से 6 बड़े प्लेयर पूरा मार्केट कॉर्नर करते हैं
रणवीर अच्छी तरह समझाते हुए कहते हैं, ‘देखिए मैं आपको समझाता हूं कि निपोटिजम-इनसाइडर-आउटसाइडर की जगह एक जो शब्द है कॉर्टिलाइज़ेशन। आप देखेंगे कि दुनिया भर में, हर तरह की इंडस्ट्री में इसके ( Crtelisation ) के खिलाफ कानून भी बने हैं। कॉर्टिलाइजेशन, जिसमें 5 से 6, जो बड़े प्लेयर हैं, वह एक-दूसरे के साथ को-ऑपरेशन करते हैं और पूरा मार्किट कॉर्नर कर लेते हैं।’

खूफिया तौर से कॉर्टिलाइजेशन हो रहा है बॉलिवुड में
‘प्रॉब्लम यह है कि हमारी फिल्म इंडस्ट्री का इंडस्ट्री स्टेटस भी नहीं है, तो वह कानून भी लागू नहीं होते हैं। हमारी फिल्म इडंस्ट्री इतनी बड़ी है, लेकिन उसे इंडस्ट्री स्टेटस नहीं जाता है। बॉलिवुड अन-ऑर्गनाइज सेक्टर की तरह चल रहा है। अब ऐसे में इंडस्ट्री के जो बड़े प्लेयर हैं, वह आपस में खुफिया तौर से कॉर्टिलाइजेशन करते हैं और पूरा मार्केट कॉर्नर कर लेते हैं। समस्या यह है हमारी फिल्म इंडस्ट्री की।’

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