राज्‍यसभा निलंबन: वेंकैया नायडू ने पढ़ाया मर्यादा का पाठ, बीच में सांसदों से पूछा- हिंदी ठीक है न?

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हाइलाइट्स:

  • राज्‍यसभा में हंगामा करने वाले 8 सांसदों को किया गया है सस्‍पेंड
  • संसद परिसर में ही धरने पर बैठे हैं आठों सांसद, वापसी पर अड़े
  • सभापति वेंकैया नायडू ने समझाया, सांसद नहीं समझ रहे गलती
  • उपसभापति हरिवंश घटना से दुखी, एक दिन का उपवास रखेंगे

नई दिल्‍ली
उपसभापति हरिवंश से बदतमीजी का मामला मंगलवार को भी राज्‍यसभा में छाया रहा। सभापति एम वेंकैया नायडू ने जिन 8 सांसदों को सस्‍पेंड किया था, वे धरने पर बैठे हैं। मंगलवार सुबह जब हरिवंश उनके लिए चाय लेकर पहुंचे तो उन्‍होंने पीने से इनकार कर दिया। इसके बाद हरिवंश ने सभापति को चिट्ठी लिख कहा कि वे रविवार की घटना से बेहद आहत हैं और एक दिन का उपवास करेंगे। चिट्ठी पढ़ने के बाद, सभापति ने सदन के भीतर पक्ष-विपक्ष के सदस्‍यों को गरिमा का पाठ पढ़ाया। उन्‍होंने कहा कि निलंबित किए गए सांसद यह समझ नहीं रहे कि उनसे क्‍या गलती हुई है। बीच में नायडू ने हिंदी में भी अपनी बात रखने की कोशिश की। एक जगह अटके तो सदस्‍यों से पूछा, ‘मेरी हिंदी तो ठीक है न?’

खुद चाय बनाकर ले गए हर‍िवंश: नायडू
सदन में नायडू ने कहा, “आज सुबह हरिवंश जी ने खुद चाय बनाकर जो धरने पर बैठे हैं, उनके पिलाने के लिए गए। ये मानवता है। वे (हरिवंश) गांधीवादी पद्धति शुरू से अपना रहे हैं।” उन्‍होंने कहा, “मैं जानता हूं कि कितनी पीड़ा हुई होगी। उन्‍होंने डीटेल में नहीं बताया कि क्‍या-क्‍या उनके बारे में बोला गया। इसीलिए मैंने ‘एब्‍यूज्‍ड’ शब्‍द का प्रयोग किया। लोगों को यह एहसास नहीं हो रहा कि उन्‍होंने जो किया है, वह गलत है। अगर वह इसे सही ठहराते हैं तो मैं इसे उनके विवेक पर छोड़ता हूं।” नायडू ने कहा कि हम सदन को बिना किसी दिक्‍कत के चलाना चाहते हैं।

विपक्षी सांसदों को नायडू की सीख
राज्‍यसभा उपसभापति ने कहा कि हम चाहते हैं कि हर सदस्‍य अपनी राय दे। उन्‍होंने कहा, “सरकार प्रस्‍ताव देती है, विपक्ष विरोध करता है और सदन तय करता है। आपको सदन को चलने ही नहीं दे रहे हैं तो वो कैसे कुछ तय करेगा। यह स्‍वस्‍थ परंपरा नहीं है। अगर आप गलती मान लेंगे तो लोग आगे ऐसा नहीं करेंगे। इसलिए मैं उन सभी पार्टियों के नेताओं से अपील करता हूं कि उन्‍हें उच्‍च सदन की मर्यादा और अनुशासन बनाए रखनी है। जो तस्‍वीरें टीवी पर उभर रही हैं, वे हर भारतीय को दुखी कर रही हैं।” नायडू ने कहा कि सांसद आत्‍मनिरीक्षण करें और चर्चा में हिस्‍सा लेने के लिए सदन में लौटें।

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‘हिंदी ठीक है न…?’
नायडू ने कहा, “इतना सब होने के बाद भी उपसभापति संसद परिसर में धरने पर बैठे सांसदों के लिए चाय लेकर गए। उनकी पहल लोकतंत्र के लिए सुखद संकेत है।” सभापति ने इसके बाद कहा, ‘मैं अभी भी कह रहा हूं अंतत:’ इसके बाद वह कुछ पल रुके और सदस्‍यों से पूछा ‘मेरी हिंदी ठीक है?’ वह फाइनली को हिंदी में ‘अंतत:’ कहने पर थोड़ा कन्‍फ्यूज हुए। सदस्‍यों ने हामी भरी तो मूल रूप से तेलुगूभाषी नायडू ने आगे कहा, “अंतत: जो बाहर बैठे हैं, वो हमारे सदस्‍य हैं। उन लोगों को भी समझ आना चाहिए कि उन्‍होंने जो किया वो संसदीय पद्धति में स्‍वीकार्य नहीं है।” नायडू ने कहा कि अगर वे सांसद पश्‍चाताप कर रहे हैं तो सदन के लिए भी अच्‍छा होगा।”



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