रूसी S-500 डिफेंस सिस्टम की तैनाती अगले साल, स्टील्थ जहाज ही नहीं, सैटेलाइट भी होंगे जद में

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रूस अपने शक्तिशाली S-500 डिफेंस सिस्टम को अगले साल यानी 2021 में तैनाती की योजना बना रहा है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, इस डिफेंस सिस्टम को विकसित करने का काम अपने अंतिम चरण में है। विश्व की सबसे आधुनिक डिफेंस सिस्टम होने का दावा करने वाले रूस ने कहा है कि इसमें लगी मिसाइलें अंतरिक्ष और हवा में मौजूद किसी भी हवाई लक्ष्य को पलक झपकते ही नष्ट करने में सक्षम हैं। S-500 डिफेंस सिस्टम को प्रोमटी (Prometey) भी कहा जाता है। S-300 और S-400 की तरह इस डिफेंस सिस्टम को रूस की सरकारी कंपनी अल्माज-एनेटी कॉर्पोरेशन विकसित कर रहा है।

S-500 को 2021 में तैनाती की तैयारी में रूसी सेना

रूसी एयरोस्पेस फोर्स के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट-जनरल आंद्रेई युडिन ने एक इंटरव्यू में कहा कि रूस 2021 में दुनिया के सबसे एडवांस S-500 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम पर अपना काम पूरा कर लेगा। उन्होंने रशिया टूडे बाततीच के दौरान कहा कि एस-500 मोबाइल एयर डिफेंस और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम विकसित करने का काम 2021 में पूरा होने वाला है। रूस के हथियारों में अब तक का सबसे सबसे उन्नत और आधुनित तकनीकी पर आधारित एंटी-मिसाइल सिस्टम है। पिछले साल ही रूसी उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव ने आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के चरणबद्ध परीक्षण की घोषणा की थी।

अमेरिकी F-35A को मार गिराने में सक्षम है S-500

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रूस का दावा है कि उसके S-500 डिफेंस सिस्टम अमेरिका के F-35A लड़ाकू विमान को भी मार गिराने में सक्षम है। वहीं, अमेरिका का दावा है कि उसका F-35A लड़ाकू विमान स्टील्थ तकनीकी से लैस है। जिसे किसी भी रडार के जरिए खोजा नहीं जा सकता है। रूसी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम के जरिए अंतरिक्ष की निचली कक्षा में स्थित दुश्मन के किसी भी सैटेलाइट को भी नष्ट किया जा सकता है। बता दें कि अधिकतर मिलिट्री सैटेलाइट या जमीन पर नजर रखने वाले अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट धरती की निचली कक्षा में ही होते हैं।

S-400 से अडवांस और ज्यादा रेंज वाला है S-500

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S-500 डिफेंस सिस्टम को S-400 के आधार पर ही विकसित किया गया है। माना जा रहा है कि S-500 डिफेंस सिस्टम में 77N6 मिसाइल सीरीज के अलावा कई अन्य मिसाइलें भी तैनात होंगी। इस मिसाइल को दुश्मन के बैलिस्टिक मिसाइल को नष्ट करने के लिए S-400 के नए वर्जन में भी लगाया जाएगा। इस सिस्टम की अधिकतम रेंज 600 किलोमीटर होगी, जो 3 से 4 सेकेंड में प्रतिक्रिया देने में सक्षम होगा। एस-400 की तुलना में इस सिस्टम की मिसाइल 200 किलोमीटर की दूरी 6 सेकेंड कम समय में तय कर लेगी।

क्या काम करता है एयर डिफेंस सिस्टम

इसका काम देश में होने वाले किसी भी संभावित हवाई हमले का पता लगाना है। यह तमाम तरह के रेडार और उपग्रहों की मदद से जानकारी जुटाता है। इस जानकारी के आधार पर यह बता सकता है कि लड़ाकू विमान कहां से हमला कर सकते हैं। इसके अलावा यह एंटी-मिसाइल दागकर दुश्मन विमानों और मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर सकता है। भारत ने अब तक रूस से मारने वाले हथियार ही खरीदे हैं। पहली बार भारत रूस से S-400 डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है।

हवा में विमानों और मिसाइलों को गिराता कैसे है सिस्टम

भारतीय लहज़े में कहें, तो बहुत ही सिंपल सी टेक्निक है। इसमें ढेर सारे रेडार लगे होते हैं, जिनसे यह पता लगा लेता है कि ऑब्जेक्ट (जिसे मारना है) कहां है। इसकी क्षमता यह है कि 400 किमी के दायरे में आने वाले किसी भी खतरे को खत्म कर सकता है। फिर खतरा चाहे लड़ाकू विमान हो, ड्रोन हो या मिसाइल हो, यह गिरा देगा।

300 टारगेट को कर सकता है ट्रैक

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S-500 का जलवा यह है कि इसके रडार 100 से 300 टारगेट ट्रैक कर सकते हैं। 600 किमी तक की रेंज में ट्रैकिंग कर सकता है। इसमें लगी मिसाइलें 30 किमी ऊंचाई और 600 किमी की दूरी में किसी भी टारगेट को भेद सकती हैं। मन करे, तो इससे ज़मीनी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। सबसे तगड़ी चीज यह कि एक ही समय में यह 600 किमी तक 36 टारगेट को एक साथ मार सकने में सक्षम होगी। इसमें 12 लॉन्चर होते हैं, यह तीन मिसाइल एक साथ दाग सकता है और इसे तैनात करने में पांच मिनट लगते हैं।

अडवांस है रूस का S-500 डिफेंस सिस्टम

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यह इस बात की ज़िम्मेदारी भी ले सकता है कि दुश्मन की मिसाइल को कौन से फेज़ में गिराना है। लॉन्चिंग के तुरंत बाद, कुछ दूरी पर या करीब आने पर। अगर बूस्ट फेज़ यानी शुरुआत के समय ही मिसाइल ध्वस्त कर दी गई, तो उसके मलबे-राख से भी कोई नुकसान नहीं होगा। इसमें चार तरह की मिसाइल होती हैं। एक मिसाइल 600 किमी की रेंज वाली होती है, दूसरी 250 किमी, तीसरी 120 और चौथी 40 किमी की रेंज वाली होती है।



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