रोमानिया ने चीन को दिया बड़ा झटका, ड्रैगन की डील कैंसल कर अमेरिका से किया परमाणु समझौता

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बुखारेस्ट
लद्दाख में भारत से उलझे चीन को पूरी दुनिया में मुंह की खानी पड़ रही है। अब यूरोपीय देश रोमानिया ने चीन के साथ हुए डील को कैंसल करते हुए अमेरिका के साथ परमाणु समझौता किया है। इतना ही नहीं, रोमानियाई सरकार ने यह भी कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधीन काम करने वाली प्रत्येक चीनी कंपनी पूरी दुनिया के लिए एक संभावित खतरा है।

रोमानिया ने चीन से तोड़ा समझौता
रोमानिया के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को अमेरिका के साथ सहयोग और वित्तपोषण समझौतों पर सहमति व्यक्त की। इस समझौते के अंतर्गत डेन्यूब नदी के किनारे संयंत्र में दो परमाणु रिएक्टरों के निर्माण और इसकी मौजूदा इकाइयों में से एक का नवीनीकरण शामिल है। 2020 के शुरुआत में ही रोमानियाई सरकार ने चीन के साथ इस समझौते को रद्द कर दिया था।

अब अमेरिका बनाएगा रोमानिया में रिएक्टर
यू.एस. ऊर्जा विभाग ने अपने बयान में कहा कि सचिव डैन ब्रोइलेट और रोमानिया के अर्थव्यवस्था और ऊर्जा मंत्री वीरगिल पोपस्कु ने सिविल न्यूक्लियर पॉवर प्रोग्राम के मसौदे को अंतिम रूप दिया है। यह मसौदा गवर्मेंट टू गवर्मेट डील के अंतर्गत हुआ है। यह कदम राज्य के स्वामित्व वाली ऊर्जा कंपनी Nuclearelectrica के खत्म होने के बाद आया है।

चीनी कंपनिया दुनिया के लिए खतरा
इस कंपनी ने ही चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप (CGN) के साथ 5 साल का समझौता किया था। इसके जरिए चीनी कंपनी रोमानिया के सर्नवोडा के परमाणु संयंत्र में 700-मेगावाट के दो नए रिएक्टरों का निर्माण करने वाली थी। अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले कार्यक्रम में रोमानिया के एड्रियन जुकरमन ने कहा कि चीनी कंपनियां पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं। सीजीएन, हुआवेई और अन्य कम्युनिस्ट चीनी कंपनियों की तरह इसकी भ्रष्ट व्यावसायिक प्रथाओं के लिए प्रेरित किया गया है।

8 बिलियन डॉलर है परियोजना की लागत
अमेरिका और रोमानिया के संयुक्त बयान में कहा गया है कि अमेरिका दो नए परमाणु रिएक्टरों का निर्माण करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय टीम के लिए विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी प्रदान करेगा। इसके अलावा वह सर्नवोडा परमाणु ऊर्जा संयंत्र में एक मौजूदा रिएक्टर को फिर से शुरू करेगा। 8 बिलियन डॉलर की इस परियोजना का नेतृत्व अमेरिकी निर्माण और इंजीनियरिंग फर्म AECOM करेगी। जबकि इसमें रोमानियाई, कनाडाई और फ्रांसीसी कंपनियों की सहायता भी ली जाएगी।



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