लद्दाख में तनाव, चीन ने गुजरात सीमा पर पाकिस्‍तान में भेजे फाइटर जेट और सैनिक

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पेइचिंग
पूर्वी लद्दाख में भारत के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन ने गुजरात सीमा से सटे पाकिस्‍तानी एयरबेस पर बड़ी तादाद में सैनिक और फाइटर जेट तैनात किए हैं। ये चीनी सैनिक द्व‍िपक्षीय सैन्‍यभ्‍यास में हिस्‍सा लेने के लिए पाकिस्‍तान पहुंचे हैं। चीनी सेना ने सोमवार को ऐलान किया कि इस द्विपक्षीय अभ्‍यास का मकसद दोनों ही सेनाओं के ‘वास्‍तविक लड़ाकू प्रशिक्षण’ को बेहतर बनाना है।

चीन की सेना पीएलए ने एक बयान जारी करके कहा कि चीन की वायुसेना ने 7 दिसंबर को पाकिस्‍तानी वायुसेना के साथ मिलकर सिंध प्रांत के थाट्टा जिले में स्थित भोलारी हवाई ठिकाने पर युद्धाभ्‍यास करने के लिए पहुंचे हैं। ये सैनिक चीन और पाकिस्‍तान की सेना के संयुक्‍त अभ्‍यास शाहीन 9 में हिस्‍सा लेंगे। चीन और पाकिस्‍तान के बीच यह युद्धाभ्‍यास ऐसे समय पर हो रहा है जब लद्दाख में एलएसी पर भारत और चीन के बीच तनाव अपने चरम पर है।

चीन ने अपने बयान में यह नहीं बताया है कि कितने सैनिक तैनात किए गए हैं, लेकिन उसने कहा कि यह दिसंबर के आखिर तक चलेगा। उसने कहा कि यह युद्धाभ्‍यास चीन-पाकिस्‍तान के बीच में सैन्‍य संबंधों को बढ़ावा देगा, दोनों सेनाओं के बीच व्‍यवहारिक सहयोग को मजबूत करेगा और दोनों ही सेनाओं के बीच वास्‍तविक युद्धक प्रशिक्षण के स्‍तर को बेहतर बनाएगा। शाहीन युद्धक प्रशिक्षण के पिछले युद्धाभ्‍यास में सितंबर 2019 में 50 फाइटर जेट ने हिस्‍सा लिया था जो सबसे ज्‍यादा है।

इससे पहले चीन की वायुसेना का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट Y20 पाकिस्‍तान के भोलारी एयरबेस के पास देखा गया था। इसके साथ चीन की वायुसेना का एक और फाइटर जेट मौजूद था। चीनी सेना ने लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक एलएसी के पास अपने फाइटर जेट तैनात कर रखे हैं। इससे पहले चीन की सेना और वायुसेना ने भारत से लगती सीमा के पास अपने देश में कई अभ्‍यास किए थे। चीनी मीडिया का दावा है कि इस अभ्‍यास का मकसद पश्चिमी इलाके में अपनी सीमाओं सुरक्षा करने की क्षमता का प्रदर्शन करना था।

रणनीतिक रूप से बेहद अहम है भोलारी एयरबेस
पाकिस्‍तान के भोलारी एयरबेस की स्‍थापना वर्ष 2017 में हुई थी। पाकिस्‍तानी वायुसेना के प्रमुख ने भोलारी प्रॉजेक्‍ट को रणनीतिक रूप से बेहद अहम परियोजनाओं में शामिल किया है। उन्‍होंने कहा, ‘वास्‍तव में पाकिस्‍तानी वायुसेना के लिए भोलारी एयरबेस जमीन और समुद्र में कार्रवाई के लिए क्षमता बढ़ाने को बेहद अहम है। इससे पहले अंतिम शाहीन युद्धाभ्‍यास भी भारत से लगे शिंजियांग प्रांत में हुआ था। इसमें दोनों देशों ने छद्म युद्धाभ्‍यास किया था।



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