लद्दाख में तनाव भड़काकर शांति-शांति चिल्ला रहा चीन, बोला- सेना हटाने पर बन सकती है बात

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पेइचिंग
लद्दाख में आए दिन तनाव को भड़का रहा चीन दुनिया को दिखाने के लिए शांति का ढोल पीट रहा है। एक तरफ उसकी सेना लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक उकसावे वाली कार्रवाई कर रही है, वहीं चीन के राजनयिक शांति कायम करने का दिखावा कर रहे हैं। सोमवार को भारत और चीन के बीच वरिष्ठ कमांडर स्तर की 7वीं बैठक के बाद चीनी रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया है। जिसमें जल्द ही सेनाओं को पीछे हटाने के मुद्दे पर सहमति बनने की बात कही गई है।

चीन बोला- भारत के साथ सकारात्मक रही चर्चा
चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वरिष्ठ कर्नल रेन गुओकियांग ने कहा कि 12 अक्टूबर को भारत चीन के वरिष्ठ कमांडरों की 7 वीं बैठक चुशूल में आयोजित की गई थी। इस दौरान भारत-चीन के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक गंभीर विचार-विमर्श का एक रचनात्मक आदान-प्रदान हुआ। वार्ता में शामिल सदस्यों का विचार था कि ये चर्चाएं सकारात्मक थीं। एक दूसरे की स्थितियों के प्रति रचनात्मक समझ बढ़ीं।

जल्द ही सेनाओं को पीछे हटाने पर बन सकती है सहमति
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से संवाद और संचार बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने आशा जताई कि दोनों पक्ष जल्द से जल्द सेना को पीछे हटाने के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंच सकते हैं। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के नेताओं द्वारा मतभेदों को भुलाने और सीमा क्षेत्रों में शांति के लिए महत्वपूर्ण समझ को लागू करने पर जोर दिया।

भारतीय सेना ने भी कही थी यही बात
भारतीय सेना के प्रवक्ता ने भी चीन के साथ सातवें राउंड की बैठक के बाद यही बात कही थी। सेना ने प्रवक्ता ने बताया था कि 12 अक्टूबर को चुशुल में भारत-चीन के सीनियर कमांडरों की सातवें राउंड की बैठक हुई। भारत-चीन सीमा इलाके के वेस्टर्न सेक्टर में एलएसी पर तनाव को कम करने के लिहाज से दोनों पक्षों ने ईमानदार, व्यापक और रचनात्मक चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत-चीन बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि जल्द से जल्द सैनिकों के पीछे हटने के लिए दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान निकालने के लिए संवाद बनाए रखा जाएगा।

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भारत अपने रुख में अडिग
हालांकि भारत अपने रुख पर अड़ा हुआ है कि उसे “पूर्वी लद्दाख का पूरा” डी-एस्केलेशन प्लान बनाना है, जिसमें पैंगोंग त्सो, चुशुल और गोगरा-हॉटसप्रिंग्स के साथ-साथ भारी पीएलए बिल्ड-अप शामिल हैं। रणनीतिक रूप से स्थित डेपसांग-दौलत बेग ओल्डी सेक्टर, जैसा कि पहले TOI द्वारा रिपोर्ट किया गया था।

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लद्दाख की ठंड से चीनी सेना के उड़े होश
अक्टूबर की शुरुआत होते ही लद्दाख के इलाके में अब ठंड भी बढ़नी शुरू हो गई है, लेकिन चीन के नापाक हरकतों पर नजर रखने के लिए भारतीय फौज ऊंचे सैन्य ठिकानों पर कब्जा बनाए रखेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तनाव अगले कुठ महीनों तक जारी रहेगा, इसलिए भारतीय फौज अपनी सेना को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी साजो-सामान भी जुटा चुकी है।

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भारत के पास सियाचीन का अनुभव
लद्दाख की भीषण ठंड को झेलने के लिए भारतीय सेना कई तरह के इक्यूपमेंट का इस्तेमाल करेगी। इनमें से अधिकतर सामानों का प्रयोग सियाचीन जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में पहले से भारतीय फौज करती आई है। ऐसे में भारतीय फौज के सामने चीनी फौज कितने दिनों तक टिकेगी, यह देखने वाली बात होगी। चीनी विदेश मंत्रालय पहले ही ठंड के दिनों में अपनी सेना को वापस बुलाए जाने की बात कर चुका है। उसको डर है कि अगर इतनी ठंड में उसके नौसिखिए सैनिक रहे तो वो भारत की गोली से नहीं बल्कि वहां के मौसम की मार से पहले ही मर जाएंगे।



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