लोकसभा स्पीकर ओम बिरला बोले- संसदीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है सदन की मर्यादा

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हाइलाइट्स:

  • ओम बिरला ने कहा-सदन की मर्यादा का पालन करना संसदीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है
  • स्पीकर बोले- कई बार सदन का बहिष्कार करना विपक्ष की राजनीतिक मजबूरी होती है
  • कोरोना काल में संसद सत्र का आयोजन करना अभूतपूर्व चुनौती वाला काम रहा

नई दिल्ली
संसद के मॉनसून सत्र के समापन के बाद मीडिया से मुखातिब लोकसभा स्पीकर ने सदन की मर्यादा व आसन की गरिमा को संसदीय प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा करार देते हुए कहा कि सदन के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वह सर्वोच्चता से उसका सम्मान करें। स्पीकर की यह टिप्पणी उस संदर्भ में बेहद अहम मानी जा रही है, जब संसद के दोनों सदनों में कुछ मुद्दों पर विपक्ष की तरफ से सीधे आसन को चुनौती दी गईं। उनका कहना था कि संसद के दोनों ही सदन हमारे लोकतंत्र का प्रतिबिंब हैं।

स्पीकर बोले- राज्यसभा की घटना दुर्भाग्यपूर्ण
राज्यसभा में किसान बिलों को लेकर हुई घटना को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम करार दिया। बता दें कि किसान बिलों के विरोध में राज्यसभा में विपक्ष के कुछ सदस्यों ने उपसभापति के आसन की तरफ आक्रामक रुख दिखाया था। जिसके बाद सभापति ने कार्रवाई करते हुए 8 सदस्यों को निलंबित कर दिया था।

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कई बार सदन का बहिष्कार करना विपक्ष की राजनीतिक मजबूरी
हालांकि उन्होंने कुछ मुद्दों को लेकर विपक्ष की तरफ से सदन के बहिष्कार या विरोध प्रकट करने को सदस्यों का अधिकार और उससे ज्यादा उनकी राजनीतिक मजबूरी करार दिया। उनका कहना था कि कई बार राजनैतिक मजबूरियां होती हैं, जब आपको एक अलग स्टैंड लेना होता है। हालांकि उन्होंने बताया कि जब लोकसभा में विपक्ष व सत्ता पक्ष के बीच टकराव की स्थिति आई तो सदन का संरक्षक होने के नाते उन्होंने दोनों ही पक्षों को बुलाकर बात करने की कोशिश की।

कोरोना काल में संसद सत्र का आयोजन अभूतपूर्व चुनौती
कोरोना काल में संसद सत्र के आयोजन को उन्होंने अभूतपूर्व चुनौती करार देते हुए कहा कि सत्र के आयोजन से पहले हमने कोरोना काल में दुनिया के तमाम संवैधानिक संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले आयोजनों व कामकाज की स्टडी की। कई देशों में वर्चुअल संवैधानिक संस्था चलाई गईं, लेकिन ज्यादातर लोगों ने भारत की तरह प्रत्यक्ष रूप से अपने आयोजन किए। उनका कहना था कि इस अभूतपूर्व स्थिति में भी सभी लोगों ने मिलकर अपने संवैधानिक जिम्मेदारियों को समझते हुए अपनी भूमिका निभाई, जिससे इस सत्र में रिकॉर्ड कामकाज लगभग 167 फीसदी कामकाज हुआ।

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MPLAD के मुद्दे पर भी रखी अपनी बात
सत्र के दौरान सदस्यों द्वारा सांसद निधि के मुद्दे को लेकर उठाए गए सरोकार पर स्पीकर का कहना था कि सभी दलों के सांसदों ने सांसद निधि को लेकर अपने सरोकार सदन में व सरकार के सामने रखे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सरकार व संबंधित पक्ष इस बारे में मेरिट के आधार पर फैसला लेंगे। गौरतलब है कि कोरोना के चलते सरकार ने सांसद निधि पर अगले दो साल के लिए रोक लगा दी है। जिसका खासा विरोध हुआ।

जिस बिल के पक्ष के बहुमत होता है वह पास हो जाता है
किसान बिलों सहित कुछ मुद्दों पर विपक्ष को अपनी बात न रख पाने का मौका दिए जाने के मुद्दे पर स्पीकर का कहना था कि कृषि से जुड़े बिलों पर लोकसभा ने 5 घंटे 36 मिनट तक चर्चा हुई। उनका कहना था कि जिस बिल के पक्ष में बहुमत होता है, वो बिल सदन में पास हो जाता है। वहीं, संसद की नई इमारत को लेकर उनका कहना था कि संसद के 100 साल हो रहे हैं। बहुत जल्दी हम नया भवन बनाने जा रहे हैं। 21 महीने में नई बिल्डिंग का निर्माण पूरा की संभावना है।

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