वेनेजुएला: राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने ‘भारी बहुमत’ से जीते चुनाव जिन्हें फर्जी बताकर विपक्ष ने किया था बहिष्कार

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काराकास
वेनेजुएला में हुए नैशनल असेंबली के चुनाव में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने जीत दर्ज की है। गौरतलब है कि देश के विपक्ष ने फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। मादुरो की पार्टी को 68% वोट मिले थे और विपक्ष को सिर्फ 18% वोट मिले। इसके साथ ही मादुरो ने देश में हर संस्थान पर पूरी तरह से सत्ता स्थापित कर ली है।

मादुरो की यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी ऑफ वेनेजुएला (PSUV) और सहयोगी दलों ने नैशनल असेंबली की 67 सीटों पर कब्जा कर लिया है। यूरोपियन यूनियन और ऑर्गनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स (OAS) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने रविवार को हुए चुनावों के लिए ऑब्जर्वर भेजने से इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि वेनेजुएला में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हालात मौजूद नहीं हैं।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने चुनावों की निंदा की और प्रक्रिया को फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि ये चुनाव नहीं थे। वाइट हाउस नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल ने भी यह कहा कि रविवार को हुए चुनाव फर्जी थे। इन्होंने सिर्फ मादुरो को सत्ता में रखा है और देश के लोगों की जिंदगी बेहतर करने के लिए कुछ नहीं किया। मादुरो को रूस, क्यूबा, चीन और ईरान जैसे देशों का समर्थन था जबकि ट्रंप उनके खिलाफ रहे हैं।

अमेरिकी सरकार ने वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति निकोलस मादुरो और अन्‍य अधिकारियों को ‘नार्को टेररिज्म’ के लिए दोषी ठहराया था। माना जा रहा है कि मादुरो प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है। राष्‍ट्रपति मादुरो वर्ष 2013 से सत्‍ता में बने हुए हैं। अमेरिका का आरोप है कि मादुरो कोलंबिया के गुरिल्‍ला समूह फार्क के साथ मिलकर साजिश रच रहे हैं।



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