शक्तिशाली टेलिस्कोप ने रेकॉर्ड समय में मैप कीं 30 लाख गैलेक्सी, मिला ‘ब्रह्मांड का गूगल मैप’

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कैनबेरा
ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने एक नए और शक्तिशाली टेलिस्कोप की मदद से 30 लाख गैलेक्सियों को रेकॉर्डतोड़ स्पीड से मैप किया है। इसे वैज्ञानिक ‘ब्रह्मांड का गूगल मैप’ बता रहे हैं। ऑस्ट्रेलियन स्क्वेयर किलोमीटर ऐरे पाथफाइंडर (ASKAP) एक रेडियो टेलिस्कोप है जो पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में स्थित है। इसने सिर्फ 300 घंटे में ये गैलेक्सी मैप की हैं। इससे पहले इतना काम करने में सालों लग जाते थे।

ब्रह्मांड की ऐटलस
ऑस्ट्रेलिया की साइंस एजेंसी CSIRO के मुताबिक इस सर्वे का नतीजा ब्रह्मांड की ऐटलस के तौर पर सामने आया है। CSIRO ने ही टेलिस्कोप को विकसित किया है और वह इसे ऑपरेट करता है। CSIRO के CEO लैरी मार्शल ने मंगलवार को एक बयान जारी करते हुए बताया, ‘ASKAP लेटेस्ट साइंस और टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से ब्रह्मांड के रहस्यों से जुड़े सदियों पुराने सवालों के जवाब खोज रहा है और दुनियाभर के ऐस्ट्रोनॉमर्स को उनकी चुनौतियां सुलझाने के लिए नए मौके दे रहा है।’

ली आसमान की तस्वीर


पहले कभी नहीं दिखा ऐसा आसमान

नए मैप में हमारे पूरे आसमान का 83% हिस्सा दिखाई दे रहा है। इसमें जैसे गैलेक्सी दिख रही हैं, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। रिसर्च के लीड CSIRO ऐस्ट्रोनॉमर डेविड मैककॉनल ने बताया है कि वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि लाखों गैलेक्सी ASKAP के भविष्य में किए जाने वाले सर्वे में पाई जाएंगी। पूरी दुनिया में ऐस्ट्रोनॉमर्स नए डेटा को ‘अनजान ब्रह्मांड को जानने और सितारों के बनने से लेकर गैलेक्सी और विशाल ब्लैक होल के इंटरैक्शन तक के बारे में जानकारी मिलेगी।’

ASKAP करीब 36 डिश ऐंटेना से बना है जो मिलकर आसमान की पनोरमा मोड में तस्वीरें लेते हैं। हाई क्वॉलिटी के टेलिस्कोप रिसीवर का मतलब होता है कि टीम को पूरे आसमान का मैप बनाने के लिए सिर्फ 903 तस्वीरों को जोड़ना होता है। पहले से सर्वे में उन्हें इसके लिए हजारों तस्वीरें चाहिए होती थीं।

नए डेटा की मदद से ऐस्ट्रोनॉमर गैलेक्सीज की बड़ी आबादी का स्टेटिस्टिकल अनैलेसिस कर सकेंगे। इससे ब्रह्मांड कैसे विकसित हुआ और आज इसका स्ट्रक्चर कैसा है, इसके बारे में समझा जा सकेगा। ऑस्ट्रेलिया के इंडस्ट्री, साइंस ऐंड टेक्नॉलजी मिनिस्टर केरन ऐंड्रू ने कहा है, ‘ASKAP एक बड़ा प्रौद्योगिकी विकास है जिसने हमारे वैज्ञानिकों, इंजिनियरों और इंडस्ट्री को डीप स्पेस डिस्कवरी के लिए आने वाली पीढ़ियों को आगे की सीट पर बैठा दिया है।’
(Source: CNN)



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