‘शाहीन बाग की दादी’ दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में, TIME ने बताया आइकन

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हाइलाइट्स:

  • मशहूर TIME मैगजीन ने जारी की दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्‍ट
  • ‘शाहीन बाग की दादी’ के रूप में मशहूर बिलकिस को ‘आइकन’ कैटेगरी में मिली जगह
  • नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन का चेहरा थीं 82 साल की बिलकिस
  • विरोध में कहा था, जब तक रगों में खून बह रहा है, तब तक यहीं बैठी रहूंगी

नई दिल्‍ली
शाहीन बाग की दादियों में से एक, बिलकिस दुनिया की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में शुमार हो गई हैं। TIME मैगजीन की ताजा लिस्‍ट में उन्‍हें ‘आइकन’ कैटेगरी में जगह दी गई है। बिलकिस उन हजारों प्रदर्शनकर्ताओं में से एक थीं जो दिल्‍ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ महीनों बैठी रहीं। उनके बारे में पत्रकार राणा अय्युब ने लिखा है कि ‘बिलकिस को मशहूर होना चाहिए ताकि दुनिया तानाशाही के खिलाफ संघर्ष की ताकत का एहसास करे।’

ट्विटर पर ट्रेंड हो रहा ‘शाहीन बाग’
टाइम मैगजीन की तरफ से लिस्‍ट जारी होने के बाद ट्विटर पर ‘शाहीन बाग’ ट्रेंड करने लगा। यूजर्स ने लिखा कि इस उम्र में बिलकिस के संघर्ष का जज्‍बा काबिलेतारीफ है। कांग्रेस नेता सलमान निजामी ने बिलकिस को बधाई देते हुए एक तस्‍वीर ट्वीट की। दीपांशु ने लिखा कि ‘दादी जी रॉकिंग।’ गणेश ने लिखा कि ‘हमारे देश की दादी किसी से कम हैं क्‍या।’

कोरोना वायरस के चलते खत्‍म हुआ था प्रदर्शन
सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में ऐक्टिविस्‍ट्स से लेकर स्‍थानीय लोगों ने लंबे वक्‍त तक प्रदर्शन किया था। जब भारत में कोरोना वायरस के केस बढ़ने लगे तो ऐहतियातन दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल को खाली करवा दिया था। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च में ‘जनता कर्फ्यू’ का ऐलान किया था तब बिलकिस ने कहा था, “अगर प्रधानमंत्री को हमारी सेहत की इतनी ही चिंता है तो आज इस काले कानून को रद्द कर दें फिर हम भी रविवार के दिन को जनता कर्फ्यू में शामिल हो जाएंगे।”

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सीएए को बताया था मुस्लिमों के खिलाफ
नागरिकता संशोधन कानून के तहत बांग्लादेश अफगानिस्तान, पाकिस्तान से आये हिंदू सिख बौद्ध, जैन और ईसाई धर्म के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है। केंद्र सरकार ने इस कानून को बार बार सफाई दी है कि यह कानून नागरिकता देने के लिए है न कि लेने के लिए। वहीं, प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि यह कानून मुस्लिमों की नागरिकता छीनने के मकसद से लाया गया है। प्रदर्शनकारी सीएए के अलावा एनआरसी को लेकर भी आंदोलनरत थे।



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