शुरू हुई FATF की बैठक, ‘ग्रे लिस्ट’ में बना रहा पाकिस्तान तो क्या होगा असर?

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इस्लामाबाद
फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) की डिजिटल पूर्ण सत्र की बैठक आज से शुरू हो गई है। तीन दिनों की इस बैठक में पाकिस्तान के आतंक के खिलाफ प्रदर्शनों की समीक्षा की जाएगी। जानकारों का मानना है कि उसे पहले की ही तरह अभी भी ग्रे लिस्ट में ही रखा जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान खुद को इस सूची से निकालने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है।

पाकिस्तान के रवैये पर नाराजगी जता चुका है FATF
कुछ दिन पहले ही एफएटीएफ ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के लचर रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई थी। एफएटीएफ के अधिकारियों ने कहा था कि पाकिस्तान आतंक के खिलाफ हमारे 27 कार्ययोजनाओं में से प्रमुख छह योजनाओं को पूरा करने में नाकाम साबित हुआ है। इसमें भारत में वांछित आतंकवादियों मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई न करना भी शामिल हैं।

अमेरिका-फ्रांस समेत ये देश भी पाकिस्तान के खिलाफ
इसके अलावा नामित करने वाले चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी पाकिस्तान की सरजमीं से गतिविधियां चला रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की उसकी प्रतिबद्धता से संतुष्ट नहीं हैं। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह रोकने के लिए कुल 27 कार्ययोजनाएं पूरी करने की जिम्मेदारी दी थी जिनमें से उसने अभी 21 को पूरा किया है और कुछ काम पूरे नहीं कर सका है।

चीन-तुर्की की शरण में पाकिस्तान
खुज को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से निकाले जाने के लिए पाकिस्तान अपने आका चीन और तुर्की की शरण में चला गया है। इतना ही नहीं, वह मलेशिया से भी खुद की सहायता की अपील कर रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी खुद इन देशों के नेताओं से बात कर अपने लिए सहायता मांग रहे हैं। हालांकि, इन देशों ने बातचीत के बाद जारी बयान में एफएटीएफ का नाम नहीं लिया है।

ग्रे लिस्ट में बना रहा पाकिस्तान तो क्या होगा असर
अगर पाकिस्तान एफएटीएफ की इस बैठक में भी ग्रे लिस्ट में बना रहता है तो उसकी आर्थिक स्थिति का और बेड़ा गर्क होना तय है। पाकिस्तान को अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ), विश्‍व बैंक और यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। पहले से ही कंगाली के हाल में जी रहे पाकिस्तान की हालात और खराब हो जाएगी। दूसरे देशों से भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद मिलना बंद हो सकता है। क्योंकि, कोई भी देश आर्थिक रूप से अस्थिर देश में निवेश करना नहीं चाहता है।

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पाकिस्तानी जीडीपी का 90 फीसदी कर्ज!
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का सार्वजनिक ऋण इस साल जून तक बढ़कर 37,500 अरब पाकिस्तानी रुपये या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 90 प्रतिशत हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान सिर्फ इस साल ही कर्ज चुकाने पर 2,800 अरब रुपये खर्च करेगा जो संघीय राजस्व बोर्ड के अनुमानित कर संग्रह का 72 प्रतिशत है। दो साल पहले जब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार सत्ता में आई थी, तब सार्वजनिक ऋण 24,800 लाख करोड़ रुपये था, जो तेजी से बढ़ रहा है।

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चालू वित्त वर्ष में 15 अरब डॉलर का कर्ज
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार पत्र ‘दी एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ को बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 में करीब 15 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज में से करीब 10 अरब डॉलर का इस्तेमाल पुराने परिपक्व हो रहे कर्ज (मैच्योर डेट) के भुगतान में किया जायेगा। यह राशि ब्याज भुगतान के अतिरिक्त है। खबर में कहा गया है कि शेष राशि देश के बाहरी सार्वजनिक कर्ज (एक्सटर्नल पब्लिक डेट) का हिस्सा बन जाएगी, जो कि इस साल मार्च अंत तक बढ़कर 86.4 अरब डॉलर ( भारतीय रुपये के हिसाब से 6.5 लाख करोड़) तक पहुंच चुकी है।

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विदेशी मुद्रा भंडार केवल 12 अरब डॉलर
पाकिस्तान द्वारा 15 अरब डॉलर का कर्ज किसी एक साल में लेना उसके समक्ष खड़ी चुनौतियों और गहराते कर्ज संकट को दर्शाता है। पाकिस्तान में बिना कर्ज के विदेशी मुद्रा प्रवाह नहीं हो पा रहा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास जो 12 अरब डॉलर का कुल विदेशी मुद्रा भंडार है, वह ज्यादातर कर्ज से मिली राशि ही है। सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय को वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कर्जदाताओं, कमर्शल बैंक, यूरोबॉन्ड जारीकर्ताओं और आईएमएफ से कुल मिलाकर 15 अरब डॉलर मिलने का अनुमान है।



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