सीमा पर लगे पिलर की जांच कर लौट रही नेपाली टीम पर चीनी सुरक्षाबलों ने दागे आंसू गैस के गोले

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हाइलाइट्स:

  • नेपाल में सीमा के पिलर की जांच कर रही टीम पर अटैक
  • चीन के सुरक्षाबलों ने दागी आंसू गैस, वापस आ रही थी टीम
  • चीन के साथ सीमा पर लगे खंभों का निरीक्षण करने गई थी
  • देश की सरकार कर चुकी है दावा, चीन से नहीं सीमा विवाद

काठमांडू
भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर तीखे तेवर अपनाने वाला नेपाल चीन के साथ ऐसे किसी विवाद की बात का खंडन करता आया है। यहां तक कि देश के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने यहां तक साफ-साफ कह दिया था कि देश का सीमा विवाद भारत के साथ है, चीन के साथ नहीं। दूसरी ओर तमाम सरकारी रिपोर्ट्स और विपक्षी दल भी सरकार पर सच छिपाने का आरोप लगाते रहे और दावा किया गया कि चीन सीमा से खंभे गायब कर यथास्थिति के साथ छेड़छाड़ कर रहा है। अब चीन के सुरक्षाबलों ने नेपाल की एक टीम पर आंसू गैस के गोले दागने की खबर सामने आई है।

खंभे को मॉनिटर कर लौट रहे थे
ये टीम हुमला जिले के नमखा में सीमा पर लगे पिलर की जांच करने गई थी। इस बारे में नमखा गांव के निकाय के उपाध्यक्ष पेना लामा ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चीनी ओर से नेपाल की टीम को निशाना बनाकर आंसू गैस के गोले दागे गए। इस टीम का नेतृत्व नेपाली कांग्रेस के नेता जीवन बहादुर शाही कर रहे थे।

जब टीम पर हमला हुआ तब ये लोग हुमला में पोस्ट को मॉनिटर करने के बाद वापस लौट रहे थे। लामा ने कहा कि आंसू गैस पिलर नंबर 9 के पास दागी गई जब वे लोग 5, 6, 7 और 8 नंबर के पिलर का निरीक्षण करके वापस लौट रहे थे। लामा को भी आंखों में चोट आई है।


रिपोर्ट्स में लगा था आरोप
गौरतलब है कि नेपाल के कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन तिब्बत में निर्माणकार्य के नाम पर नेपाल की जमीन और उसके गांव हथिया रहा है। आरोप लगाया गया कि कहीं नदियों की दिशा बदलकर, तो कहीं सीमा पर लगे खंभे आगे बढ़ाकर चीन नेपाल की जमीन कब्जा रहा है। इसे लेकर विपक्षी दलों ने खूब हंगामा भी किया।

नेपाल की सरकार करती रही खंडन
हालांकि, देश की नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी इन आरोपों का खंडन करती आई। देश के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने यहां तक कह दिया कि जिन खंभों के गायब होने का दावा किया जा रहा है, वह कभी लगे ही नहीं थे। देश के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने भी कहा कि चीन के साथ सीमा विवाद नहीं है, भारत के साथ है।

अब कालापानी और लिपुलेख पर बात करेंगे भारत-नेपाल



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