सुदेश भोसले Exclusive: अमिताभ बच्चन के इस गाने के लिए 17 घंटे भूखा रहा था मैं

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जाने-माने सिंगरसुदेश भोसले ने नवभारतटाइम्स डॉट कॉम के फेसबुक पेज पर हुई एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि कॉलेज की पढ़ाई के समय मुंबई के बांद्रा के नैशनल कॉलेज के एक फंक्शन में ऑर्केस्ट्रा देखने गए थे। वहीं एक दोस्त से इच्छा जाहिर की कि स्टेज पर जाकर अमिताभ बच्चन की फिल्मों के डायलॉग बोलना चाहते हैं। इजाजत मिल गई और जब उन्होंने स्टेज पर कदम रखा और कहा कि वह आज अमिताभ बच्चन की आवाज में डायलॉग बोलेंगे, तो सारे लड़के-लड़कियां हंसने लगे। दरअसल यह हूडिंग सुदेश भोसले की पतली-दुबली पर्सनैलिटी को देखकर हुई थी। लोगों को लगा, यह क्या बच्चन की आवाज निकलेगा।

तब अमिताभ बच्चन के आवाज की मिमिक्री नहीं होती थी
सुदेश बताते हैं, ‘इस समय तक लोग अशोक कुमार, राजकुमार, ओमप्रकाश, जीवन जैसे स्टार्स की आवाज निकालते थे, अमिताभ बच्चन की आवाज की मिमिक्री नहीं होती थी। मैंने जैसे ही माइक पर अमितजी की फिल्म अमर अकबर एंथनी का डायलॉग बोलना शुरू किया, लोगों की पॉजिटिव हूटिंग शुरू हो गई।’

बिग बी के लिए पहली बार फिल्म अजूबा 3 गाने गाये थे
सुदेश फिल्म हम के जुम्मा-चुम्मा दे दे… गाने की रिकॉर्डिंग का किस्सा सुनाते हुए बताते हैं, ‘संगीत निर्देशक लक्ष्मीकांत – प्यारे लाल की जोड़ी के लक्ष्मीकांत जी ने एक ऑर्केस्ट्रा में सुना और मुझे शशि कपूर साहब से मिलवाया। शशि कपूर ने मेरी आवाज सुनते ही पहली बार में ही अपनी अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म अजूबा में बिग बी पर फिल्माए जाने वाले तीन गाने दे दिए। इसके बाद मुझे फिल्म हम में जुम्मा-चुम्मा दे दे… गाने का मौका मिला।’

12 दिन में लिखा गया जुम्मा-चुम्मा दे दे सॉन्ग
जुम्मा चुम्मा दे दे… गाने की रिकॉर्डिंग का बड़ा दिलचस्प किस्सा है। पहले तो लक्ष्मीकांत जी ने अपने घर पर मेरी जमकर प्रैक्टिस करवाई। कभी वह मेरी अपनी आवाज में जुम्मा-चुम्मा दे दे… सुनते तो कभी वह मुझे बच्चन साहब की आवाज में गाने को कहते। गाने की एक-एक, दो-दो लाइन बनाते और प्रैक्टिस करते हुए लगभग 12 दिन लग गए। गाने के अंतरा आनंद बख्शी साहब ने लिखे।’

अमितजी ने गाना सुनते ही कहा- तुरंत रिकॉर्ड करो
‘जब गाने का पूरा ढांचा बन गया, तब लक्ष्मीकांत जी के घर बच्चन साहब को बुलाया गया और मैंने उन्हें बिना माइक्रोफोन के गाना सुनाया। जैसे ही अमितजी ने मेरा गाना सुना, कहा – तुरंत रिकॉर्ड कर लो। यह गाना बच्चन साहब के सामने ही रिकॉर्ड किया गया।’

80 म्यूजिशन संग 17 घंटे चली थी जुम्मा-चुम्मा की रिकॉर्डिंग
‘जिस दिन गाना रिकॉर्ड किया गया, उस दिन सुबह 9 बजे से कुल 80 म्यूजिशन के साथ गाने की रिकॉर्डिंग शुरू हुई। पूरे 17 घंटों के बाद रात करीब 2 बजे हम सबका पैकअप हुआ। रिकॉर्डिंग के दौरान 17 घंटों में मैंने सिर्फ 25 ग्लास चाय पी।’

जुम्मा-चुम्मा दे-दे की रिकॉर्डिंग में 17 घंटे भूखा रहा था
‘अपनी आवाज़ खराब होने के डर और काम करने के उत्साह के कारण 17 घंटों तक भूखा रहा, एक दाना तक नहीं खाया था। सच बताऊं तो मुझे भूख की याद भी नहीं थी और मुझे यह लग रहा था कि इतने लोग, इतना बड़ा गाना, कहीं कुछ खा लिया तो आवाज किसी तरह की गड़बड़ी न आ जाए।’

बच्चन साहब को देख हालत खराब हो जाती थी
‘यह गाना बांद्रा के महबूब स्टूडियो में रिकॉर्ड किया जा रहा था और वहीं पर अमिताभ बच्चन अपनी एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। जब भी शूटिंग में ब्रेक होता वह चले आते रिकॉर्डिंग में। जैसे ही बच्चन साहब सामने आते डर के मारे मेरी हालत और खराब हो जाती है।’

बच्चन जी के सामने नहीं करना चाहता था रिकॉर्डिंग
‘मैं अपनी फाइनल रिकॉर्डिंग अमिताभ बच्चन के सामने नहीं करना चाहता था, मुझे डर लग रहा था। मेरी यह बात लक्ष्मीकांत जी समझ गए थे और वह बच्चन साहब को मेरे सामने से बाहर ले गए। कई बार वह मेरे कॉन्फिडेंस को बढ़ाने के लिए यह ट्रिक आजमाते और कहते अपनी आवाज में गाओ, फिर कह ते उनकी ( बच्चन ) की आवाज में गाओ, फिर कहते यह सही है, इसी आवाज में गाओ और इस तरह जुम्मा चुम्मा दे दे की रिकॉर्डिंग पूरी हुई।’

रिकॉर्ड होते ही हिट हो गया था जुम्मा-चुम्मा’
‘आज 30 साल हो गए उस गाने को रिकॉर्ड किए, यह गाना रिकॉर्डिंग होते-होते ही हिट हो गया था, रिकॉर्डिंग में मौजूद सभी लोगों की जुबान पर छा गया था। जो 25 ग्लास चाय पी थी, उसकी एसिडिटी का पता मुझे दूसरे दिन सुबह लगा, हालत खराब हो गई थी मेरी।’

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