सूरज के खत्म होने के बाद भी धरती पर रहेगा जीवन? सबसे शक्तिशाली टेलिस्कोप लगाएगा पता

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वैज्ञानिकों ने ऐसा तरीका निकाला है जिससे मरे हुए सितारों का चक्कर लगाने वाले ग्रहों का पता लगाया जा सकता है। हाल ही में ऐसे ही एक ग्रह का पता लगाया गया था जो एक White Dwarf Star का चक्कर लगा रहा था। वहीं, अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने नई स्टडी में दिखाया है अगले साल अक्टूबर में लॉन्च होने वाला James Webb Space Telescope ऐसे ग्रहों पर जीवन की खोज कर सकता है। इसे देश की स्पेस एजेंसी NASA तैयार कर रही है। अगर ऐसे ग्रहों पर जीवन मिलता है तो हमारी धरती के भविष्य के बारे में अहम जानकारी मिल सकेगी।

क्या होते हैं White Dwarf Star?

जब हमारे सूरज जैसे सितारे मर जाते हं या उनका पूरा ईंधन खत्म हो जाता है तो सिर्फ एक Core (सबसे अंदर का हिस्सा) बाकी रह जाता है। इसे White Dwarf कहते हैं। ये हमारे सूरज से 100 गुना छोटे होते हैं। इनका आकार पृथ्वी के बराबर होता है। इनके छोटे आकार की वजह से वैज्ञानिकों के लिए इन्हें स्टडी करना आसान हो जाता है। इस स्टडी की लेखक लीजा काल्टेनेगर ने बताया है कि अगर ऐसे तारों का चक्कर कोई ग्रह काट रहा होगा तो अगले कुछ साल में उन पर जीवन से जुड़े निशानों की खोज की जा सकती है।

देखेगा जीवन के निशान

स्टडी के को-लीड लेखक रायन मैकडॉनल्ड ने कहा है कि जेम्स वेब टेलिस्कोप की मदद से पानी और कार्बन-डायऑक्साइड का पता कुछ ही घंटों में लगाया जा सकता है। दो दिन तक इस शक्तिशाली टेलिस्कोप से ऑब्जर्वेशन करने पर ओजोन और मीथेन जैसी गैसों का पता लगाया जा सकता है। वैसे इस बारे में करीब 100 साल से जानकारी है कि चट्टानी ऑबजेक्ट मृत सितारों के चक्कर काटते हैं। सितारों से आने वाली रोशनी में रुकावट के आधार पर इसका पता चला है। इसलिए ऐसे किसी ग्रह पर जीवन भी हो सकता है, इसकी उम्मीद भी है।

तो क्या होगा सूरज के बाद?

अभी NASA की ट्रांजिटिंग एग्जोप्लैनेट सर्वे सैटलाइट यह काम कर रही है। अगर ऐसा कोई ग्रह पाया जाता है तो उसके वायुमंडल पर जीवन के निशान खोजने के लिए भी लीजा और उनकी टीम के पास मॉडल तैयार हैं। अब अगले साल जेम्स वेब के आने से यह खोज तेज की जा सकती है। अगर जीवन की संभावना पैदा होती है तो यह बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि हमारा सूरज भी एक दिन White Dwarf ही बन जाएगा। अगर White Dwarf के होते हुए उसका चक्कर काटने वाले ग्रह पर जीवन बरकरार रहता है, तो यह पृथ्वी के लिए राहत की बात होगी।



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