हज के लिए भी मुसलमानों पर जुल्म ढा रहा चीन, जारी किए 42 नए नियम

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पेइचिंग
चीन अपने मुसलमान नागरिकों को हज यात्रा पर जाने के लिए कड़े नियम-कानूनों का ऐलान किया है। चीन के नागरिक अब केवल चीनी इस्लामिक एसोसिएशन के जरिए ही सऊदी अरब हज के लिए जा सकेंगे। वहीं, नागरिकों को चीनी कानूनों का कड़ाई से पालन करते हुए धार्मिक अतिवाद को लेकर विरोध भी जताना होगा। हर साल चीन से लगभग 10000 मुसलमान हज यात्रा के लिए जाते हैं।

1 दिसंबर से लागू होंगे नियम
चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, किसी भी अन्य संगठन अथवा व्यक्ति को हज यात्रा आयोजित नहीं करनी चाहिए और हज के लिए आवेदन करने वाले चीनी नागरिकों को आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए। यह नए नियम एक दिसंबर से लागू होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित सरकारी विभागों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करें और हज पर जाने संबंधी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाएं।

चीनी मुसलमानों के सामने क्या चुनौतियां
पहले चीनी नागरिक कई अन्य माध्यमों से सऊदी अरब हज के लिए चले जाते थे। अब नए कानून के अनुसार, केवल चीनी इस्लामिक एसोसिएशन के जरिए ही चीनी मुसलमान हज यात्रा पर जा सकेंगे। इस एसोसिएशन के अधिकतर सदस्य चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मेंबर हैं। ऐसे में वे जिसे चाहेंगे उसे ही हज यात्रा पर जाने की अनुमति देंगे। इस एसोसिएशन के जरिए हज पर जाने से चीनी नागरिकों पर सरकार की पूरी नजर होगी। वह उनके गतिविधियों को ट्रैक कर कभी भी कानून तोड़ने का आरोप लगा सकती है।

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चीन में 2 करोड़ मुसलमान
आधिकारिक श्वेत-पत्र के मुताबिक, चीन में करीब दो करोड़ मुस्लिम हैं, जिनमें से उइगर और हुई मुस्लिमों की आबादी लगभग बराबर है। ये मुसलमान पश्चिमी चीन के शिनजियांग प्रांत में रहते हैं। यहां धार्मिक अतिवाद को रोकने के नाम पर चीनी सरकार पहले से ही सैकड़ों की संख्या में डिटेंशन कैंप्स को चला रही है।

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द सन की रिपोर्ट के अनुसार, शिनजियांग में उइगुर और अन्य समुदायों के लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी बड़े पैमाने पर डिटेंशन सेंटर को चला रही है। इन कैंप्स में चीन राजनीतिक असंतोष को दबाने का काम करता है। इसके अलावा उइगुर मुसलमानों को प्रताड़ित करने का काम भी किया जा रहा है। चीनी सरकार इसे व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र का नाम दे रही है।

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पाकिस्तान समेत मुस्लिम देशों का क्या रूख
उइगुर मुसलमानों पर अत्याचार को लेकर अभी तक किसी भी मुस्लिम देश ने चीन का खुलकर विरोध नहीं किया है। दुनियाभर के मुसलमानों के मसीहा सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के मुंह से उइगुरों को लेकर आज तक एक शब्द नहीं निकला है। ये सभी देश इस मामले में पड़कर चीन की दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते। जबकि, धरती के दूसरे किसी भी हिस्से में मुसलमानों को लेकर इनका रवैया एकदम सख्त रहता है।



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