हाथरस केसः दरवाजे पर मेटल डिटेक्टर, हर सदस्य की सुरक्षा में दो-दो सिपाही.. किले में तब्दील हुआ पीड़िता का गांव

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हाइलाइट्स:

  • हाथरस में पीड़िता के परिवार को जिला प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई
  • पीड़िता के घर के बाहर मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी कैमरे लगे हैं
  • बाहर से आने वाले लोगों को सघन चेकिंग के बाद गांव में जाने दिया जा रहा है
  • भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है, जिनमें महिला पुलिस भी शामिल है

अनुजा जायसवाल, हाथरस
उत्तर प्रदेश के हाथरस में पीड़िता के परिजन की सुरक्षा की मांग लगातार की जा रही थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मांग पर ऐक्शन लेते हुए परिवार के हर सदस्य की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए हैं। इसके तहत पीड़िता के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बाहर से आने वालों को सघन चेकिंग के बाद ही गांव में घुसने की अनुमति मिल रही है। इतना ही नहीं पीड़िता के परिवार से मिलने वालों को मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ रहा है। पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

कोई बाहरी व्यक्ति साजिश के तहत कुछ गड़बड़ी न कर दे इसलिए ये सारे इंतजाम किए गए हैं। घर के हर सदस्य की सुरक्षा में दो-दो सिपाहियों को लगाया गया है। परिवार की महिला सदस्यों के महिला पुलिस को तैनात किया गया है। बताया गया कि महिलाओं के शौचालय जाने के समय भी ये पुलिसकर्मी उनके साथ रहती है। पीड़िता के गांव में बाहरी लोगों के लिए खास नियम हैं। जैसे, वे चारपहिया-दोपहिया वाहन से गांव में दाखिल नहीं हो सकते। पांच से ज्यादा लोगों को एक साथ गांव में घुसने की अनुमति नहीं है।

गांव में क्या हैं हालात?
बुधवार को सुबह 10 बजे का वक्त होगा जब मेरे फटॉग्रफर के साथ मैं गांव तक जाने वाले मुख्य मार्ग पर पहुंची थी लेकिन हमे बैरिकेड पर ही रोक लिया गया था। एक पुलिसकर्मी ने कहा कि आप आज के बाद से गाांव मं दोपहिया वाहन नहीं ले जा सकतीं। कुछ सवाल-जवाब और पहचान पत्रों की जांच के बाद उन्होंने हमें यह सलाह देते हुए जाने दिया कि चलना सेहत के लिए अच्छी बात है। पीड़िता का घर यहां से 2 किमी पर है।

गांव के अंदर एक गहरा सन्नाटा पसरा है। बाहर किसी की बातचीत या बच्चों के शोरगुल की आवाज नहीं है। सिर्फ पुलिसवाले हैं। गांव तकरीबन सीज किया हुआ लगता है। गांव में घुसने के बाद पीड़िता के घर का पता जमीन पर जूतों के निशान को देखते हुए आसानी से पाया जा सकता है। यहां पीड़िता का घर किसी पुलिस चौकी सा दिखता है। गांव में जाने के बाद चार कारों का काफिला वहां से निकला। यह एसआईटी थी, जो परिवार के लोगों से एक अन्य चरण की बातचीत के लिए वहां आई थी।

परिवार की सुरक्षा कड़ी
परिवार की सुरक्षा के लिए वहां काफी इंतजाम किए गए थे। पीड़िता के घर के बाहर मेटल डिटेक्टर लगे हुए थे। यहां दो महिला कॉन्स्टेबल्स तैनात थीं, जो दोबारा पहचान पत्रों की जांच कर रही थीं। वहां प्रवेश करने वाले हर शख्स को अपना नाम, फोन नंबर, अड्रेस और ऑर्गेनाइजेशन का नाम एक रजिस्टर पर लिखना होता है। पीड़िता के घर के आसपास बहुत से पुलिसवाले सादे कपड़ों में तैनात किए गए हैं। परिवार और उनसे मिलने आने वाले लोगों का पल-पल उनकी कड़ी निगरानी में है।

जब हम वहां कुछ दिन पहले गए थे, तब तबेले में चार भैंसें थीं लेकिन इस बार वे गायब थीं। किसी का नहीं पता कि वे कहां गईं। जब हम वहां पहुंचे तो परिवार के लोग नाश्ता कर रहे थे। पीड़िता का भाई वहां मौजूद था, जिसने बिना किसी परेशानी के हमसे बातचीत की। इस दौरान एक बुजुर्ग महिला को शौचालय जाना था। सुरक्षा के लिहाज से एक महिला पुलिसकर्मी उनके साथ गई। पुलिसकर्मियों ने बताया कि घर के हर सदस्य की सुरक्षा में दो-दो सिपाहियों की ड्यूटी है। गांव में एक सीओ, तीन इंस्पेक्टर, दो महिला दरोगा और 21 कॉन्सटेबल तैनात किए गए हैं।

क्या था मामला
बता दें कि बीते 14 सितंबर को हाथरस में एक दलित युवती के साथ गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठे थे। रेप के आरोप पर भी सवाल उठे और पोस्मॉर्टम के बाद पीड़िता के शव को देर रात पुलिस के द्वारा जला दिए जाने को लेकर भी खूब बवाल हुआ। राहुल गांधी समेत तमाम दलों के नेता हाथरस पहुंचकर पीड़िता के परिजन से मुलाकात करने लगे। इसके बाद एसआईटी जांच के बीच ही योगी सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी।

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पीड़िता के गांव की सुरक्षा बढ़ी



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