हाथरस केस पर बोला सुप्रीम कोर्ट- इलाहाबाद हाई कोर्ट करे जांच की निगरानी, कोई समस्या हुई तो हम हैं

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हाइलाइट्स:

  • हाथरस केस की खुद की निगरानी में जांच की मांग पर बोला सुप्रीम कोर्ट- इलाहाबाद हाई कोर्ट को देखने दें
  • हाथरस केस में याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कहीं कोई समस्या हुई तो वह है ही
  • कई ऐक्टिविस्टों, वकीलों ने कोर्ट से हाथरस केस को यूपी से बाहर दिल्ली की किसी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की

नई दिल्ली
हाथरस केस में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट इस मामले की निगरानी करेगा। हाथरस में एक दलित लड़की ने कथित गैंगरेप और हैवानियत के 15 दिनों बाद बाद दिल्ली के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट इस मामले को देखेगा और अगर कहीं कोई समस्या हुई तो हम यहां हैं ही।

सुप्रीम कोर्ट ने एक पीआईएल और ऐक्टिविस्टों और वकीलों की तरफ से दाखिल कई दखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इस दौरान याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उत्तर प्रदेश में फेयर ट्रायल मुमकिन नहीं है क्योंकि जांच में कथित तौर पर लीपापोती की गई है। इन चिंताओं को दूर करते हुए चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे की अगुआई वाली बेंच ने कहा, ‘हाई कोर्ट को इसे देखने देते हैं। कोई समस्या हुई तो हम यहां हैं।’

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सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अलावा हरीश साल्वे, इंदिरा जय सिंह और सिद्धार्थ लूथरा जैसे दिग्गज वकीलों की फौज अलग-अलग पक्षों की तरफ से पेश हुई। इनके अलावा भी कई वकील थे जो बहस करना चाहते थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमें पूरी दुनिया से मदद की जरूरत नहीं है।’

पीड़ित परिवार की तरफ से पेश हुए वकीलों ने केस को उत्तर प्रदेश से दिल्ली में ट्रांसफर करने की मांग की। ऐक्टिविस्ट-लॉयर इंदिरा जयसिंह ने यूपी में निष्पक्ष जांच और ट्रायल नहीं हो पाने की दलील दी। उन्होंने गवाहों की सुरक्षा की भी मांग की।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यूपी सरकार की तरफ से हाल ही में दाखिल किए गए हलफनामे का जिक्र किया जिसमें पीड़ित परिवार और गवाहों को दी गई सुरक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।

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यूपी सरकार पहले ही जांच को सीबीआई के हवाले कर चुकी है। उसने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच पर भी सहमति जताई है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या पीड़ित परिवार ने किसी वकील को चुना है। इस पर मेहता ने कहा कि पीड़ित परिवार ने सूचना दी है कि उन्होंने वकील से बात की है और वह यह भी चाहते हैं कि उनकी तरफ से सरकारी वकील भी इस केस को देखे।

यूपी के डीजीपी की तरफ से पेश हुए सीनियर ऐडवोकेट हरीष साल्वे ने कहा कि बेंच से यह गुजारिश की गई है कि गवाहों की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ को तैनात किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत जिसे भी सुरक्षा देना चाहती है, उसे सुरक्षा दी जा सकती है। साल्वे ने कहा कि इस बात को राज्य पुलिस के ऊपर टिप्पणी की तरह नहीं लिया जाना चाहिए। इस पर मेहता ने कहा, ‘राज्य पूरी तरह निष्पक्ष है।’

सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार की तरफ से ऐडवोकेट सीमा कुशवाहा ने मांग की कि जांच के बाद मुकदमे की कार्यवाही दिल्ली की अदालत में की जाए। उन्होंने कहा कि सीबीआई को कहा जाना चाहिए कि वह अपनी जांच पर स्टेटस रिपोर्ट को सीधे शीर्ष अदालत में दाखिल करे।

आरोपियों में से एक की तरफ से कोर्ट में पेश हुए सीनियर ऐडवोकेट सिद्धार्थ लुथरा ने कहा कि केस के डीटेल मीडिया में हर जगह है। इस पर बेंच ने उनसे कहा कि आप हाई कोर्ट जाइए। इस दौरान इंदिरा जयसिंह ने कहा कि इस स्टेज पर आरोपियों को नहीं सुना जाना चाहिए।

हाथरस में 14 सितंबर को एक 19 साल की दलित लड़की के साथ 4 युवकों ने कथित तौर पर गैंगरेप किया था। 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता ने दम तोड़ दिया। प्रशासन ने 30 सितंबर को पीड़िता के घर के नजदीक ही उसकी रातों-रात अंत्येष्टि कर दी थी। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस ने उन्हें जल्दबाजी में अंतिम संस्कार के लिए मजबूर किया। हालांकि, स्थानीय पुलिस का कहना है कि ‘परिवार की इच्छा के मुताबिक’ ही अंत्येष्टि की गई।



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