AAP विधायक कुलदीप कुमार के खिलाफ FIR, कोरोना संक्रमित होते हुए भी हाथरस में विक्टिम के परिवार से मिलने का आरोप

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हाइलाइट्स:

  • हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिवार से मिलने पहुंचे आम आदमी पार्टी (आप) विधायक कुलदीप कुमार के खिलाफ केस दर्ज
  • कुलदीप कुमार पर आरोप है कि कोरोना संक्रमित होते हुए भी वह पीड़ित परिवार से मिले थे, महामारी ऐक्ट के तहत केस दर्ज
  • विधायक के दो ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे जिसमें उन्होंने खुद बताया है कि वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं

अलीगढ़
हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिवार से मिलने पहुंचे आम आदमी पार्टी (आप) विधायक कुलदीप कुमार के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। कुलदीप कुमार पर आरोप है कि कोरोना संक्रमित होते हुए भी वह परिवार से मिलने पहुंचे। उनके खिलाफ महामारी ऐक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है। दरअसल कुलदीप कुमार ने खुद ही बताया था कि वह कोरोना संक्रमित हैं और इसके बाद वह हाथरस में परिवार से मिलते दिखे थे।

हाथरस एसपी ने बताया, ‘दिल्ली के आप विधायक कुलदीप कुमार के खिलाफ महामारी ऐक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है।’ विधायक के दो ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे जिसमें उन्होंने खुद बताया है कि वह कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इसके बाद उनका दूसरा ट्वीट है जिसमें वो हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से मिलने पहुंचे थे।

29 को हुआ कोरोना

29 सितंबर को रिपोर्ट आई पॉजिटिव
इन दोनों ट्वीट को गौर से देखें तो बड़ी लापरवाही सामने आई है। उनका पहला ट्वीट 29 अक्टूबर की दोपहर दो बजकर 29 मिनट का है। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि उनको हल्का बुखार हुआ जिसके बाद उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया। टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उन्होंने लिखा कि वो घर पर ही आइसोलेट रहेंगे।

4 अक्टूबर को परिवार से मिले

4 अक्टूबर को परिवार से मिले


4 अक्टूबर को परिवार से मिले

इसके बाद दूसरा ट्वीट उनका 4 अक्टूबर का है। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि वो हाथरस गैंगरेप पीड़िता के गांव उनके परिजनों से मिलने गए हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि जब विधायक कोरोना से संक्रमित थे तो फिर वह परिजनों से मिलने क्यों पहुंचे। गाइडलाइन के तहत पॉजिटिव आने के बाद 14 दिन तक क्वारंटीन होना जरूरी है। जब टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आए तभी शख्स घर से निकल सकता है।

महामारी ऐक्ट में क्या है सजा का प्रावधान?
बता दें कि महामारी ऐक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की कैद या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन करने कई वालों पर महामारी ऐक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।

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