Bihar Vidhan Sabha Chunav: Nalanda की 7 सीटें इस बार भी नीतीश की साख का सवाल, उधर श्रवण भी ‘7’ के चक्कर में

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विधानसभा चुनाव ( Bihar Vidhan Sabha Chunav) में नालंदा जिले का नाम थोड़ा खास बन जाता है। सूबे का मुखिया जिस जिले (Nitish Vidhan Sabha Candidate from Nalanda) का हो वो तो वैसे भी हाईप्रोफाइल जिला होता है। पिछले चुनाव में यहां की सात में से 5 सीटों पर नीतीश कुमार (Nitish Kumar News) की JDU के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। जबकि JDU की तब की सहयोगी RJD (Lalu Yadav latest News) को एक सीट मिली थी। बीजेपी (Bjp In Nalanda) को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था।

क्यों है नालंदा अहम
नालंदा में चाहें लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा चुनाव, कहा जाता है कि यहां JDU का उम्मीदवार कोई भी हो लेकिन चुनाव खुद नीतीश ही लड़ते हैें। पिछले चुनाव या उससे पहले 2010 विधानसभा चुनाव की बात करें तो ऐसा ही दिखा भी। सिर्फ नालंदा विधानसभा सीट को ही ले लें तो पिछले 6 चुनावों में अकेले श्रवण कुमार ही यहां से जीत का परचम लहराते चले आ रहे हैं। इसीलिए वो नीतीश सरकार में न सिर्फ कैबिनेट मंत्री हैं बल्कि पार्टी के संसदीय कार्य मंत्री भी हैं।

आइए नालंदा की सभी सातों सीट के समीकरण पर नजर डालते हैं।
हरनौत विधानसभा सीट
मतदाता – 297373
वर्तमान विधायक – हरिनारायण सिंह – ( जदयू ) – कुल मत – 71933
दूसरे नंबर पर -अरुण कुमार – ( लोजपा ) – कुल मत – 57638
तीसरे नंबर पर – धर्मेंद्र कुमार – ( स्वतंत्र ) – कुल मत – 4146
2010 का परिणाम: हरिनारायण सिंह – ( जदयू )
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला होने के कारण मुद्दा कुछ खास नहीं | किसी किसी गांव में सड़कें मुद्दा बनती हैं। कई ऐसे गांव है जहां अब तक सड़कों का निर्माण नहीं हुआ है। तो रोजगार सबसे अहम् मुद्दा रहता है पूरे चुनाव में।
हरनौत विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह से टाल क्षेत्र में आता है और मोकामा के बाद दलहन-तिलहन के लिए यह टाल क्षेत्र मशहूर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर हरनौत से ही शुरू हुआ था। टाल क्षेत्र को मुद्दा बना कर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। यह विधानसभा क्षेत्र पहले चंडी विधानसभा क्षेत्र कहलाता था, लेकिन परिसीमन के बाद हरनौत प्रखंड और चंडी प्रखंड को मिला कर हरनौत विधानसभा क्षेत्र बनाया गया।

नालंदा विधानसभा सीट
नालंदा विधान सभा क्षेत्र में चुनाव के वक्त प्रत्याशियों से आम मतदाताओं की कृषि से संबंधित ज्यादा अपेक्षाएं रहती है। यहां से श्रवण कुमार लगातार 6 बार जीत चुके हैं। हालांकि इस सीट पर RJD वोटरों की तादाद भी ठीक-ठाक है लेकिन6 चुनावों से यह सीट जदयू के खाते में ही जा रही है। ऊपर से श्रवण कुमार का जाति आधारित वोट बैंक यानि कुर्मी वोट बैंक भी उनके साथ जुड़ा रहता है।
नालंदा विधान सभा –
मतदाता – 299597
वर्तमान विधायक – श्रवण कुमार – ( जदयू ) – कुल मत – 72596
दूसरे नंबर पर – कौशलेन्द्र कुमार – ( भाजपा ) – कुल मत – 69600
तीसरे नंबर पर – अरुणेश कुमार यादव ( स्वतंत्र ) – कुल मत – 3558
2010 का परिणाम: श्रवण कुमार – ( जदयू )

बिहारशरीफ विधानसभा सीट
इस सीट पर पिछली बार BJP से डॉक्टर सुनील कुमार ने जीत हासिल की थी। ये भी एक दिलचस्प बात है कि डॉक्टर सुनील इसके पहले 2010 में JDU के टिकट पर विधायक बने थे। लेकिन 2015 में जब नीतीश ने महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा तो वो BJP में शामिल हो गए और जीत भी हासिल की। यूं कहें कि ये सीट बीजेपी की सीट है तो गलत नहीं होगा।
मतदाता – 367511
वर्तमान विधायक – डॉ सुनील कुमार – ( भाजपा ) – मोबाइल नंबर 9431815596 ,कुल मत – 76201
दूसरे नंबर पर – मो असगर शमीम – ( जदयू ) – कुल मत – 73861
तीसरे नंबर पर – आफरीन सुल्ताना ( जाप ) – कुल मत – 12635
2010 का परिणाम: डॉ. सुनील, जेडीयू

राजगीर (SC) सुरक्षित सीट
राजगीर विधानसभा क्षेत्र की सीट पर सात बार भाजपा के प्रत्याशी और वर्तमान में हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य का कब्जा रहा है। लेकिन 2015 में बिहार पुलिस में दारोगा की नौकरी छोड़कर आए JDU के रवि ज्योति ने उन्हें शिकस्त दी थी। 2015 चुनाव में जीत का अंतर करीब 6 हजार वोटों का रहा था।
वर्तमान विधायक – रवि ज्योति कुमार – ( जदयू ) – कुल मत – 62009
दूसरे नंबर पर – सत्यदेव नारायण आर्य – ( भाजपा ) – अभी ये हरियाणा के राज्यपाल पद पर हैं | कुल मत – 56619
तीसरे नंबर पर – अमित कुमार पासवान – ( सीपीआई ) – कुल मत – 4668
2010 का परिणाम: सत्यदेव नारायण आर्य, बीजेपी

हिलसा विधानसभा सीट
मतदाता – 295027
2015 के विजेता- RJD के अत्रिमुनि ऊर्फ शक्ति सिंह यादव- कुल मत – 72347
दूसरे नंबर पर – दीपिका कुमारी – ( लोजपा ) – कुल मत – 46271
तीसरे नंबर पर – श्याम नारायण प्रसाद ( सीपीआई ) – कुल मत – 5415
2010 का परिणाम: उषा सिन्हा, जेडीयू

ये सीट नक्सलवाद से प्रभावित रही है। यहां का पश्चिमी क्षेत्र विकास से वंचित रहा है। 1990 में यहां से CPI ML के केडी यादव चुनाव जीते थे। लेकिन कुछ वक्त बाद ही वो RJD में चले गए। तब से इस विधान सभा पर RJD का कब्जा रहा और पार्टी के बैजू यादव कई बार चुनाव जीते। जेडीयू का भी इस सीट पर दो बार कब्जा रहा है। 2010 में इस विधानसभा क्षेत्र से जदयू के टिकट पर प्रो. उषा सिन्हा चुनाव जीतीं थीं। लेकिन 2015 में NDA ने इस पर LJP से दीपिका कुमारी को उतारा जो RJD उम्मीदवार शक्ति सिंह यादव से करीब 15 हजार वोट से चुनाव हार गईं।

इस्लामपुर विधानसभा सीट
वर्तमान विधायक – चन्द्रसेन प्रसाद – ( जदयू ) – कुल मत – 66587
दूसरे नंबर पर – वीरेंद्र गोप – ( भाजपा ) -कुल मत – 43985
तीसरे नंबर पर – धर्मेंद्र कुमार – ( समाजवादी पार्टी ) – कुल मत – 4898
2010 का परिणाम: राजीव रंजन, जेडीयू

2015 में इस सीट पर JDU ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। हालांकि 2010 में JDU के टिकट से विधायक बने राजीव रंजन ने विद्रोह करते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया था। लेकिन 2015 में JDU ने साबित कर दिया कि चेहरा कोई भी हो जीतेगा तो JDU ही। विकास की बात करें तो इस क्षेत्र में चार पावर सब स्टेशन, 30 बेड का अत्याधुनिक सरकारी अस्पताल एवं 38 करोड़ की लागत से 18 आहर – पइन बने हैं। साथ ही प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के लिए 1500 कमरों, एक एएनएम स्कूल सहित गांवों को जोड़ने वाली दर्जनों सड़कों का निर्माण हो चुका है।

अस्थावां विधानसभा सीट
मतदाता – 282927
वर्तमान विधायक – जितेंद्र कुमार – ( जदयू ) – कुल मत – 58908
दूसरे नंबर पर – छोटेलाल यादव – ( लोजपा ) – कुल मत – 48664
तीसरे नंबर पर – योगेश्वर मांझी ( स्वतंत्र ) – कुल मत – 4259
2010 का परिणाम: जितेंद्र कुमार – ( जदयू )

अस्थावां विधानसभा क्षेत्र से जदयू के प्रत्याशी जितेंद्र कुमार लगातार चार बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं। यहां से उनके पिता अयोध्या प्रसाद भी एक बार विधायक रह चुके हैं। यूं कहें कि जितेंद्र को ये सीट एक तरह से विरासत में मिली है। ये कुर्मी बहुल्य क्षेत्र है और अब तक ज्यादातर इसी जाति से विधायक होते रहे हैं। मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के नाते अस्थावां जदयू का सबसे सुरक्षित सीट माना जाता है। 2010 विधानसभा चुनाव में लोजपा के प्रत्याशी कपिलदेव प्रसाद सिंह को छोड़ सभी की जमानत जब्त हो गयी थी।



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