BJP के कंधे पर रखकर बंदूक क्यों चलाते हैं CM नीतीश, क्या इसी फॉम्युले से उपेंद्र कुशवाहा की मनोकामना होगी पूरी?

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पटना
पिछले दो दशक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) बिहार की राजनीति के पारस पत्थर साबित हुए हैं। 15 साल में 2014 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दें तो हर मौके पर सत्ता उसी खेमे के पास गई है जिसके सेनापति नीतीश कुमार (Nitish kumar) होते हैं। बिहार में सबसे ज्यादा वोट बैंक रखने वाली आरजेडी लंबे समय से सत्ता से बाहर है। नीतीश के संपर्क में आने से ही आरजेडी को भी चंद महीने के लिए सत्ता सुख भागने का मौका मिला था। वहीं पूरे भारतवर्ष में अपनी खास भाषण शैली के दम पर करोड़ों में बीजेपी को वोट दिलाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बिहार में आकर नीतीश के सामने नतमस्तक हैं। बिना नीतीश 2015 के विधानसभा चुनाव में मोदी का करिश्मा चल नहीं पाया था। राजनीति के इस खेल में एक बात गौर करने वाली यह भी है कि सीएम नीतीश अक्सर बीजेपी के कंधे पर रखकर बंदूक चलाते हैं। नीतीश कुमार (Nitish kumar) की इसी शैली को देखकर 2020 के बिहार चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की मनोकामना पूरी होने की संभावना दिख रही है। आइए इन सारी बातों को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।

यूं BJP के कंधे पर रखकर बंदूक चलाते हैं नीतीश
शुक्रवार को पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish kumar) ने कहा कि जीतन राम मांझी एनडीए में वापसी किए हैं। उनके साथ जो बातचीत हुई, उसको लेकर बीजेपी ने ही कहा था हम लोगों को। अब मांझी पूरी तरह से एनडीए का हिस्सा हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि एनडीए में आने के बाद जीतन राम मांझी ने कहा था कि जेडीयू से उनका गठबंधन हुआ है। इस हिसाब से वह एनडीए का हिस्सा हैं। मांझी ने कहा था कि वे नीतीश कुमार (Nitish kumar) को पहले भी अपना नेता मानते रहे हैं, अब फिर से मान रहे हैं।

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इससे पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को जेडीयू से निकाले जाने पर सीएम नीतीश कुमार (Nitish kumar) ने कहा था कि अमित शाह के कहने पर उन्होंने उन्हें अपने साथ लिया था। नीतीश कुमार (Nitish kumar) का यह बयान ऐसे समय में आया था जब प्रशांत किशोर बगावती सुर अपना रहे थे। सीएए, अनुच्छेद 370 सरीखे मुद्दे पर पार्टी लाइन से अलग जाकर बयान देने लगे थे। इसके बाद प्रशांत किशोर को जेडीयू से बाहर कर दिया गया था। जबकि 2015 के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर को ऐसे फ्रेम किया गया था मानो चुनाव जितवाने में उन्होंने ही अहम रोल निभाया हो। नीतीश कुमार (Nitish kumar) के इन दोनों बयानों पर गौर करें तो यही लगता है कि बीजेपी के कंधे पर बंदूक रखकर चलाना उनकी शगल है।

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नीतीश की यही तरकीब कुशवाहा के लिए जगा रही उम्मीद
शुक्रवार को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब नीतीश कुमार (Nitish kumar) से पूछा गया कि उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) एनडीए में आ रहे हैं? इसपर उन्होंने कहा कि मुझे जानकारी नहीं है। हां, जीतन राम मांझी महागठबंधन से अलग होकर एनडीए का हिस्सा बने हैं। नीतीश के इस बयान के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) को एनडीए में एंट्री नहीं मिलेगी। वहीं मांझी के एनडीए में आने के मामले में बीजेपी का नाम लेना उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) के लिए उम्मीद की किरण बनाए हुए है। कहते हैं राजनीति संभावनाओं का खेल है। ऐसे में एक-दो दिनों के भीतर अगर उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) अगर एनडीए में आते हैं तो नीतीश कुमार (Nitish kumar) यह कहकर अपनी गर्दन बचाते दिख सकते हैं कि यह बीजेपी का फैसला है। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि बीजेपी के प्रवक्ता लगातार कह रहे हैं कि अगर उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा।



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