Corona: बदतर स्वास्थ्य ढांचा, टेस्टिंग ज्यादा.. महाराष्ट्र में कोरोना के बेकाबू मामलों की क्या है वजह?

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मुंबई
महाराष्ट्र में कोरोना का पहला मामला सामने आने के बाद से प्रदेश की स्थिति लगातार बदतर होती गई है। कोविड-19 के मरीजों के मामले में लगातार पहले नंबर पर रहने वाले महाराष्ट्र ने भारतीय प्रदेशों को ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। फिलहाल, प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या 11 लाख के पार हो चुकी है। वायरस के संक्रमण के मामले में आंध्र प्रदेश दूसरे नंबर है लेकिन यहां भी मरीजों की संख्या महाराष्ट्र में संक्रमितों की संख्या का आधा ही है।

बताया गया कि शुक्रवार सुबह तक महाराष्ट्र में कोरोना से 31 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में मरीजों की बढ़ती संख्या काबू में नहीं है। महाराष्ट्र में कोरोना मामलों के इस विस्फोट की तमाम एक्सपर्ट्स अलग-अलग वजह बताते हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि महाराष्ट्र रोजगार का पॉवरहाउस है। यहां प्रवासी लोगों की भारी भीड़ ने कोरोना वायरस के संक्रमण की संख्या को बढ़ने में काफी मदद की है। वहीं, हेल्थ इकनॉमिस्ट रवि दुग्गल ने बताया कि मुंबई का फाइनेंसियल सेक्टर कभी बंद नहीं हुआ। जब पूरे देश में लॉकडाउन लागू था, तब भी लोगों की बैंकों या वित्तीय संस्थाओं में आवाजाही बंद नहीं हुई थी। इस वजह से भी संक्रमण को फैलने में मदद मिली।

एक अन्य हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. अनंत भान ने बताया कि अमेरिका में भी न्यू यॉर्क सिटी में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले सामने आए। वैसे ही भारत में मुंबई है। उन्होंने बताया कि प्रवासियों का अपने कार्यस्थलों पर लौटना चिंता की नई वजह बनकर सामने आया है। ठाणे स्टेशन पर पहुंचने वाले हर 10 में से एक शख्स में कोरोना का संक्रमण मिल रहा है।

स्वास्थ्य सुविधाएं खस्ताहाल
यूपी के बाद महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कोरोना के टेस्ट हुए हैं। हालांकि, जनसंख्या घनत्व के लिहाज से यह भी काफी कम है। वहीं राज्य में स्वास्थ्य विभाग की हालत भी पहले से ही खराब है। महाराष्ट्र अपने हेल्थ इन्फ्रस्ट्रक्चर पर सबसे कम खर्च करने वाला राज्य है। इसके अलावा यहां मेडिकल सेक्टर में भारी रिक्तियां मौजूद हैं। इन सब कारणों की वजह से महाराष्ट्र में कोरोना के मामले बेकाबू होते गए हैं। प्रदेश की राजधानी मुंबई में मरीजों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

बीते एक महीने में राजधानी में ऐक्टिव मरीजों की संख्या में करीब 92% की वृद्धि हुई है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को मुंबई में कोरोना के 17 हजार 697 ऐक्टिव मरीज थे। 18 सितंबर को यह संख्या बढ़कर 34 हजार 136 तक पहुंच गई। 1 सितंबर को यहां कुल 20 हजार 062 ऐक्टिव मरीजों का उपचार अस्पताल में चल रहा था। बीते 18 दिनों में 14 हजार 074 ऐक्टिव मरीज बढ़े हैं। 1 से 18 सितंबर के बीच कोरोना के 33 हजार 235 नए मामले दर्ज हुए हैं।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मौतें

गणेशोत्सव की वजह से बढ़े मामले?
बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त सुरेश काकानी ने इसे लेकर कहा कि गणेशोत्सव और लॉकडाउन में मिली छूट की वजह से बीते कुछ समय में नए मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। चेस द वायरस मुहिम के तहत रोजाना होने वाले कोरोना टेस्ट में भी वृद्धि की गई है। नतीजतन, रोजाना दर्ज होने वाले मामले बढ़ रहे हैं। पीड़ितों की संख्या को देखते हुए मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक सुविधाओं को भी बढ़ाया गया है। ऐक्टिव मरीजों के साथ ही रोग मुक्त होने वाले मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि मुंबई में रोग पूरी तरह से नियंत्रित है, कुछ दिनों पहले हम जब करीब 5000 टेस्ट करते थे, तब 1000 से 1200 नए मरीज मिलते थे, अब हम रोजाना करीब 15000 से अधिक टेस्ट कर रहे हैं और करीब 2000 से 2200 नए मरीज मिल रहे हैं।

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