Corona Second Wave in Kerala : केरल में कोरोना की दूसरी लहर, राज्यपाल ने कहा- म्यूटेशन हो सकती है वजह, जानें पूरी बात

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यहां रोजाना नए केसों के साप्ताहिक औसत में क्रमशः 19%, 31.5%, 8.7% और 5.1% की दर से वृद्धि हुई है। अन्य तीन राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल हैं- लद्दाख, मेघालय और नागालैंड। इनमें रोजाना नए केसों का साप्ताहिक औसत क्रमशः 89%, 61.9% और 19.3% की दर से बढ़ा है। केरल के तीन जिलों में इस महीने के पहले 11 दिनों में कोरोना केस करीब 60% बढ़ गए हैं। इस महीने कोझीकोड में 62.2%, त्रिसूर में 61.9%, कोल्लम में 57.9% केस बढ़ गए।

केरल में 233% बढ़े ऐक्टिव केस

भारत में कोरोना पर पिछले चार हफ्तों से खुशखबरी मिल रही है। इस दौरान कोविड-19 महामारी से पीड़ितों की संख्या में 11% की कमी आई है। लेकिन कभी कोरोना पर काबू पाने का मॉडल स्टेट बने केरल में इन्हीं चार हफ्तों में कोरोना के ऐक्टिव केस 233% बढ़ गए। ऐसे में कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस का प्रकोप जब तक पूरी तरह खत्म नहीं हो जाए, यह कभी भी विकराल रूप धारण कर सकता है।

राज्यपाल ने कहा- म्यूटेशन हो सकती है वजह

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी राज्य में कोरोना की नई लहर पर चिंता व्यक्त करते हुए आशंका जताई कि इसकी वजह शायद वायरस का म्यूटेशन हो सकता है। उन्होंने हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘कई कारण हो सकते हैं। जैसा कि आपको पता है, केरल के लोग बड़ी संख्या दूसरे राज्यों और विदेशों में काम करते हैं। राज्य में वायरस से संक्रमितों में उन लोगों की बड़ी संख्या है जो बाहर से आए हैं। हमारे स्वास्थ्यकर्मियों की तरफ से सक्रिय पहल के बाद भी कुछ इलाकों में वायरस का कम्यूनिटी स्प्रेड हो रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने देखा है कि ज्यादातर म्यूटेशन के कारण दक्षिण के राज्यों में वायरस काफी खतरनाक हो गया है। हालांकि, हमें यह ध्यान देना होना होगा कि हम पूरी तरह सावधानी बरतते हुए बड़े पैमाने पर टेस्टिंग कर सकते हैं।’

​आखिर म्यूटेशन क्या है?

म्यूटेशन का सीधा-सीधा अर्थ लें तो इसे रूप बदलना कहते हैं। कोरोना वायरस अगर म्यूटेशन कर रहा है तो इसका मतलब है कि वो अलग-अलग तरह की अपनी कॉपी बना रहा है और हर कॉपी नेचर में थोड़ा-थोड़ा अलग है। दरअसल, कोरोना वायरस से संक्रमित कोशिका लाखों में वायरस छोड़ती है जो मूल जीनोम की कॉपी होते हैं। जब कोशिका इस जीनोम की कॉपी बनाती है तो वह कभी-कभी गलती कर देती है। यानी केवल एक क्रम गड़बड़ा जाता है। इस गलती को म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन कहा जाता है। चूंकि कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है तो म्यूटेशन का दौर चलता रहता है।

​अब तक 12 हजार से ज्यादा म्यूटेशन

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अब तक कोरोना के 12 हजार से ज्यादा म्यूटेशन सामने आ चुके हैं। इनमें एक म्यूटेशन D614G पूरी दुनिया में पाया जा रहा है। यह पहले चीन और जर्मनी में पाया गया था लेकिन जब यूरोप के कुछ मरीजों और फिर अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया तथा भारत के मरीजों में इसकी पहचान की गई तो यह चर्चा में आ गया। इस म्यूटेशन में ग्लाइसिन (G) अमीनो एसिड के 614वें पॉजिशन पर ऐस्पेरेटिक एसिड (D) का स्थान ले लेता है। इसलिए इस म्यूटेशन को D614G नाम दिया गया। 1 मार्च से पहले जब दुनिया में कोरोना के 997 म्यूटेशन पाए गए थे तब D614G की हिस्सेदारी 10% थी। अब जब दुनियाभर में 12,194 म्यूटेशन पाए जा चुके हैं तो उनमें 78% कोरोना का D614G म्यूटेशन व्याप्त है।

​म्यूटेशन करने के तरीके?

जब कोई वायरस म्यूटेशन करता है तो अक्सर प्रोटीन में बदलाव हुए बिना ही उसका जीन बदल जाता है। प्रोटीन अमीनो अम्ल की एक लंबी श्रृखला होती है जो विभिन्न तरह के कुंडलित आकार में रहती है। हर अमीनो अम्ल में तीन तरह का जेनेटिक वर्ण होता है लेकिन कई मामलों में इस तिकड़ी का तीसरा वर्ण समान अमीनो अम्ल एनकोड करता है। इस तरह के साइलेंट म्यूटेशन से प्रोटीन में कोई बदलाव नहीं होता है।

दूसरी ओर नॉन-साइलेंट म्यूटेशन प्रोटीन के सीक्वेंस बदल देता है। कोरोना वायरस के ग्वांगझू नमूने में दो नॉन-साइलेंट म्यूटेशन के साक्ष्य मिले। लेकिन प्रोटीन सैकड़ों या हजारों अमीनो अम्ल से बने हो सकते हैं। एक अमीनो अम्ल के बदलने से उनके आकार या काम करने के तरीके में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं होता है।

​हर म्यूटेशन घातक नहीं

किसी वायरस में म्यूटेशन होने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि वह और अधिक जानलेवा होता जा रहा है। इसलिए इसके म्यूटेशन से डरने की जरूरत नहीं होती है। इस म्यूटेशन के कारण सबसे अधिक दिक्कत इस तरह के वायरस के लिए टीका तैयार करने के दौरान होती है क्योंकि हर जगह की जलवायु अलग तरह की होती है। ऐसे में दुनियाभर के लिए एक ऐसी वैक्सीन तैयार करना, जो हर जगह कारगर हो, यह अपने आपमें एक बड़ी चुनौती है।

​इन परिस्थितियों पर निर्भर करता है म्यूटेशन

भौगोलिक क्षेत्र, जलवायु आदि में परिवर्तन के साथ ही कोरोना वायरस में भी लगातार म्यूटेशन (बदलाव) होते रहे। किसी भी ऑर्गेनिजम में म्यूटेशन होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे कोई भी ऑर्गेनिजम खुद ना तो शुरू कर सकता है और ना ही रोक सकता है। यदि वायरस में होनेवाले ये बदलाव उसकी लाइफ के लिए सकारात्मक होते हैं तो उस वायरस की वह स्ट्रेन जीवित रहती है और आगे बढ़ती रहती है। यानी अधिक से अधिक संक्रमण फैलाती है। जबकि अगर म्यूटेशन के बाद बनी स्ट्रेन माहौल के हिसाब से सर्वाइव ना कर पाए तो वह कुछ ही समय में खत्म हो जाती है।

पढ़ें: देश में घट रहे कोरोना के ऐक्टिव से लेकिन केरल में 233% की वृद्धि



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