Corona Vaccine Updates: कोरोना वैक्सीन पर उन पांच सवालों के जवाब जो हर किसी के मन में हैं

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कोविड-19 को लेकर वैक्सीन की तैयारियों के बीच इसकी कीमत को लेकर भी चर्चा हो रही है। Moderna Inc की वैक्सीन की कीमत सबसे ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जबकि फाइजर की कीमत 30 डॉलर के आसपास हो सकती है। वहीं, भारत में बन रहे कोविशील्ड वैक्सीन की बाजार में कीमत 600 रुपये तक हो सकती है। केंद्र सरकार ने भी लोगों को वैक्सीन देने की तैयारियां तेज कर दी है। हालांकि सरकार ने बताया है कि कोरोना वैक्सीन सबको नहीं दी जाएगी।

कोरोना वैक्सीन की कीमत जानिए

अमेरिकी कंपनी फाइजर ने जर्मनी की बायोएनटेक के साथ मिलकर कोरोना की वैक्‍सीन तैयार की है। यह फेज 3 ट्रायल में 95% तक असरदार रही। ट्रायल के नतीजों के आधार पर यह अबतक की सबसे असरदार वैक्‍सीन है। हालांकि फाइजर की वैक्‍सीन को शून्‍य से भी कम तापमान (-70 डिग्री सेल्सियस) पर स्‍टोर करना पड़ता है जो इसकी सबसे बड़ी खामी है। वैक्‍सीन की कीमत भी अच्‍छी-खासी होगी। कंपनी ने अमेरिकी सरकार के साथ 19.50 डॉलर में एक डोज के हिसाब से डील की है, ऐसे में खुले बाजार में वैक्‍सीन की कीमत इससे दोगुनी तक हो सकती है। अमेरिकी फार्मा कंपनी Moderna Inc ने बताया है कि उसकी कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए सरकारों को एक खुराक की कीमत 25 (1,854) से 37 (2,744) डॉलर देनी होगी। भारत में बन रही कोविशील्ड सरकार को कम कीमत (3 से 4 डॉलर यानी 225-300 रुपये) में मिलेगी क्‍योंकि वह बहुत ज्‍यादा मात्रा में डोज खरीदेगी। लेकिन आम जनता को वैक्‍सीन के लिए 500 से 600 रुपये चुकाने होंगे।

कोरोना वैक्सीन के क्या-क्या साइड इफेक्ट?

आमतौर पर वैक्‍सीन तैयार होने में सालों लगते हैं मगर कोरोना के केस में महज कुछ महीनों में वैक्‍सीन तैयार की गई है। इस जल्‍दबाजी में भी सुरक्षा संबंधी पहलुओं का ध्‍यान रखा गया है लेकिन हर एक पर वैक्‍सीन का कैसा असर होगा, यह परखने में काफी वक्‍त लगता है। कई लोगों को वैक्‍सीन से एलर्जी हो सकती है और डोज मिलने के बाद अजीब साइड इफेक्‍ट्स भी सामने आ सकते हैं। इससे डबल डोज वाली वैक्‍सीन की दूसरी डोज लेने से लोग डर सकते हैं। अधिकतर कोविड वैक्‍सीन डबल डोज वाली ही हैं। अभी तक हुए ट्रायल में हल्‍के साइड इफेक्‍ट्स ही सामने आए हैं। हालांकि साइड इफेक्‍ट्स आम बात हैं जब तक वे जानलेवा न हों। साइंटिस्‍ट्स के मुताबिक, कुछ साइड इफेक्‍ट्स हैं जो वैक्‍सीन लगाने के बाद देखने को मिल सकते हैं। आइए उनके बारे में जानते हैं।

किसे लगेगी वैक्सीन, सरकार ने किया साफ

सरकार ने मंगलवार को साफ किया कि उसने कभी नहीं कहा है कि पूरी जनसंख्या को टीका लगाया जाएगा। सिर्फ उतनी ही आबादी का टीकाकरण किया जाएगा, जिससे कोरोना संक्रमण की कड़ी टूट जाए। सरकार ने ऑक्सफर्ड वैक्सीन के ट्रायल को भी जारी रखने की बात कही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने कहा, ‘मैं यह साफ करना चाहता हूं कि सरकार ने कभी नहीं कहा है कि पूरे देश का टीकाकरण किया जाएगा। टीकाकरण वैक्सीन की प्रभावोत्पादकता पर निर्भर करेगा। हमारा उद्देश्य कोविड-19 संक्रमण की कड़ी को तोड़ना है। अगर हम जोखिम वाले लोगों को वैक्सीन देने में सफल होते हैं और संक्रमण की कड़ी को तोड़ने में सफल होते हैं तो पूरी आबादी के टीकाकरण की जरूरत ही नहीं होगी।’

कब तक आ जाएगी कोरोना वैक्सीन?

आमतौर पर वैक्‍सीन तैयार होने में सालों लगते हैं मगर कोरोना के केस में महज कुछ महीनों में वैक्‍सीन तैयार की गई है। फाइजर कंपनी कोरोना वैक्सीन के लिए अमेरिकी नियामक से जल्दी की अनुमति लेने के लिए अप्लाई करने वाली है। Moderna Inc की वैक्सीन भी जल्दी ही अमेरिका में लगने लगेगी। इस बीच कोविशील्ड वैक्सीन अगले साल के शुरुआती महीने में आ सकती है। ऑक्सफर्ड वैक्सीन भी ट्रायल के अंतिम चरण में है और इसके भी जल्दी ही बाजार में आने की उम्मीद है।

वैक्सीन लगाने को भारत की बड़ी तैयारी

कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए वैक्सीन आने की संभावना प्रबल होते ही देश में टीकाकरण अभियान चलाने की तैयारी जोर पकड़ रही है। सरकार टीका देनेवाले कर्मचारियों (Vaccinators) की लिस्ट बना रही है जो अगले वर्ष 2021 के शुरुआती महीनों में 30 करोड़ देशवासियों को टीका लगाएंगे। अभी सार्वजनिक क्षेत्र में 70 हजार टीकाकर्मी हैं और निजी क्षेत्र के 30 हजार टीकाकर्मियों को भी अभियान में शामिल किए जाने की संभावना टटोली जा रही है। इनमें डॉक्टर, नर्स और लैब टेक्नीशियन शामिल हैं जो सार्स-कोव2 के खिलाफ बन रही वैक्सीन को रेग्युलेटरों की स्वीकृति मिलते ही इसे लोगों को लगाना शुरू कर देंगे।



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