eknath khadse news: क्यों हुई फडणवीस और खडसे के बीच में दुश्मनी, जानिए इस अदावत की पूरी कहानी

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हाइलाइट्स:

  • बीजेपी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे ने बीजेपी को अलविदा कहा
  • शुक्रवार को जॉइन करेंगे एनसीपी,शरद पवार की मौजूदगी में होगी खडसे की पार्टी में एंट्री
  • उत्तर महाराष्ट्र में खडसे सबसे बड़े नेता हैं, आसपास के जिलों में उनका खासा प्रभाव है
  • खडसे के जाने से उत्तर महाराष्ट्र में बीजेपी कमजोर पड़ सकती है
  • काफी दिनों से खडसे पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज थे

मुंबई
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे (Eknath khadse) ने भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। खडसे शुक्रवार को एनसीपी ज्वाइन करेंगें। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि एकनाथ खडसे को इस्तीफा देना पड़ा। इसके अलावा ऐसा क्या हुआ कि देवेंद्र फडणवीस (ex cm devendra fadanvis) और एकनाथ खडसे के बीच दोस्ती की जगह दुश्मनी पनपने लगी। आज इसी बात से आपको रूबरू करवाएंगे।

खडसे फडणवीस अदावत की शुरुआत 2014 में हुई
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे के बीच अदावत यानी दुश्मनी की शुरुआत साल 2014 के विधानसभा चुनावों से हुई। जब साल 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी भारी बहुमत के साथ महाराष्ट्र में चुनकर आई। पद और तजुर्बे के हिसाब से सबसे वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे थे। ऐसे में उन्होंने महाराष्ट्र में उनके समाज से मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा और खुद के लिए दबाव बनाना शुरू किया। इसके पीछे खडसे के अपने तर्क भी थे। उनका कहना था कि वह महाराष्ट्र इकाई में वरिष्ठ नेता हैं और उनके पास अच्छा खासा अनुभव भी है। इसके अलावा वह पार्टी के साथ तब से जुड़े हैं जब पार्टी को कोई जानता भी नहीं था। उत्तर महाराष्ट्र में पार्टी को घर घर पहुंचाने का श्रेय एकनाथ खडसे को जाता है।

आलाकमान ने फडणवीस को चुना

महाराष्ट्र में जब एकनाथ खडसे और देवेंद्र फडणवीस के नाम पर कोई सहमति नहीं बन पाई। तब यह मामला भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान तक पहुंचा लेकिन वहां से भी एकनाथ खडसे को बैरंग लौटना पड़ा। आलाकमान ने देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुख्यमंत्री पद के लिए मोहर लगा दी थी। खडसे को नंबर दो की कुर्सी से संतोष करना पड़ा। यहीं से शुरू हुआ एकनाथ खडसे और फडणवीस के बीच अदावत का दौर।

भ्रष्टाचार के आरोप पर मंत्री पद छोड़ना पड़ा
महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना समेत मित्र पक्ष की सरकार तो बन चुकी थी लेकिन एकनाथ खडसे और देवेंद्र फडणवीस के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। आए दिन अंदर खाने से टकराव की खबरें बाहर आती थी। इसी बीच साल 2016 में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद खडसे को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। इस आरोप की पूरी छानबीन और जांच के बाद में खडसे को अदालत की तरफ से क्लीन चिट भी मिल गई। लेकिन पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से क्लीन चिट का इंतजार वो आज तक करते रहे। इस बात को लेकर के भी खडसे अपनी नाराजगी पार्टी और जनता के सामने कई बार जता चुके हैं।

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टिकट कटने से नाराज खडसे
इतना सब कुछ होने के बाद भी खडसे बीजेपी में वापसी की उम्मीदों के साथ डटे हुए थे। लेकिन उनकी उम्मीदों को तब झटका लगा जब साल 2019 के चुनावों में बीजेपी ने देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में एकनाथ खडसे का टिकट काट दिया और उनकी जगह उनकी बेटी को उम्मीदवार बनाया गया। लेकिन इस चुनाव में उनकी बेटी को हार मिली। यहां भी एकनाथ खडसे ने बीजेपी आलाकमान से यह शिकायत की कि जानबूझकर उनकी बेटी को हराया गया है। उन्होंने कहा कि आलाकमान को इस बात के प्रमाण भी उन्होंने उपलब्ध करवाए थे।

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फडणवीस से खडसे की खुलेआम नाराजगी
इस घटना के बाद एकनाथ खडसे ने बीते एक साल में कई मंचों से देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ वक्तव्य किए हैं। जहां उन्होंने कहा है कि उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। जब एकनाथ खडसे चारों तरफ से निराश हो गए तब उन्होंने पार्टी बदलने का फैसला किया और आखिरकार अब वह एनसीपी में शामिल होने जा रहे हैं।



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