Exclusive: अपनी बायॉपिक में काजोल-आलिया को देखना चाहती हैं अर्चना पूरन स‍िंंह, रणबीर बनें परमीत

Spread the love


बॉलिवुड और टीवी की बेहतरीन ऐक्ट्रेस अर्चना पूरन सिंह ने नवभारतटाइम्स डॉट कॉम से हुई एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि अब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में लगभग 4 दशक पूरे कर लिए हैं और उन्हें लगता है कि उनकी जिंदगी पर एक नहीं कई फिल्में बनाई जा सकती हैं। अर्चना की मानें तो बायॉपिक में उनकी यंग ऐज का रोल आलिया भट्ट और मिडिल ऐज के रोल में काजोल पर्फेक्ट होंगी। बायॉपिक में हज्बंड परमीत के रोल में रणबीर कपूर सबसे फिट बैठेंगे।

अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह इन दिनों ‘द कपिल शर्मा शो’ में जज की कुर्सी पर नजर आती हैं। सोशल मीडिया में उनके बनाए वीडियो खूब सुर्ख़ियों में होते हैं। नवभारतटाइम्स डॉट कॉम से बातचीत के दौरान अर्चना ने अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव पर बात की तो बायॉपिक का टॉपिक सामने आ गया। जब हमने अर्चना से सवाल किया कि क्या वह चाहती हैं कि उनकी लाइफ पर बायॉपिक बनें तो अर्चना ने इस सवाल का जवाब बेहद दिलचस्प अंदाज में दिया।

मेरी जिंदगी में तो एक से ज्यादा फिल्म बनाई जा सकती है
अर्चना बताती हैं, ‘मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी में तो एक से ज्यादा फिल्म बनाई जा सकती है, मतलब मेरी बायॉपिक कई पार्ट में बन सकती है। बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव रहे हैं मेरी लाइफ में। बहुत दुःख देखा है मैंने और वह दुःख देखने की वजह से ही शायद आज असल में दिल से खुश हो पाती हूं। आज जिस खुशी का अनुभव कर खुश हो पाती, क्योंकि दुःख क्या होता है वह बहुत अच्छे से समझा और उस दुःख में जीवन का समय व्यतीत किया है।’

अंधकार के बाद जब रौशनी दिखाई पड़ती है
‘हर इंसान की जिंदगी में उतार-चढ़ाव होते हैं, अपने संघर्ष के कठिन समय से जो सफलता पूर्वक पार हो जाता है, उसकी जिंदगी की एक प्रेरणा देने वाली कहानी होती है। मैं अभी भी सीख रही हूं क्योंकि बिना दुःख झेले, बिना बुरा समय देखे कोई खुद को समझ नहीं पाता। एक अंधकार के बाद जब रौशनी दिखाई पड़ती है तो बहुत कुछ सीख भी जाता है इंसान।’

रिजेक्शन, दुःख, मायूसी और बुरे समय से भरी रही मेरी जिंदगी
‘मैंने बहुत कुछ देखा है, मायूसी, रिजेक्शन, दुःख, बुरा समय, जिंदगी में पूरी तरह की ना उम्मीदी और भी बहुत कुछ देखा-समझा और अनुभव किया है। बिना इन चीजों के कैसे आप खुद को मैच्योर कह सकते हैं। अगर आपने इन सब चीजों का अनुभव नहीं किया तो आपके अंदर एक खोखलापन रह ही जाता है। आपके अंदर एक शैलोनेस रहेगा ही क्योंकि आपने जिंदगी का तजुर्बा पूरा किया ही नहीं।’

जब तक ऊपर वाले के डंडें नहीं पड़ते, परफोर्मेंस में दम नहीं दिखाई देता
‘एक ऐक्टर के तौर पर जब भी किसी को बहुत बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हुए देखती हूं तो उनकी कलाकारी देखकर समझ जाती हूं कि उसने बहुत दुःख देखा होगा, तभी तो इस तरह डूब कर परफॉर्म कर रहा है। जब तक पीठ, छाती और सर पर उपरवाले के डंडे न पड़े हों, चीखें न निकली हों, तब तक इतनी अच्छी परफॉर्मेंस नहीं निकलती है।’

काजोल और आलिया भट्ट निभाएं बायॉपिक में मेरा रोल
‘अगर मेरी बायॉपिक बनें तो मैं चाहूंगी कि ऐक्ट्रेस काजोल मेरा वह रोल निभाएं, मेरी जिस उम्र में वह फिट होती हैं, उस उम्र से लेकर अब तक का किरदार काजोल को निभाना चाहिए। अब जब मैं फिल्म इंडस्ट्री में आई थी तब 18 साल की थी, तो वह पार्ट आज के जमाने की सुपर स्टार ऐक्ट्रेस आलिया भट्ट को निभाना चाहिए।’

आलिया से पूछना चाहती हूं – कहां से लाती तो इतना डेप्थ
‘आलिया मेरी यंग ऐज को परदे पर निभाने के लिए सबसे फैंटास्टिक होंगी। आलिया की ऐक्टिंग में बहुत डेप्थ है, आलिया को देखकर लगता है कि हम जब उस उम्र में थे, हमारे में इतनी गंभीरता और डेप्थ नहीं थी। मैं आलिया से यह पूछना भी चाहती हूं कि तुमने अपनी लाइफ में ऐसा क्या देखा-अनुभव किया, जिसकी वजह से तुम्हारे अंदर इतनी गहराई है, वह भी इतनी युवा होने के बाद। अगर आलिया मेरी बायॉपिक में मेरा किरदार निभाती हैं तो यह मेरे सम्मान की बात होगी।’

दुनिया जीतने का फायर था मुझमें
‘मेरी बायॉपिक में मेरी पूरी जर्नी दिखाना ही दिलचस्प होगा। मैं एक लॉयर की बेटी, उस जमाने में कॉन्वेंट एजुकेटिड। मुंबई एक सूटकेस लेकर आई थी, वह भी बिल्कुल अकेले शहर में कदम रखा। कोई गॉड-फादर या पहचान का नहीं था। अब सोचती हूं तो लगता है, कैसे कर लिया यह सब, उस वक्त आगे बढ़ने की इतनी लगन और फायर था कि लगता था कि मैं तो दुनिया जीत लूंगी।’

फिल्म इंडस्ट्री में मेरी तरह 40 साल टिकना आसान नहीं है
‘आज के यूथ से जब बातचीत करती हूं तो लोग मुझे कहते हैं वह क्या-क्या करना चाहते हैं। मुझे लगता है, मेरी लाइफ की प्रेरणा देने वाली कहानी को परदे पर दिखाना चाहिए, जो आज के बच्चों को प्रभावित करे। अपने बलबूते पर इस फिल्म इंडस्ट्री में 40 साल टिके रहना, वह भी इस तरह आसान नहीं रहा है। कैसे-कैसे आगे बढ़ी। कुछ गलत-कुछ सही डिसीजन लिए, शायद आज जो नेम-फेम है मेरे पास उन्हीं डिसीजन्स की वजह से है।’

हिरोइन बन गई होती तो इतने दिन इस तरह ऐक्टिव करियर नहीं होता
‘अगर मैं सिर्फ हिरोइन बन गई होती तो इतने दिन इस तरह ऐक्टिव करियर नहीं होता। मेरी बायॉपिक में मुंबई आने से लेकर मुंबई के मड-आइलैंड में अपने बंगलो में 2 यंग बच्चों, मॉम, 2 डॉग और हज्बंड के साथ सेटल होने तक की कहानी को शामिल करना चाहिए। यह 40 साल की जर्नी से बहुत से लोग इंस्पायर्ड हो सकते हैं और मोटिवेट हो सकते हैं। मुझे लगता है यह एक फिल्म के लिए बहुत ही इंट्रेस्टिंग कहानी हैं, जिसमें स्ट्रगल, प्रेरणा, दुःख, दर्द, रिजेक्शन और भरपूर रोमांस भी है।’

रणबीर कपूर हज्बंड परमीत के रोल में परफेक्ट
‘अब मेरी बायोपिक बनेंगी तो हज्बंड परमीत सेठी का बेहद महत्वपूर्ण रोल होगा और यह रोल आलिया के साथ निभा सकते हैं रणबीर कपूर। इससे अच्छी पेयरिंग क्या हो सकती है। पंजाबी मुंडा रणबीर कपूर प्ले कर सकते हैं परमीत का रोल।’



Source link

Previous Article
Next Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *