Exclusive: विक्रम भट्ट बोले – बकवास है नेपोटिजम की बहस, आलिया – रणबीर को दर्शकों ने स्टार बनाया

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जाने-माने निर्देशकविक्रम भट्ट ( Vikram Bhatt ) पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में हैं, इसकी वजह है उनके तीखे बयान। नवभारतटाइम्स डॉट कॉम के फेसबुक पर लाइव चैट ( Facebook Live ) के दौरान विक्रम ने सबसे पहले कंगना रनौत ( Kangana Ranaut ) पर हमला बोलते हुए कहा कि कंगना के साथ काम करने का मतलब है, आप उनकी फिल्म में सिर्फ क्लैपर बॉय बनकर रह जाएंगे। विक्रम भट्ट का एक बड़ा बयान फिल्मी पार्टियों में परोसे जाने वाले ड्रग्स ( Drugs ) को लेकर था। अब विक्रम ने बॉलिवुड में नेपोटिजम ( Nepotism ) को समझाते हुए कई अन्य मुद्दों को उठाया है।

अब विक्रम ने नेपोटिजम क्या है, कैसे काम करता है और बॉलिवुड में ही नेपोटिजम की इतनी चर्चा क्यों होती है, इस बात को समझाते हुए फिर से एक तड़कता-भड़कता बयान दिया है। विक्रम नेपोटिजम को समझाते हुए कहते हैं, अगर कोई पिता अपने बेटे को स्टार बना देता तो सनी देओल के बेटे करण देओल की पहली फिल्म ‘पल पल दिल के पास’ फ्लॉप नहीं होती। फिल्म फ्लॉप हुई तो क्या कर लिया सनी देओल ने। पढ़िए विक्रम भट्ट का यह पूरा इंटरव्यू।

फिल्म इंडस्ट्री को हमेशा टार्गेट किया जाता है
बीते कई सालों से फिल्म इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद की ‘मैं आपको कायदे की बात बताता हूं। सबसे पहले तो यह समझना होगा कि हमारी यह जो फिल्म इंडस्ट्री है, वह हमेशा लोगों के टार्गेट में रहती है। कोई भी मुद्दा उठाना हो, अगर फिल्म इंडस्ट्री के माध्यम से उठाते हैं तो बड़ा आसान हो जाता है। क्या है कि हम फिल्म वाले तो हैं भांड-बिरासी, कल हम हों-न हों किसी को क्या फर्क पड़ता है।’

पकिस्तान-बॉर्डर पर झगड़ा होता है तो आर्टिस्ट को रोक देते हैं
‘ऐसे में हम पहले से ही सबके टार्गेट हो गए हैं। अब मान लीजिए पाकिस्तान से झगड़ा है या बॉर्डर पर कोई बात हो गई तो आप हमारे आर्टिस्ट को रोक देते हैं, क्योंकि आर्टिस्ट को रोकने से सबसे ज्यादा आवाज होती है।’

स्मोकिंग की बात पर फिल्म के सीन कटवा दिए जाते हैं, सिगरेट बिकना नहीं बंद होता
‘अब जब सिगरेट स्मोकिंग की बात होती है तो आप पान-बीड़ी की दुकान नहीं रोकते, फिल्मों के सीन रोक देते हैं। आपको यह जान कर बड़ा आश्चर्य होगा कि हिन्दुस्तान शायद एक ही ऐसा देश है, जहां पर एक खुली सिगरेट मिलती है, दुनियां में कहीं और सिगरेट पीनी है तो पूरा डिब्बा लेना पड़ता है। अगर आपको सिगरेट से इतनी कोफ़्त है तो पहले आप यह छुट्टी सिगरेट बिकना बंद करवाइए।’

ऐनिमल राइट्स वाले भी करते हैं बॉलिवुड को टार्गेट
‘अगर ऐनिमल राइट्स वालों को कोई प्रॉब्लम है तो वह सबसे पहले फिल्म वालों को आकर बोलना शुरू कर देते हैं कि मत इस्तेमाल करें, वे लोग गाँव में पशुओं की हालत, माथेरान में घोड़ों के साथ क्या किया जाता है, कैसे दौड़ाया जाता है, यह सब कोई नहीं देखता है।’

ऐक्टर का बेटा ऐक्टर क्यों न बनें, मैंने मेहनत इसीलिए की, ताकि बच्चों को आसानी हो
‘अब आते हैं नेपोटिजम की बात पर। मिनिस्टर का बेटा मिनिस्टर बनता है, उद्योगपति का बेटा उद्योगपति बनता है, क्रिकेटर का बीटा क्रिकेटर बनता है, लेकिन ऐक्टर का बेटा ऐक्टर और डायरेक्टर का बेटा डायरेक्टर नहीं बन सकता है। यह बात कतई सही नहीं है। कोई भी आदमी मेहनत क्यों करता है, इसलिए ताकि जो बुरे दिन देखकर उसने मेहनत की है, उन बुरे दिनों से उसके परिवार को सामना न करना पड़े।’

कोई मां-बाप नहीं दर्शक बनाते हैं स्टार
‘मेरे बेटे-बेटियों को वह दिन देखना न पड़े, इसलिए तो मैंने मेहनत की थी और मेहनत करता हूं। नेपोटिजम से होता क्या है, आप सिर्फ एक अवसर देते हैं किसी को, सिर्फ एक मौका। स्टार तो ऑडियंस बनाती है। दर्शक ही बनाते हैं ऐक्टर-डायरेक्टर। कोई भी बाप अपने बेटे-बेटियों को स्टार, ऐक्टर या डायरेक्टर नहीं बना सकता है, यह काम तो दर्शकों का है।’

आलिया भट्ट – रणबीर कपूर को दर्शकों ने स्टार बनाया
‘अगर दर्शकों ने आलिया भट्ट और रणबीर कपूर सराहा न होता तो वह कभी भी स्टार नहीं बनते, दोनों को स्टार दर्शकों ने ही बनाया है, दर्शकों का प्यार मिला है तब वह स्टार बने हैं। ऐसे कई ऐक्टर्स – डायरेक्टर्स थे, जिन्हें परिवार की ओर से मौका तो मिला, लेकिन दर्शकों ने उन्हें नकार दिया और वह नहीं चले।’

बेटे करण देओल की डेब्यू फिल्म फ्लॉप हो गई, सनी देओल कुछ नहीं कर पाए
‘आप हालिया उदाहरण में सनी देओल के बेटे करण देओल को ही देख लीजिए नहीं चली उनकी डेब्यू फिल्म, नकार दिया दर्शकों ने, क्या कर पाए सनी देओल बताइए आप। दर्शक बनाते हैं स्टार। मुझे लगता है नेपोटिजम एक बकवास सी चर्चा है, जो चली है, बाकी कई बकवास चर्चाओं की तरह यह भी है। नेपोटिजम को लेकर यही मेरा खुलासा है।’

ओटीटी प्लेटफॉर्म का फ्यूचर उज्जवल, हालांकि फिल्मों का भी मार्केट बना रहेगा।
आपको बता दें, विक्रम भट्ट की बेटी और निर्देशक कृष्णा भट्ट ने अपनी आगामी वेब सीरीज ‘माया 4’, ओटीटी प्लेटफॉर्म और वेब सीरीज का भविष्य पर बात करते हुए कहा कि फ्यूचर डिजिटल और वेब सीरीज का ही होगा। हालांकि फिल्मों का भी मार्केट बना रहेगा। कृष्णा भट्ट ने इस बात पर जोर देकर कहा कि नई जनरेशन वेब सीरीज देखना ज्यादा पसंद कर रही है। वेब सीरीज पर सेंसर नहीं होने के चलते कहानी कहने में मजा आता है और खुलकर काम करने का अवसर मिलता है। कृष्णा भट्ट अक्टूबर के मध्य से ‘माया 4’ की शूटिंग शुरू करेंगी। यह एक थ्रिलर वेब सीरीज है। इसका निर्माण विक्रम भट्ट की लोनरेंजर प्रॉडक्शन कर रही है। इससे पहले कृष्णा को टैलेंट ट्रैक द्वारा ‘माया’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के रूप में सम्मानित किया गया था। ‘माया 4’ की कास्ट की घोषणा अभी हुई नहीं है। कृष्णा इस समय ‘ट्विस्टेड 3’ से भी जुड़ी हुई हैं, वह इसे लेकर बेहद उत्साहित भी है।

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