Explainer : महबूबा की रिहाई के बाद फारूक के घर बड़ी बैठक, आखिर क्या है गुपकार योजना

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हाइलाइट्स:

  • जम्मू-कश्मीर की पार्टियां आर्टिकल 370 की बहाली की लड़ाई को लेकर एकजुटता दिखा रही हैं
  • आठ राजनीतिक पार्टियों ने फारूक अब्दुल्ला के घर पिछले साल 4 अगस्त को बैठक की थी
  • सभी पार्टियों ने एक साझे प्रस्ताव पर दस्तखत किया था जिसे गुपकार घोषणा कहा गया
  • इस साल 22 अगस्त को गुपकार घोषणा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया

नई दिल्ली
नैशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के संबंध में ‘गुपकार घोषणा‘ पर भविष्य की कार्रवाई का खाका तैयार करने के लिए गुरुवार को अपने आवास पर बैठक बुलाई है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी बैठक में हिस्सा लेंगी। मुफ्ती को 14 महीने की हिरासत के बाद मंगलवार को छोड़ा गया। इसके बाद फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने उनसे उनके आवास पर मुलाकात की।

मुलाकात के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मेरे पिता (फारूक अब्दुल्ला) और मैंने महबूबा मुफ्ती साहिबा से मिलकर रिहाई के बाद उनका हालचाल पूछा। उन्होंने कहा कि पीडीपी नेता ने गुपकार घोषणा पर हस्ताक्षर करने वालों की गुरुवार को होने वाली बैठक में शामिल होने का न्योता स्वीकार कर लिया है। उन्होंने बैठक में शामिल होने के फारूक साहब के निमंत्रण को विनम्रता से मंजूर किया है।

4 अगस्त, 2019 की मीटिंग और गुपकार घोषणा
नैशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के कश्मीर में गुपकार रोड स्थित आवास पर 4 अगस्त, 2019 को आठ स्थानीय राजनीतिक दलों ने एक बैठक की थी। उस वक्त घाटी में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी पर्यटकों को वहां से निकलने को कहा गया था। पूरे देश में असमंजस की स्थिति थी कि आखिर केंद्र सरकार क्या कदम उठाने जा रही है जो इतने भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी और पर्यटकों को भी हटाना पड़ा। असमंजस के इसी माहौल में कश्मीरी राजनीतिक दलों ने मीटिंग बुलाई। उस मीटिंग में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसे गुपकार घोषणा (Gupkar Declaration) का नाम दिया गया।

इन पार्टियों ने दिखाई थी एकजुटता

इस घोषणा पर नैशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, पीपल्स कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, सीपीआई(एम), पीपल्स यूनाइटेड फ्रंट, पैंथर्स पार्टी और अवामी नैशनल कॉन्फ्रेंस ने हिस्सा लिया था। बैठक की अध्यक्षता फारूक अब्दुल्ला ने की थी जबकि महबूबा मुफ्ती, मजुफ्फर हुसैन बेग, अब्दुल रहमान वीरी, सज्जाद गनी लोन, इमरान रजा अंसारी, अब्दुल गनी वकील, ताज मोहिउद्दीन, एमवाई तारिगामी, उमर अब्दुल्ला, जस्टिस हसनैन मसूदी, मुहम्मद अकबर लोन, नारिस सुगामी, शाह फैसल, अली मोहम्मद सागर, मुजफ्फर शाह , उजैर रोंगा और सुहैल बुखारी ने हिस्सा लिया था। अगले ही दिन 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बांटकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो केंद्रशासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव संसद में पेश कर दिया।

गुपकार घोषणा II में खुलकर सामने आए इरादे
22 अगस्त, 2020 को फिर से छह राजनीतिक दलों- नैशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, सीपीआई(एम) और अवामी नैशनल कॉन्फ्रेंस ने फिर से गुपकार घोषणा दो (Gupkar Declaration II) पर दस्तखत किया। इन सभी ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए की वापसी की लड़ाई साथ लड़ने का संकल्प लिया।

क्या कहती है गुपकार घोषणा

इसमें कहा गया, ‘हम आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए, जम्मू-कश्मीर के संविधान, इसके राज्य के दर्जे की वापसी के लिए साझी लड़ाई को लेकर समर्पित हैं। हमें राज्य के बंटवारा बिल्कुल नामंजूर है। हम सर्वसम्मति से यह दोहराते हैं कि हमारी एकता के बिना हमारे कुछ नहीं हो सकता।’ इसमें आगे कहा गया, ‘5 अगस्त, 2019 को लिए गए फैसले असंवैधानिक थे जिनका मकसद जम्मू-कश्मीर को अधिकारों से वंचित करना और वहां के लोगों की मूल पहचान को चुनौती देना है।’ उन राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान में कहा, ‘हम लोगों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि हमारी साभी राजनीतिक गतिविधियां 4 अगस्त, 2019 तक जम्मू-कश्मीर के प्राप्त दर्जे की वापसी की राह में होंगी।’

गुपकार डेक्लेरेशन का पाकिस्तान कनेक्शन
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने गुपकार घोषणा दो की सराहना की। उन्होंने इसे बहुत महत्वपूर्ण कदम बताया। इस पर फारूक अब्दुल्ला को कहना पड़ा कि वो किसी के इशारे पर यह सब नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं यह स्पष्ट कर दूं कि हम किसी के पपेट नहीं हैं, न नई दिल्ली के और न सीमा पार किसी के। हम जम्मू-कश्मीर की जनता के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हीं की भलाई में काम करेंगे।’

गुपकार घोषणा को कश्मीरियों का कितना साथ
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाकर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभक्त करने का प्रस्ताव पास किया तो चर्चा के दौरान कई बातें सामने आईं। सरकार और समर्थक दलों की ओर से बताया गया कि कैसे आर्टिकल 370 सिर्फ जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों, नौकरशाहों और वहां के कुलीन वर्ग को संरक्षित कर रहा था जबकि आम कश्मीरियों को इससे बेहद नुकसान हो रहा है। उसके बाद भी विभिन्न मंचों पर छिड़ी चर्चा के दौरान इस बात की गहन पड़ताल कर आंकड़ों के साथ बताया गया कि कैसे आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर के चौतरफा विकास की राह का रोड़ा बना हुआ था।

संभव है कि इन चर्चाओं से जानकारी हासिल कर और केंद्र सरकार के दृढ़ निश्चय को देखते हुए जम्मू-कश्मीर की आम जनता ने आर्टिकल 370 को कल की बात मानते हुए बेहतर भविष्य की राह मजबूत करने पर फोकस कर दिया है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि क्योंकि विभिन्न मीडिया प्लैटफॉर्म पर वहां की आम पब्लिक और कुछ नेताओं ने गुपकार घोषणा को सत्ता से बेदखल हुए मुट्ठीभर नेताओं की छटपटाहट करार दी। दरअसल, इन राजनीतिक दलों पर कश्मीर की ज्यादातर जनता का भरोसा डगमगा गया है। वो मानते हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता और आर्टिकल 370 इतिहास हो चुका है।

कैसे अंदर से खोखला है गुपकार डेक्लेरेशन
कितनी हास्यास्पद बात है कि राष्ट्रीय स्तर की दो पार्टियों कांग्रेस और सीपीआई(एम) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने तो गुपकार घोषणा का समर्थन किया है, लेकिन नैशनल लीडरशिप ने इसपर चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में ‘अलोकतांत्रिक तरीके’ से जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीने जाने की आलोचना तो की, लेकिन आर्टिकल 370 की वापसी पर कुछ नहीं कहा। इतना ही नहीं, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ऑन रेकॉर्ड कहा कि कांग्रेस पार्टी जम्मू-कश्मीर से उसका विशेष दर्जा खत्म करने के विरोध में कभी नहीं थी, लेकिन इसे जिस तरह वहां की जनता पर थोपा गया, उसका विरोध जरूर करती है। कुछ खबरों में मनमोहन सिंह के हवाले से यह भी कहा गया, ‘कांग्रेस पार्टी ने आर्टिकल 370 हटाने के विधेयक के समर्थन में मतदान किया, न कि विरोध में। हम मानते हैं कि आर्टिकल 370 तात्कालिक उपबंध था, लेकिन अगर इसे हटाना था तो इसके लिए जम्मू-कश्मीर की जनता का भरोसा जीतना चाहिए था।’

बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया
वहीं, गुपकार घोषणा के लिए मीटिंग को लेकर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने कहा कि तीन पूर्व मुख्यमंत्री घाटी में परेशानी खड़ी करने के लिए साथ आए हैं। बीजेपी चीफ रविंदर रैना ने गुपकार घोषणा को ‘ऐंटी-नैशनल’ और ‘पाकिस्तान प्रायोजित’ बताया है। उन्होंने कहा कि अब्दुल्ला और मुफ्ती ने अपनी ताजा बैठक में गुपकार घोषणा के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जिसकी बीजेपी कभी अनुमति नहीं देगी।

रैना ने कहा कि अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे राजनेता अपने अपराधों को कवर करने की कोशिश कर रहे हैं। गुपकार घोषणा की आड़ में वे घाटी में उपद्रव की योजना बना रहे हैं। बीजेपी स्पष्ट कर देना चाहती है कि जिस किसी ने भी घाटी में अशांति फैलाने की कोशिश की, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। बीजेपी के अलावा प्रदेश की अपनी पार्टी ने भी गुपकार घोषणा का विरोध किया है।



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