Farm Bills : राजनीतिक विरोध गहराने के बावजूद बीजेपी को राज्यसभा में कृषि विधेयकों के पास होने का भरोसा

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हाइलाइट्स:

  • केंद्र सरकार तीनों कृषि विधेयकों को राज्यसभा से भी पास करवाने को लेकर आश्वस्त है
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद विधेयक की तरफदारी कर रहे हैं
  • मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में विपक्ष एक भी बड़ा बिल राज्यसभा में नहीं गिरा पाया है

नई दिल्ली
कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन विधेयकों के खिलाफ राजनीतिक गोलबंदी के बावजूद बीजेपी इस बात को लेकर आश्वस्त है कि इन विधेयकों को राज्यसभा की भी मंजूरी मिल जाएगी। इन विधेयकों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल (SAD) सरकार से बाहर हो चुकी है। अब पार्टी राज्यसभा में इन विधेयकों का भविष्य सुनिश्चित होने के बाद तय करेगी कि वो बीजेपी नेतृत्व वाले राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन (NDA) में बने रहे या इससे भी अलग हो जाए।

प्रधामंत्री के बयानों से संकेत

बीजेपी राज्यसभा में कृषि विधेयकों के भविष्य को लेकर कितना आश्वस्त है, इसका अंदाजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों से लगाया जा सकता है। मोदी ने इन विधेयकों को किसानों के हित में बताते हुए विरोधी पक्षों पर जोरदार हमला बोला है। संसद के निचले सदन लोकसभा में विपक्षी दलों के साथ-साथ सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के कड़े ऐतराज के बावजूद पीएम ने खुद से कृषि विधेयक के समर्थन में मोर्चा संभाल लिया है। यानी साफ है कि सरकार इस बिल के भविष्य को लेकर तनिक भी उहापोह की स्थिति में न होकर बिल्कुल आश्वस्त है। ऐसे में कहा जा सकता है कि संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में तीनों विधेयकों को जल्दी ही पेश किया जाएगा।

प्रधानमंत्री तब कृषि विधेयकों की खुलकर और जोर-शोर से तरफदारी कर रहे हैं जब एसएडी और कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी पार्टियां इन्हें किसान विरोधी बता रही हैं। दूसरी तरफ पंजाब और हरियाणा के किसान प्रस्तावित कानूनों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि नए कानूनों से सरकार की तरफ से कृषि उत्पादों को मिलने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

पीएम ने बिहार में कुछ रेल परियोजनाओं की वर्चुअल लॉन्चिंग के मौके पर बोलते हुए इन विधेयकों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन सुधारों को किसानों को बिचौलियों से आजादी दिलाने के लिए ‘सुरक्षा कवच’ करार दिया। उन्होंने विपक्ष पर बिचौलियों का साथ देने और किसानों को झूठ बोलकर बहकाने का आरोप लगाया। मोदी ने कहा कि ये सुधार किसानों को अपनी उपज कहीं भी बेचकर अपनी आमदनी बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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राज्यसभा में कौन, किसके साथ
245 सदस्यों की राज्यसभा में एनडीए अब भी बहुमत से दूर है, लेकिन यहां कई क्षेत्रीय पार्टियां पिछले संसद सत्र में कई मुद्दों पर साथ दे चुकी हैं। उनके समर्थन से सरकार ने कई विधेयकों को कानून का रूप दे दिया। इसी के मद्देनजर बीजेपी नेताओं ने कृषि विधेयकों को राज्यसभा में 130 सदस्यों के समर्थन का दावा किया है। इनमें एआईएडीएमके के नौ, टीआरएस के सात और वाईएसआर कांग्रेस के छह सदस्य भी शामिल हैं। ये तीनों दल सत्ताधारी एनडीए का हिस्सा नहीं हैं।

राज्यसभा में अभी 86 सांसदों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी जबकि 40 सदस्यों के साथ कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी है। शिरोमणि अकाली दल के तीन राज्यसभा सांसद निश्चित रूप से बिल के विरोध में वोट करेंगे। हालांकि, एनडीए के पुराने साथियों में एक और अब विपक्ष का हिस्सा हो चुकी शिवसेना ने इन बिलों का समर्थन किया है। महाराष्ट्र के इस दल के राज्यसभा में तीन सदस्य हैं। आम आदमी पार्टी के तीन सदस्य, समाजवादी पार्टी के आठ सांसद, बीएसपी के चार सांसद भी बिल के विरोध में वोट करेंगे।

बिल का विरोध कर रहे दलों का आकलन करने पर राज्यसभा में 100 सांसदों के कृषि विधेयकों के विरोध में वोट करने का अनुमान है। हालांकि, कुछ छोटे दलों ने अपना स्टैंड क्लियर नहीं किया है। इन पार्टियों के राज्यसभा में करीब दर्जनभर सांसद हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि एनडीए के बहुमत में नहीं होने के बावजूद विपक्ष मोदी सरकार को दूसरे कार्यकाल में किसी भी बड़े विधेयक पर झटका नहीं दे पाया है।

अध्यादेशों की जगह लेंगे तीनों कानून
कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक और कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) करार विधेयक गुरुवार को लोकसभा से पास हो गए। अनिवार्य वस्तुएं (संशोधन) विधेयक को इस सदन ने मंगलवार को ही हरी झंडी दे दी थी। ये तीनों विधेयक कानून बनने के बाद सरकार की तरफ से जारी अध्यादेशों की जगह लेंगे।



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