Farmers Protests: किसान आंदोलन में क्‍यों हो रहा है मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी का बायकॉट?

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नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन अब और तेज हो जाएगा। केंद्र सरकार के प्रस्‍ताव को खारिज करते हुए किसान संगठनों ने एक बड़ी घोषणा की। किसान संगठनों ने कहा कि जब तक सरकार तीनों कानूनों को पूरी तरह वापस लेने की उनकी मांग स्वीकार नहीं करती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। उन्‍होंने कॉर्पोरेट्स के बहिष्‍कार की घोषणा करते हुए रिलायंस और अडाणी ग्रुप का नाम लिया। किसान नेताओं के मुताबिक, आंदोलनरत किसान रिलायंस जियो के सिम नहीं इस्‍तेमाल करेंगे। अगर किसी के पास जियो का सिम है तो उसे दूसरे सर्विस प्रोवाइडर में पोर्ट कराया जाएगा। रिलायंस और अडाणी ग्रुप के हर स्‍टोर, मॉल व सेवा का ये किसान बहिष्‍कार करेंगे। आइए जानते हैं कि देश के सबसे बड़ी कारोबारी समूहों में शामिल, रिलायंस और अडाणी ग्रुप आंदोलनरत किसानों के निशाने पर क्‍यों हैं?

फूंके जा चुके हैं अंबानी-अडाणी के पुतले

इसी महीने की शुरुआत में, अमृतसर में प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी के पुतले फूंके थे। नवंबर के महीने में किसानों ने जियो सिम कार्ड भी जलाए थे। सोशल मीडिया पर भी जियो के खिलाफ कैंपेन चला। कुछ पंजाबी गायकों के सिम जलाने के वीडियो भी वायरल हुए थे। किसान संगठनों ने रिलांयस के पेट्रोल पंपों से तेल न भराने की भी अपील की थी।

अंबानी और अडाणी के विरोध में क्‍यों हैं किसान?

मुकेश अंबानी और गौतम अडानी, दोनों की नजरें भारत के कृषि क्षेत्र पर हैं। साल 2017 में अंबानी ने इस क्षेत्र में निवेश की अच्‍छा जताई थी। जियो प्‍लेटफॉर्म की फेसबुक के साथ पार्टनरशिप हुई है। जियोकृषि नाम का एक ऐप भी है जो खेत से प्‍लेट तक सप्‍लाई चेन तैयार करेगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने 77% फल सीधे किसानों से खरीदती है। विरोध कर रहे किसानों का कहना है कि नए कानून इस तरह से बनाए गए हैं कि उससे ऐसे बड़े कारोबारियों को फायदा होगा। हालिया आंदोलन के दौरान खुलकर रिलायंस और अडाणी समूह का नाम लेकर किसानों ने विरोध दर्ज कराया है।

कृषि संगठनों का क्‍या है आरोप?

कुछ किसान समूहों ने आरोप लगाया है कि अडाणी ग्रुप ऐसी फैसिलिटीज तैयार कर रहा है जहां अनाज स्‍टोर करके रखा जाएगा और बाद में उन्‍हें ऊंची कीमत पर बेचा जाएगा। वहीं, कंपनी ने अपने ताजा बयान में कहा है कि ‘वर्तमान मुद्दों के सहारे जिम्‍मेदार कॉर्पोरेट पर कीचड़ उछालने की कोशिश की जा रही है।’

राहुल गांधी इन्‍हें बता चुके ‘अडाणी-अंबानी’ कानून

पूर्व केंद्रीय मंत्री भी कर चुकीं जियो का विरोध

इन्‍हीं कृषि कानूनों के विरोध में केंद्र सरकार में मंत्री रहीं अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने इस्‍तीफा दे दिया था। बाद में पार्टी ने भी सरकार से समर्थन वापस ले लिया। बादल ने इस्‍तीफे के बाद के बयानों में कई बार रिलायंस जियो का जिक्र किया था। एक बार उन्‍होंने कहा था, “एक किसान ने हमें उदाहरण दिया… जियो आया, उसने हमें फ्री फोन्‍स दिए। जब सबने ये फोन खरीद लिए और उनपर निर्भर हो गए तो प्रतियोगिता खत्‍म हो गई और जियो ने दाम बढ़ा दिए। कॉर्पोरेट्स बिल्‍कुल यही (कृषि क्षेत्र में) करने वाले हैं।”

बायकॉट के ऐलान पर अडाणी ग्रुप ने क्‍या कहा?

अनाज की स्‍टोरेज या कीमत तय करने में कंपनी की कोई भूमिका नहीं है। यह केवल FCI को सेवा/इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर उपलब्‍ध कराती है।

अडाणी ग्रुप



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