Hepatitis C Virus: हर साल 1 लाख लोगों को मारने वाले वायरस को खोजने वालों को मिला नोबेल, जानें क्या है यह बीमारी

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स्टॉकहोम
स्‍वीडन के स्‍टॉकहोम शहर में साल 2020 का मेडिसिन के क्षेत्र में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। यह पुरस्कार हार्वे अल्‍टर (Harvey Alter), माइकल हॉगटन (Michael Houghton) और चार्ल्‍स राइस ( Charles Rice) को संयुक्त रूप से दिया गया है। इन वैज्ञानिकों ने मिलकर हेपटाइटिस सी वायरस की खोज की थी।

दुनिया की तीसरी सबसे घातक बीमारी है हेपेटाइटिस सी
नोबेल पुरस्कार देने वाली संस्था ने कहा कि इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार उन तीन वैज्ञानिकों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने खून से पैदा होने वाली हेपेटाइटिस के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक योगदान दिया है। यह बीमारी एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है जो दुनिया भर के लोगों में सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण बनती है। इन तीनों वैज्ञानिकों ने लाभदायक खोज की है। इसी के कारण हेपेटाइटिस सी की पहचान हो सकी है।

बेहद खतरनाक है हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस बीमारी का तीसरा रूप पहले वाले दोनों से बेहद खतरनाक है। यह दुनिया की तीसरी ऐसी बीमारी है जिससे हर साल एक लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। पहले नंबर पर एचआईवी और दूसरे नंबर पर टीबी है। इसलिए इस खोज को इतना महत्व दिया गया है।

पहले केवल हेपेटाइटिस ए और बी की ही हुई थी पहचान
आज से पहले केवल हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी की ही पहचान हुई थी। लेकिन, रक्त जनित हेपेटाइटिस के मामले हमेशा से अस्पष्ट ही रहते थे। अब हेपेटाइटिस सी वायरस की खोज ने क्रोनिक हेपेटाइटिस के शेष मामलों के कारण का पता लगाया है। इससे ब्लड टेस्ट और नई दवाओं को बनाया जा सका है। इनकी खोज के कारण दुनियाभर में लाखों लोगों की जिंदगियां बचाई गई हैं।

क्या है हेपेटाइटिस, जानिए कितना है खतरनाक
हेपेटाइटिस एक ग्रीक शब्ज है, जो लिवर और सूजन से मिलकर बना हुआ है। यह एक वायरल संक्रमण वाली बीमारी है। शराब का अत्याधिक सेवन, वातावरण में मौजूद दूषित पदार्थ और ऑटोइम्यून रोग के कारण भी यह बीमारी होती है। 1940 में यह मालूम हो गया था कि हेपेटाइटिस मुख्य रूप से दो तरह की होती है।

हेपेटाइटिस ए
यह बीमारी प्रदूषित पानी या भोजन से फैलती है। इस बीमारी का रोगी के ऊपर ज्यादा दिनों तक असर नहीं होता है। कुछ दिनों के इलाज के बाद रोग स्वस्थ हो जाता है।

हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस का यह रूप पहले वाले की तुलना में खतरनाक होता है। यह खून और शरीर में मौजूद फ्यूइड के जरिए फैलता है। यह मरीज के ऊपर गंभीर असर डालती है। यह इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि इस बीमारी का लक्षण रोगी के पूरी तरह चपेट में आने के बाद दिखाई देता है। इससे अधिकतर मामलों में रोगी या तो अपंग हो जाता है या उसकी मौत हो जाती है।



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