INS Vikrant: एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत का हुआ बेसिन ट्रायल

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हाइलाइट्स:

  • बेसिन ट्रायल में होता है तैरते हुए मशीनरी का परीक्षण
  • अगले साल जून से पहले शुरू हो जाएंगे सी-ट्रायल
  • अगले साल के अंत तक नेवी में शामिल हो जाएगा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत

नई दिल्ली
भारत के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत का सोमवार को कोच्चि में बेसिन ट्रायल हुआ जो सफल रहा। इसके साथ ही विक्रांत प्रोजेक्ट के आखिरी स्टेज में पहुंच गया है। अगले साल जून से पहले इसके सी-ट्रायल शुरू हो जाएंगे।

बेसिन ट्रायल में तैरते हुई स्थिति में विक्रांत की मशीन और इक्विपमेंट (हिस्से-पुर्जे) की जांच की गई। यह ट्रायल पहले अप्रैल-मई में होना था लेकिन कोविड-19 की वजह से इसमें देरी हो गई। बेसिन ट्रायल के बाद विक्रांत सी-ट्रायल के लिए जाएगा। इंडियन नेवी को उम्मीद है कि अगले साल के अंत तक एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत नेवी में शामिल हो जाएगा।

विक्रांत के हार्बर ट्रायल पूरे हो गए हैं। इसे बनाने का काम फरवरी 2009 में कोच्चि शिपयार्ड में शुरू हुआ था। इसकी लंबाई 262 मीटर है। इस एयरक्राफ्ट कैरियर में 26 फाइटर जेट और 10 हेलिकॉप्टर रखे जा सकते हैं। इसमें फ्लाइट ट्रायल 2021 में होंगे। यह विक्रांत के नेवी में कमिशन के बाद शुरू होंगे। इसका मतलब है कि एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह से ऑपरेशनल 2022-23 में हो पाएगा।

इंडियन नेवी की तरफ से लगातार तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर और दो नई फाइटर स्क्वॉड्रन की जरूरत बताई जा रही है ताकि चीन जिस तरह इंडियन ओशन रीजन (हिंद महासागर) में अपने पैर फैलाने की कोशिश कर रहा है उसका मुकाबला किया जा सके। इंडियन नेवी के पास अभी एक एयरक्राफ्ट कैरियर है- आईएनएस विक्रमादित्य। विक्रांत के कमिशन होने के बाद नेवी के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर हो जाएंगे।

नेवी कोशिश कर रही है कि तीसरे कैरियर के लिए भी एक्सेप्टेंस ऑफ नेसिसिटी (एओएन) स्वीकार कर ली जाए, जो 2015 से लंबित है। जबकि चीन के पास पहले से दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं और दो और एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण काम तेजी से चल रहा है। चीन का मकसद 2050 तक 10 कैरियर का है।



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