Knowledge : क्या संसदीय स्थायी समिति फेसबुक को समन कर सकती है ? शशि थरूर ने दिए संकेत

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नई दिल्ली
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के बाद आईटी मामलों की सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक से स्पष्टीकरण मांग सकती है। सूचना प्रौद्योगिकी मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस बात के संकेत दिए हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या किसी स्थायी समिति के अध्यक्ष के पास ऐसा विशेषाधिकार होता है?

सबसे पहले तो आप यह समझ लीजिए कि संसदीय समितियां होती क्या हैं और उनका काम क्या है। संसद में कई तरह के काम होते हैं, जो काफी जटिल प्रकार के होते हैं। ऐसे कामों को करने के लिए सभा की समितियां बनाई जाती हैं। इन्हें संसदीय समितियां कहते हैं। संसदीय समिति को सभा द्वारा नियुक्‍त या निर्वाचित किया जाता है। सभा का अध्‍यक्ष भी इनका नाम-निर्देशित कर सकता है और ये समितियां अध्‍यक्ष के निदेशानुसार कार्य करती हैं तथा अपना प्रतिवेदन सभा को या अध्‍यक्ष को प्रस्‍तुत करती हैं।

हर समिति में होते हैं 31 सदस्य
विभागों से संबद्ध स्‍थायी समितियां 24 हैं जिनके क्षेत्राधिकार में भारत सरकार के सभी मंत्रालय/विभाग आते हैं। इनमें से हर एक समिति में 31 सदस्‍य होते हैं – 21 लोकसभा से तथा 10 राज्‍यसभा से, जिन्‍हें क्रमश: लोकसभा के अध्‍यक्ष तथा राज्‍यसभा के सभापति द्वारा नामित किया जाता है। इन समितियों का कार्यकाल एक वर्ष से अनधिक होता है। इन्ही 24 समितियों में से एक है आईटी मामलों की संसदीय स्थायी समिति। इसके अध्यक्ष कांग्रेस नेता शशि थरूर हैं।

क्या है मामला
दरअसल, अमेरिकी अखबार ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ ने शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट में फेसबुक के अनाम सूत्रों के साथ साक्षात्कारों का हवाला दिया है। इसमें दावा किया गया है कि उसके एक वरिष्ठ भारतीय नीति अधिकारी ने कथित तौर पर सांप्रदायिक आरोपों वाला पोस्ट डालने के मामले में तेलंगाना के एक बीजेपी विधायक पर स्थायी पाबंदी को रोकने संबंधी आंतरिक पत्र में दखलंदाजी की थी।

थरूर ने किया था ट्वीट
इस खबर के प्रकाशित होने के बाद थरूर ने ट्वीट किया था, ‘सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति इन रिपोर्टों पर फेसबुक का जवाब जानना चाहती है। कमिटी यह जानना चाहती है कि भारत में हेट स्पीच को लेकर उनका प्रस्ताव क्या है।’ उन्होंने कहा था कि हमारी संसदीय समिति, सामान्य तौर पर, नागरिकों की सुरक्षा के अधिकार विषय के तहत गवाही पर विचार करेगी और सामाजिक/ऑनलाइन समाचार मीडिया प्लैटफार्मों के दुरुपयोग को रोकेगी। यह विषय आईटी समिति के मैन्डेट में है और पूर्व में फेसबुक को समन किया जा चुका है।

बीजेपी बोली- थरूर को अधिकार नहीं
थरूर के ट्वीट के बाद बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि स्टैंडिंग कमिटी के अध्यक्ष के पास अपने सदस्यों संग अजेंडे की चर्चा किए बिना कुछ भी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, ‘शशि थरूर, राहुल गांधी के अजेंडे को चलाना बंद करिए। कमिटी और स्पीकर की अनुमति के बिना यह नहीं हो सकता है।’

फेसबुक ने रखा पक्ष
वहीं दूसरी ओर फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हम हिंसा को बढ़ावा देने वाले भाषणों और कॉन्टेंट पर रोक लगाते हैं। हम ग्लोबल लेवल पर इन नीतियों को लागू करते हैं। इसमें किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का ध्यान नहीं दिया जाता।’ अधिकारी ने कहा, ‘हम जानते हैं कि अभी और बहुत कुछ करने की जरूरत है, हम प्रवर्तन की दिशा में प्रगति कर रहे हैं। किसी तरह के पक्षपात को रोकने के लिए हम नियमित रूप से अपनी प्रक्रियाओं का ऑडिट करते हैं।’



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