LAC में भारतीय वायुसेना की तैयारी, C-17 ग्लोबमास्टर और चिनूक हेलीकॉप्टर लगा रहे चक्कर

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नई दिल्ली
भारत और चीन के बीच तनाव कम (India China Standoff) होने का नाम नहीं ले रहा है। मई के बाद से ही दोनों देशों के संबंध कड़वाहट भरे हो चुके हैं। चीन चाहता है कि वो अपने सैन्य पराक्रम को दिखाकर भारतीय इलाके में कब्जा कर सके लेकिन हर बार उनको मायूसी हाथ रही है। चीन की बौखलाहट का अंदाजा इसी ले लगाया जा सकता है कि कभी वो गाना बजाना करने लगता है तो कभी दोस्ती की बात करने लगता है लेकिन भारत हर मोर्चे पर अपनी तैयारी पुख्ता रख रहा है। भारत 1962 में धोखा देने वाले इस चीन की नस-नस से वाकिफ है। इसीलिए इसकी बातों पर कोई नहीं आ रहा है।

पूरी तरह से तैयारी में जुटी वायुसेना
Line Of Actual Control में भारतीय सेना पूरी तरह से तैयारी में जुटी हुई है। भारतीय वायुसेना का बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर भी लद्दाख में तैनात है। यहां पर इस विमान से रसद खाद्य सामग्री की आपूर्ति की जाएगी। आज ग्लोबमास्टर को लेह एयरबेस में लैंड कराया गया। दरअसल, बोइंग c-17 ग्लोबमास्टर यह विश्व के बड़े मालवाहक जहाजों में से एक है। ग्लोबमास्टर कारगिल, लद्दाख और अन्य उत्तरी और उत्तर पूर्वी सीमाओं जैसे कठिन जगहोंपर पर आसानी से उतर सकता है। इसके अलावा लैंडिंग में परेशानी होने की स्थिति में इसमें रिवर्स गियर भी दिया गया है। विमान चार इंजनों से लैस है। 81वीं स्क्वार्डन के ग्रुप कैप्टन को ‘गोल्डन की’ देकर विमान को भारतीय वायुसेना में शामिल किया। इस स्क्वार्डन को स्काईलॉर्ड्स नाम दिया गया है।


चिनूक हेलीकॉप्टर की ताकत
इसके बाद वायुसेना ने चिनूक हेलीकॉप्टर को भी तैयार कर रखा है। आज लद्दाख इलाके में चिनूक भी अपने काम में जुटा रहा। इन दोनों विमानों को खास तौर पर आपूर्ति के लिए तैयार किया जा रहा है। अगर चीन से किसी भी वक्त युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो जरुरी सामानों की आपूर्ति के लिए ये हमेशा तैनात रहेंगे। चिनूक हेलीकॉप्टर की ताकत इतनी है कि इस हेलिकॉप्टर में एक बार में गोला बारूद, हथियार के अलावा सैनिक भी जा सकते हैं। चिनूक हेलीकॉप्टर को रडार से पकड़ पाना भी मुश्किल है। चिनूक हेलीकॉप्टर भारी मशीनों और तोपों को भी उठाकर ले जा सकता है।

20 हजार फीट ऊंचाई तक उड़ने वाला
20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ने वाला चिनूक हेलीकॉप्टर 10 टन तक के वजन को उठाकर कहीं भी ले जा सकता है। चिनूक हेलीकॉप्टर 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता है, जबकि इसकी ऊंचाई 18 फीट और चौड़ाई 16 फीट है। चिनूक हेलीकॉप्टर को दो पायलट उड़ा सकते हैं। इस हेलिकॉप्टर का 26 देशों में इस्तेमाल किया जाता है।

माइक पॉम्पियों का बयान
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने भारत को एक बड़े खतरे से आगाह किया है। उन्होंने चीन को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि उसने भारत की उत्तरी सीमा पर 60,000 सैनिक तैनात किए हैं। अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया पर आधारित ‘क्वाड’ देशों के विदेश मंत्री मंगलवार को टोक्यो में मिले थे। उन्होंने कहा, ‘मैं भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के अपने समकक्षों के साथ था, चार बड़े लोकतंत्रों, चार शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं, चार राष्ट्रों के इस प्रारूप को क्वाड कहते हैं। इन सभी चारों देशों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से पेश खतरों से जुड़े वास्तविक जोखिम हैं।’ पॉम्पियो ने मंगलवार को तोक्यो में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।

रुस्तम-2 सफल फ्लाइट टेस्ट
चीन ने पूर्वी लद्दाख में तेवर दिखाए तो भारत चौकन्‍ना हो गया। उसके ड्रोन्‍स और फाइटर जेट्स कई बार सीमा के आस-पास मंडराते नजर आए। भारत ने अपने पास मौजूद सभी विकल्‍प बॉर्डर के पास मौजूद रखे हैं। सर्विलांस के लिए ड्रोन्‍स का सहारा तो लिया ही जा रहा है, उन्‍हें और बेहतर बनाने की तैयारी है। डिफेंस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने डेवलपमेंट का काम तेज कर दिया है। शुक्रवार को रुस्‍तम-2 ड्रोन का सफल फ्लाइट टेस्‍ट हुआ। इसके अलावा इजरायल से मिले हेरान ड्रोन्‍स को भी मिसाइलों और लेजर गाइडेड बमों से लैस करने की तैयारी है। पीएलए अपनी ड्रोन पावर की डींगे कई बार हांक चुका है। भारत की तैयारी अपने अंदाज में चीन को मात देने की है।



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