Oxford AstraZeneca Corona Vaccine: भारत के लिए खुशखबरी, लांसेट की समीक्षा में सुरक्षित निकली ऑक्‍सफर्ड की कोरोना वायरस वैक्‍सीन

Spread the love


भारत समेत दुनियाभर के विकासशील देशों के लिए उम्‍मीद का किरण बनी ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी और दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका की कोरोना वायरस वैक्‍सीन को स्‍वतंत्र शोधकर्ताओं ने समीक्षा के दौरान पूरी तरह से सुरक्षित पाया है। ऑक्‍सफर्ड की कोरोना वैक्‍सीन के अंतिम चरण के ट्रायल के परिणामों की स्‍वतंत्र समीक्षा प्रतिष्ठित मेडिकल पत्रिका लांसेट में छपा है। इस शोध में यह भी कहा गया है कि ट्रायल के दौरान यह कोरोना वायरस वैक्‍सीन महामारी को रोकने में औसतन 70 फीसदी प्रभावी साबित हुई है। ताजा शोध भारत के लिए भी बहुत अच्‍छी खबर माना जा रहा है। आइए जानते हैं पूरा मामला…..

समीक्षा में प्रभावी साबित हुई ऑक्‍सफर्ड की कोरोना वैक्‍सीन

लांसेट में प्रकाशित शोध में यह भी कहा गया है कि ट्रायल के दौरान कोरोना वैक्‍सीन दो फुल डोज देने पर 62 प्रतिशत प्रभावी क्षमता और पहले आधा डोज और फिर पूरा डोज देने पर करीब 90 फीसदी प्रभावी क्षमता देखने को मिली। मंगलवार को एक संवाददाता सम्‍मेलन के दौरान ऑक्‍सफर्ड के वैक्‍सीन विशेषज्ञ और कोरोना वैक्‍सीन प्रॉजेक्‍ट को आगे बढ़ाने वाली प्रफेसर सारा गिल्‍बर्ट ने कहा था कि यह ब्रिटेन के लिए बहुत अच्‍छा दिन है और यह वर्ष 2020 में संभवत: हमारे लिए सबसे अच्‍छा दिन है। उन्‍होंने कहा कि हम न केवल ब्रिटेन में कोरोना टीकाकरण की शुरुआत को देख रहे हैं बल्कि हमने अपने कोरोना वायरस टीके की पूरी सूचना समीक्षा के लिए दे दी है। हमने ऐसी सभी सूचना दी है जिसे लोग मांग रहे थे।

​’कम दाम में बड़े पैमाने पर बन सकती है ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन’

ऑक्‍सफर्ड के वैक्‍सीन प्रॉजेक्‍ट का नेतृत्‍व करने वाली सारा गिल्‍बर्ट ने कहा, ‘हम अब देखते हैं कि वैक्‍सीन सुरक्षित है और बहुत प्रभावी है। हम यह भी जानते हैं कि इस वैक्‍सीन को बड़े पैमाने पर और बहुत कम दाम पर बना सकते हैं।’ उन्‍होंने आशा जताई कि कोरोना वैक्‍सीन को आने वाले सप्‍ताह में नियामक संस्‍था से स्‍वीकृति मिल जाएगी। ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन के ट्रायल डेटा के मुताबिक ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में 23,745 लोगों ने हिस्‍सा लिया। इनमें से 82 फीसदी लोग 18 से 55 साल के बीच के थे। बाद में 56 साल या उससे ज्‍यादा की उम्र के लोगों को इस ट्रायल का ह‍िस्‍सा बनाया गया। ऑक्‍सफर्ड ने कहा है कि 56 साल उसके ज्‍यादा के उम्र के लोगों के डेटा का अभी तक आकलन नहीं किया गया है लेकिन भविष्‍य में जब और ज्‍यादा आंकड़े आ जाएंगे तो इसका आकलन किया जाएगा।

​ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन पूरी तरह से सुरिक्षत: लांसेट

लांसेट पत्रिका ने कहा कि ऑक्‍सफर्ड की कोरोना वायरस वैक्‍सीन को पूरी तरह से सुरक्षित पाया गया है। ट्रायल के दौरान कुल 23,745 लोगों में से केवल 3 लोगों के अंदर गंभीर दुष्‍प्रभाव देखा गया जो संभवत: वैक्‍सीन से जुड़ा हुआ था। ये तीनों लोग या तो अब ठीक हो गए हैं या ठीक होने की कगार पर हैं। ये लोग आगे भी ट्रायल का हिस्‍सा बने रहेंगे। इससे पहले ऑक्सफर्ड के टीके के प्रभावी होने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कंपनी के सीईओ पास्‍कल सोरिओट ने ऐलान किया था कि वह दुनियाभर में अत‍िरिक्‍त ट्रायल करा सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि कोरोना वायरस वैक्‍सीन की प्रभावी क्षमता को परखने के लिए उसका एक लोअर डोज दिया जा सकता है। ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन की लोअर डोज ने फुल डोज के मुकाबले ज्‍यादा बेहतर तरीके से काम किया है।

​वैक्‍सीन के असर से जुड़े डेटा पर खड़े हो गए थे सवाल

इससे पहले एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी ने यह स्वीकार किया था कि ट्रायल के दौरान कुछ लोगों पर दी गई वैक्‍सीन की डोज में गलती हुई थी। इससे वैक्‍सीन के असर से जुड़े डेटा पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब एक्‍सपर्टस पूछ रहे हैं क्‍या ऐडिशनल टेस्टिंग में यह डेटा बरकरार रहेगा या यह और कम होगा। वैज्ञानिकों का कहना था कि एस्‍ट्राजेनेका से जो चूक हुई है, उससे नतीजों पर उनका भरोसा कम हुआ है। उधर, पास्‍कल ने कहा था, ‘अब हमें ऐसा लग रहा है कि हमने ज्‍यादा अच्‍छी प्रभावी क्षमता हासिल कर ली है। हमें इसकी पुष्टि करनी होगी, इसलिए हमें एक अतिरिक्‍त अध्‍ययन की जरूरत होगी। उन्‍होंने कहा कि यह एक और अंतरराष्‍ट्रीय अध्‍ययन होगा लेकिन इसे तेजी से किया जा सकेगा और हमें कम लोगों की भी जरूरत होगी।

​भारत के लिए खुशखबरी है लांसेट का अध्‍ययन

लांसेट का ताजा शोध भारत के लिए बड़ी खुशखबरी है। दरअसल, भारत के सीरम इंस्टिट्यूट ने एस्‍ट्राजेनेका के साथ वैक्‍सीन की 100 करोड़ डोज बनाने की डील कर रखी है। कंपनी ने यूनाइटेड किंगडम में हुए ट्रायल के डेटा के आधार पर भारत में वैक्‍सीन के लिए इमर्जेंसी यूज अप्रूवल मांगा है। भारत में ड्रग रेगुलेटर डेटा की जांच करने के बाद वैक्‍सीन को अगले साल जनवरी तक अप्रूवल दे सकते हैं। केंद्र सरकार जुलाई तक 30 करोड़ भारतीयों को वैक्‍सीन देने की सोच रही है। इसके लिए सबसे ज्‍यादा डोज उसे सीरम इंस्टिट्यूट से ही मिलने की उम्‍मीद है। वैक्‍सीन एडमिनिस्‍ट्रेशन को लेकर बने नैशनल एक्‍सपर्ट ग्रुप की प्राथमिकता भी देसी टीकों को मंजूरी देने की है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अगले पांच से छह महीनों में Covishield की करीब 40 करोड़ डोज मिलने की उम्‍मीद कर रही है।



Source link

Previous Article
Next Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *