Remdesivir समेत चार दवाओं का COVID-19 के इलाज में बेहद कम या बिल्कुल असर नहीं: WHO

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जेनेवा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कोविड-19 इलाज को लेकर विश्व भर में बड़े स्तर पर किए गए अलग-अलग अध्ययन से इस बात के ‘निर्णायक सबूत’ मिले हैं कि गंभीर रूप से बीमार लोगों पर Remdesivir दवा का बेहद कम असर रहा या ये बिल्कुल भी कारगर साबित नहीं हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीमार पड़ने पर इलाज के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया गया था जिसके बाद इसे लेकर चर्चा और तेज हो गई थी।

इन चार दवाओं पर ट्रायल
WHO ने शुक्रवार को अपने 6 महीने लंबे चले एक Solidarity Therapeutics Trial के नतीजों की घोषणा की। इस परीक्षण का मकसद यह जानना था कि वर्तमान में उपलब्ध दवाएं कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में कितनी असरी हो सकती हैं। अध्ययन में सामने आया कि इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं Remdesivir, Hydroxychloroquine, Lopinavir/Ritonavir और इंटरफेरॉन का कोविड-19 मरीजों पर या तो बेहद कम असर हुआ या बिल्कुल भी कारगर साबित नहीं हुईं।


अमेरिका में है इजाजत
अमेरिका ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली Remdesivir दवा को विशेष परिस्थितियों में कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल के लिए वर्गीकृत किया है। साथ ही ब्रिटेन और यूरोपिय संघ ने भी कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए इस दवा को मंजूरी दी हुई है। ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय के प्रफेसर मार्टिन लेंड्रे ने कहा कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और लोपिनाविर को लेकर WHO द्वारा किए गए अध्ययन के नतीजे लगभग उसी दिशा में हैं, जैसा कि ब्रिटेन में उनके सह-नेतृत्व में किए गए अध्ययन में सामने आए थे।

Pfizer ने दी है खुशखबरी
उन्होंने एक बयान में कहा कि WHO के अध्ययन से सबसे अहम निष्कर्ष यह निकलकर आया है कि कोविड-19 के इलाज में रेमडेसिविर का कोई खास असर नहीं है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका की फार्मा कंपनी Pfizer ने ऐलान किया है कि वह नवंबर के आखिरी हफ्ते तक अपनी कोरोना वायरस वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए इजाजत हासिल करने को आवेदन दे सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

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