S-400 को और घातक बना रहा रूस, डिफेंस सिस्टम में ताकतवर मिसाइलों को करेगा शामिल

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मॉस्को
अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच रूस ने अपने एस-400 और एस-300 मिसाइल सिस्टम को और घातक बनाने का काम शुरू कर दिया है। इस सिस्टम में रूस नई तरह की कई मिसाइलों को शामिल करने जा रहा है जो दुश्मन के किसी भी मिसाइल को मार गिराने में सक्षम होंगी। रूस का यह हथियार अपनी कैटेगरी में दुनिया में सबसे बेहतरीन माना जाता है। भारत भी रूस से 40,000 करोड़ रुपये में एस-400 के पांच मिसाइल सिस्टम को खरीदने की डील की है।

और घातक होगें दोनों हथियार
रूसी समाचार एजेंसी स्पूतनिक की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी रक्षा मंत्रालय ने एस- 300 और एस- 400s के स्टॉक को लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को बढ़ाने और अत्यधिक सटीक शॉर्ट-रेंज डिफेंस प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार की मिसाइलों से लैस करने की योजना को मंजूरी दी है। रूसी सेना के अनुसार, लॉन्च प्लेटफार्मों में इस बदलाव से स्थिति के आधार पर इस्तेमाल की जाने वाली मिसाइलों को तुरंत स्विच करना संभव हो जाएगा।

रूस के पास इतने एस-400 सिस्टम
मंत्रालय ने यह भी कहा है कि किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम से अपेक्षा की जाती है कि वे घरेलू एयर डिफेंस की क्षमताओं में मौलिक रूप से वृद्धि करें और किसी भी लक्ष्य को नष्ट करने के लिए एक सुरक्षित प्रणाली का निर्माण करें। बता दें कि रूस की एयर डिफेंस फोर्स एस- 300 की कम से कम 125 बटालियन (कुल 1,500 लांचर) और एस- 400 की 55 बटालियन (552 लांचर) से लैस हैं।

यह है रूस की योजना
योजना के अनुसार, एस -300 की चार बड़ी लॉन्च ट्यूबों में से एक या अधिक को चार छोटे 9M96 और 9M96M मिसाइलों के साथ बदला जाएगा। इन मिसाइलों की रेंज 30 से 120 किमी की होगी। ये मिसाइलें 20 से 35 किमी की ऊंचाई पर दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम होंगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस के एस्ट्राखान क्षेत्र में एयरोस्पेस फोर्सेस के 185वें सेंटर फॉर कॉम्बैट ट्रेनिंग के दौरान इसका सफल ट्रायल भी किया गया है।

डिफेंस सिस्टम में क्यों बदलाव कर रहा रूस
S-400 के उनके घरेलू और निर्यात दोनों संस्करण पहले से ही गोला बारूद को बदलने में सक्षम हैं। केवल मामूली संशोधनों के साथ उन्हें वापस काम में लाया जा सकता है। रूसी सेना के एक रिटायर्ड जनरल ने कहा कि एक ही लॉन्चर पर एयर डिफेंस मिसाइलों के विभिन्न कैलिबर के संयोजन से उन्हें और घातक बनाया जा सकता है। कम महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर महंगे गोला बारूद को बर्बाद करने से बचने के लिए ऐसी प्रणाली की आवश्यकता है।

क्या काम करता है एयर डिफेंस सिस्टम
इसका काम देश में होने वाले किसी भी संभावित हवाई हमले का पता लगाना है। यह तमाम तरह के रेडार और उपग्रहों की मदद से जानकारी जुटाता है। इस जानकारी के आधार पर यह बता सकता है कि लड़ाकू विमान कहां से हमला कर सकते हैं। इसके अलावा यह एंटी-मिसाइल दागकर दुश्मन विमानों और मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर सकता है। भारत ने अब तक रूस से मारने वाले हथियार ही खरीदे हैं। यह पहला मौका है, जब भारत रूस से डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है।

हवा में विमानों और मिसाइलों को गिराता कैसे है सिस्टम
भारतीय लहज़े में कहें, तो बहुत ही सिंपल सी टेक्निक है। इसमें ढेर सारे रेडार लगे होते हैं, जिनसे यह पता लगा लेता है कि ऑब्जेक्ट (जिसे मारना है) कहां है। इसकी क्षमता यह है कि 400 किमी के दायरे में आने वाले किसी भी खतरे को खत्म कर सकता है। फिर खतरा चाहे लड़ाकू विमान हो, ड्रोन हो या मिसाइल हो। ये गिरा देगा।

300 टारगेट को कर सकता है ट्रैक
S-400 का जलवा यह है कि इसके रडार 100 से 300 टारगेट ट्रैक कर सकते हैं। 600 किमी तक की रेंज में ट्रैकिंग कर सकता है। इसमें लगी मिसाइलें 30 किमी ऊंचाई और 400 किमी की दूरी में किसी भी टारगेट को भेद सकती हैं। मन करे, तो इससे ज़मीनी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। सबसे तगड़ी चीज़ यह कि एक ही समय में यह 400 किमी तक 36 टारगेट को एक साथ मार सकती है। इसमें 12 लॉन्चर होते हैं, यह तीन मिसाइल एक साथ दाग सकता है और इसे तैनात करने में पांच मिनट लगते हैं।

अडवांस है यह डिफेंस सिस्टम
यह इस बात की ज़िम्मेदारी भी ले सकता है कि दुश्मन की मिसाइल को कौन से फेज़ में गिराना है। लॉन्चिंग के तुरंत बाद, कुछ दूरी पर या करीब आने पर। अगर बूस्ट फेज़ यानी शुरुआत के समय ही मिसाइल ध्वस्त कर दी गई, तो उसके मलबे-राख से भी कोई नुकसान नहीं होगा। इसमें चार तरह की मिसाइल होती हैं। एक मिसाइल 400 किमी की रेंज वाली होती है, दूसरी 250 किमी, तीसरी 120 और चौथी 40 किमी की रेंज वाली होती है।



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