Samsung ने दिखाया दम, फिर से बना नंबर 1 स्मार्टफोन ब्रैंड

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नई दिल्ली
दक्षिण कोरिया की दिग्गज टेक कंपनी ने इस साल जुलाई और अगस्त में भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में फिर से टॉप पर पहुंच गई। काउंटरपॉइंट रिसर्च ने यह जानकारी अपनी मंथली मार्केट ट्रैकर रिपोर्ट में दी। इसके पीछे की बड़ी वजह कंपनी की आक्रामक ऑनलाइन सेल स्ट्रैटिजी और यूजर्स के ऐंटी-चाइना सेंटिमेंट्स को बताया जा रहा है।

साल 2018 के बाद सबसे ज्यादा मार्केट शेयर
भारत में लॉकडाउन में ढील दिए जाने के साथ ही जुलाई और अगस्त में कंपनी ने शानदार वापसी की और साल 2018 के बाद सबसे ज्यादा मार्केट शेयर पर कब्जा करने में कामयाब हो पाई है। कंपनी ने जुलाई के बाद अलग-अलग प्राइस रेंज के कई स्मार्टफोन्स को लॉन्च किया है। हालांकि, ऐंटी-चाइना सेंटिमेंट्स को भुनाने के लिए कंपनी ने खासतौर से 10 हजार और 20 हजार रुपये के सेगमेंट में नए स्मार्टफोन्स को लॉन्च किया।

बिजनस में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का टारगेट
कंपनी ने ऑनलाइन स्मार्टफोन स्पेस में अपने रुख को और आक्रामक कर लिया है और इस फेस्टिव सीजन में कंपनी का टारगेट है कि वह F सीरीज के हैंडसेट्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करके अपने बिजनस में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करे। इसके साथ ही कंपनी अब चाहती है कि वह इस साल अपने मार्केट शेयर को दोगुना करके 30 प्रतिशत तक ले जाए।

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ऑनलाइन प्रेजेंस पर है फोकस
सैमसंग अपने ऑनलाइन प्रेजेंस पर पिछले कुछ वक्त से काफी फोकस कर रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक साल 2020 की पहले छमाही में कंपनी की 35 प्रतिशत सेल ऑनलाइन चैनल के जरिए आ रही थीं। यह पिछले साल 25 प्रतिशत ही था। इस साल की दूसरी तिमाही में सैमसंग 26 प्रतिशत वॉल्यूम मार्केट शेयर के साथ दूसरा सबसे बड़ा ब्रैंड बनने में कामयाब रहा। यह पहली तिमाही में 16 प्रतिशत था। इसके अलावा सैमसंग साल 2020 की दूसरी तिमाही में 25 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन स्मार्टफोन ब्रैंड रहा, दो साल 2019 में 11 प्रतिशत ही था।

(फोटो: काउंटर पॉइंट रिसर्च)

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ग्लोबल लेवल पर भी नंबर 1
ग्लोबल लेवल पर सैमसंग ने अगस्त में 22 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ टॉप पोजिशन हासिल की। अप्रैल 2020 में कंपनी की इस पोजिशन को हुवावे ने सेल में आई भारी कमी के चलते भारत और यूरोप जैसे मार्केट में छीन लिया था। हालांकि, अप्रैल 2020 में हुवावे की 21 प्रतिशत हिस्सेदारी अगस्त 2020 में घट कर 16 प्रतिशत पर आ गई। माना जा रहा है कि अमेरिकी बैन के बाद इसमें और गिरावट आएगी। ऐपल ने इस दौरान अपने मार्केट शेयर को काबू में रखने में कामयाब रहा।



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