Shahjahanpur news: मुस्लिम भाई ने निभाया राखी का फर्ज, कुछ यूं बचाई पूरे परिवार की जान

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आसिफ अली, शाहजहांपुर
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द को कायम रखते हुए, एक मुस्लिम भाई ने अपनी जान की बाजी लगाकर अपनी मुंहबोली हिंदु बहन के परिवार की जान बचा ली। दरअसल बहन के घर सिलिंडर में आग लगने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। बहन ने जब फोन पर भाई से मदद मांगी तब महज दस मिनट के अंदर ही मुस्लिम भाई ने पहुंचकर सिलिंडर में लगी आग को बुझाकर पूरे परिवारी की जान बचा ली।

लोगो को जब पता चला कि जिस शख्स ने मदद की है, वो मुस्लिम है और उसको पिछले दो साल से राखी बांधी जा रही थी। इसलिए उसने अपनी जान पर खेलकर अपनी बहन के परिवार की जान बचाई। दरअसल चौक कोतवाली में राजघाट चौकी के मोहल्ला तिराही में महेश शर्मा अपने परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में पत्नी 1 बेटा और 4 बेटियां है। सुबह के वक्त नाश्ते की तैयारी हो रही थी, बेटे ने जैसे ही गैस चूल्हा जलाने की कोशिश की तो चिंगारी निकलते ही सिलेंडर में आग लग गई। किचन में आग की लपटें उठने लगी, घर के अंदर भगदड़ और चीखपुकार मचने लगी।

बहन ने फोन करके भाई से मांगी मदद
शोर सुनकर आसपास के रहने वालों की भीड़ लग गई, लेकिन किसी ने इतनी हिम्मत नही जुटाई कि वह घर के अंदर जाकर बेबस परिवार की मदद कर सकें। छाया शर्मा ने दो साल पहले राखी बांधकर बनाए गए भाई शानू खान से फोन पर मदद मांगी। उसका घर करीब 600 मीटर की दूरी पर है। शानू खान ने दस मिनट के अंदर ही बहन छाया शर्मा के घर पहुंचे, लेकिन उस वक्त तक आग काफी ज्यादा लग चुकी थी और परिवार घर के अंदर ही फंसा था। अपनी जान की परवाह किए बगैर शानू खान ने घर में घुसकर सबसे पहले किचन मे जलता हुआ सिलेंडर बाहर निकाला। उसके बाद किचन में लगी आग को बुझाया।

अपनी जान की परवाह किए बगैर बचाई सबकी जान
बहन छाया शर्मा ने बताया कि किचन में गैस चूल्हा जलाते वक्त गैस सिलेंडर में आग लग गई थी,आग लगने के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। तब फोन पर शानू खान से मदद मांगी थी। फोन पर मेरी आवाज सुनते ही भाई घर आ गया और पूरे परिवार की जान बचा ली। बहन छाया के मुताबिक पिछले दो साल से वह शानू खान को रक्षाबंधन के दिन राखी बांधती है, मेरे और मेरे परिवार की रक्षा का वादा किया था। आज भाई ने राखी का हक अदा करते हुए, मेरी परेशानी में काम आकर अपनी जान की परवाह किए बगैर हमारी जान बचाई है।

‘इंसानियत ही है सबसे बड़ा धर्म’
वहीं जान बचाने वाले शानू खान ने बताया कि सुबह में जिस वक्त बहन छाया का फोन आया था,तब वह सो रहा था। लेकिन रोने की आवाज सुनते ही वह सीधा उसके घर आ गया और देखा कि आग लगी है। शानू खान का कहना है कि पिछले दो साल से छाया हमारे राखी बांध रही थी, इसलिए बहन और माता-पिता की जान बचाना हमारा फर्ज है। ये मायने नही रखता कि कौन हिंदू और कौन मुस्लिम है, अगर हमारे दिलों में इंसानियत जिंदा है तो हमारे बीच कोई भी खाई पैदा नही कर सकता।



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