SSR Drugs Case : क्या है NDPS कानून जिसके तहत गिरफ्तार हुईं रिया चक्रवर्ती, जानें सबकुछ

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नई दिल्ली
बॉलिवुड के उभरते सितारे सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच की कड़ी नशाखोरी से जुड़ने के बाद उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती गिरफ्तार की जा चुकी हैं। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स मामले में पूछताछ के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद रिया को अरेस्ट कर लिया। वहीं, दीपिक पादुकोण, श्रद्धा कपूर, रकुल प्रीत सिंह समेत बॉलिवुड की कई अभिनेत्रियां और इंडस्ट्री से जुड़े अन्य लोग इस जद में आ चुके हैं। एनसीबी को ड्रग्स केस की जांच और गिरफ्तारी का अधिकार नार्कोटिक ड्रग्स ऐंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) ऐक्ट से मिलता है। आइए जानते हैं क्या-क्या हैं इस ऐक्ट के प्रमुख प्रावधान…

एनडीपीएस ऐक्ट वर्ष 1985 में विभिन्न नार्कोटिक ड्रग कानूनों की जगह अस्तित्व में आया। इसका मकसद नशाखोरी मामले में दोष साबित होने पर सजा तय करने की प्रक्रिया को साफ-सुथरा बनाना है। इस कानून में सेवन किए गए नशीले पदार्थ की मात्रा के आधार पर जेल और जमानत के प्रावधान तय किए गए हैं।

1989 में इस कानून के प्रावधानों को और कड़ा कर दिया गया। ‘अवैध लेनदेन की फाइनैंसिंग’ के लिए धारा 27ए जोड़ दी गई। अवैध लेनदेन के तहत नशे की वस्तुओं का उत्पादन करना, रखना, बेचना, खरीदना, ढोकर एक से दूसरी जगह ले जाना, भंडार में जमा करना और इस्तेमाल करना, सब शामिल हैं। रिया चक्रवर्ती को इसी धारा के तहत गिरफ्तार किया गया है।

2001 में इस कानून के तहत दंड के प्रावधानों को आसान बना दिया गया।

मात्रा तय करने के तीन आधार
एनडीपीएस ऐक्ट के तहत ड्रग्स की मात्रा को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- कम मात्रा, कारोबारी मात्रा और कम और कारोबारी के बीच की मात्रा। इनके आधार पर अलग-अलग दंड के प्रावधान किए गए हैं।

छोटी मात्रा- 1 साल का कठोर कारावास या 10 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों

कारोबारी मात्रा- 10 से 20 साल का कठोर कारावास और 1 से 2 लाख रुपये का जुर्माना

छोटी और कारोबारी के बीच की मात्रा-
10 साल तक कठोर कारावास, 1 लाख रुपये तक का जुर्माना

नशाखोरों के लिए सजा
अगर किसी के पास से छोटी मात्रा में ड्रग्स पकड़े जाएं तो उसे सजा से छूट का प्रावधान किया गया है, बशर्ते वह इलाज के लिए तैयार हो जाए। नशाखोरी को एनडीपीएस ऐक्ट की धारा 27 के तहत जुर्म ठहराया गया है जिसके लिए छह महीने से एक साल तक की जेल हो सकती है। लेकिन, अगर नशे की लत का शिकार व्यक्ति अपना इलाज करवाने को तैयार हो जाए तो उसे सेक्शन 64ए के तहत सजा से छूट मिल जाती है।

जमानत की शर्तें
प्रसिद्ध वकील अमित देसाई कहते हैं कि अदालतें खुद ही नशाखोरों को सजा देने की जगह उसे सुधारने को प्राथमिकता देती हैं। कई फैसलों में अदालतों ने छोटी मात्रा में ड्रग्स का सेवन करने वालों के खिलाफ जमानत के लिए कठोर शर्तों से मुक्ति दे दी।

लेकिन एनडीपीएस ऐक्ट के सेक्शन 37 ड्रग्स केस में जमानत को कठिन बना देता है। यह सेक्शन ड्रग्स के कारोबारी इस्तेमाल के मामलों पर लागू होता है। इसके अलावा, गबन के मामलों में सेक्शन 19, बाहरी सौदों के केस में सेक्शन 24 और अवैध लेनदेन की फाइनैंसिंग के मामले में सेक्शन 27ए भी जमानत की शर्तें बेहद कठोर बना देते हैं। इन धाराओं के तहत साबित हुए अपराध में दोषी को 10 साल या ज्यादा की जेल होती है।

फाइनैंसिंग क्या है?
रिया पर सेक्शन 27ए के तहत केस दर्ज किया गया है क्योंकि उस पर बॉयफ्रेंड सुशांत सिंह राजपूत के लिए ड्रग्स खरीदने का इल्जाम है। हालांकि, देसाई ने कहा, फाइनैंसिंग का मूल रूप से किसी को ड्रग्स देना है। अगर कोई व्यक्ति अपने पैसे से ड्रग्स खरीदता है तो उसे ड्रग्स फाइनैंसिंग की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। इस तरह ड्रग्स फाइनैंसिंग का सीधा मतलब हुआ कि अपने पैसे से खरीदकर ड्रग्स किसी दूसरे को देना।

मुंबई हाई कोर्ट के सामने यक्ष प्रश्न
रिया का मामला छोटी मात्रा में ड्रग्स देने का है। लेकिन, उनके खिलाफ सेक्शन 27ए लागू है। अब हाई कोर्ट के सामने यह सवाल है कि क्या छोटी मात्रा के लिए सेक्शन 27ए के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है? क्या छोटी मात्रा को मद्देजनर रिया को जमानत दी जा सकती है?

रिया चक्रवर्ती का संकट
अगर सुशांत सिंह राजपूत आज जिंदा होते तो रिया पर व्यक्तिगत इस्तेमाल के आरोप में जमानती धारा के तहत केस दर्ज होता। हालांकि, एनसीबी रिया पर सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदने के आरोप में 10 साल के कठोर कारावास की पैरवी कर रही है।



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