Sudarshan TV मामले में हेट स्पीच के इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

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नई दिल्ली
यूपीएससी जेहाद प्रोग्राम प्रसारित करने वाले सुदर्शन टीवी (Sudarshan TV Case) के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के मामले में कांग्रेस के दो प्रवक्ताओं की पत्नी की ओर से अर्जी दाखिल कर मामले में दखल की इजाजत मांगी है। कांग्रेसी नेता राजीव त्यागी की विधवा संगीता त्यागी और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा की पत्नी कोटा निलिमा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि कुछ न्यूज एंकर जो नफरत फैलाने वाली बाते करतें हैं उन्हें विचार अभिव्यक्ति की आजादी का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि कुछ नामी चैनल अपने प्राइम टाइम में सिर्फ सत्ताधारी पार्टियों का पक्ष लेते हैं और कार्यक्रम संप्रदायिक नेचर का होता है। कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी की हाल ही में टीवी डिबेट के बाद हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। याचिका में कहा गया है कि कुछ न्यूज एंकर के नफरत वाले बयान को विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा की छूट नहीं दी जानी चाहिए।

‘प्रोग्रामों का होता है ज्यादातर संप्रदायिक नेचर’
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कुछ टीवी शो के चार प्रमुख एंकरों का प्रोग्राम ज्यादातर संप्रदायिक नेचर का होता है और सत्ताधारी पार्टी के फेवर में होता है।अपने वकील के माध्यम से दोनों याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उनकी अर्जी पर तुरंत सुनवाई की जानी चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश उनके वकील सुनील फर्नांडिस ने अर्जी दाखिल कर कहा कि मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की स्थिति देखने से लगता है कि नाजी जर्मनी की तरह स्थिति हो गई है।

सुदर्शन टीवी को भेजा गया है नोटिस
केंद्र सरकार ने यूपीएससी जेहाद प्रोग्राम प्रसारित करने वाले सुदर्शन टीवी को प्रोग्राम कोड के उल्लंघन के मामले में नोटिस जारी किया हुआ है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने नामले की सुनवाई पांच अक्टूबर तक के लिए टाल रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को एक टीवी चैनल को उनके अगले एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सेल्फ रेग्युलेशन का दिया था सुझाव
अदालत ने कहा था कि प्रोग्राम पहली नजर में अल्पसंख्यक समुदाय को बदनाम करने वाला लगता है। टीवी कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया जा रहा था कि सरकारी सेवा में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के घुसपैठ की साजिश का पर्दाफाश किया जा रहा है। अदालत ने कहा था कि पांच नागरिकों की एक कमिटी का गठन किया जा सकता है जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सेल्फ रेग्युलेशन के लिए मानक तय करे। सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के प्रोग्राम पर सवाल उठाया था और कहा था कि मीडिया में सेल्फ रेग्युलेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने डिबेट पर जताई थी चिंता
टीवी चैनल के प्रोग्राम में दावा किया गया था कि सिविल सर्विसेज में एक समुदाय के मेंबरों की घुसपैठ का पर्दाफाश किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस कार्यक्रम के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि कुछ मीडिया ग्रुप के प्रोग्राम में आयोजित होने वाली डिबेट चिंता का विषय है।



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