Top Photos of the Day: देखें, आज की 5 सबसे खास तस्वीरें

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अर्जेंटीना केकोरडोबा में भयानक सूखे के कारण लगी आग अब विभीषिका में तब्दील हो रही है। इसी की लपटों से लड़ता एक फायर-फाइटर।

हथियारों से नहीं, हिम्मत से जंग

अजरबैजान-आर्मीनिया के बीच जारी जंग में तबाह हुई चर्च के मलबे में बैठकर Komitas का Krunk परफॉर्म करते वायलनसेलिस्ट Sevak Avanesyan। यह चर्च 8 अक्टूबर को अजरबैजान फोर्स के दो बार हमले में तहस-नहस हो गई। आर्मेर्निया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबाख को लेकर चल रही लड़ाई में मरने वालों की संख्या 600 के पार पहुंच गई है। रूस के नेतृत्व में संघर्ष विराम की घोषणा के बावजूद चल रही लड़ाई में दोनों देशों के सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई है। नागोर्नो-काराबाख के सैन्य अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को उनके 16 सैन्यकर्मी युद्ध में मारे गए। इसके साथ ही 27 सितंबर को शुरू हुई लड़ाई में उसके 532 सैनिकों की मौत हो चुकी है।

थाइलैंड में जारी लोकतंत्र की मांग

थाइलैंड में जारी लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन। तख्तापलट के बाद लगे सैन्य शासन और शाही सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। 2014 में तख्तापलट के बाद थाइलैंड की सेना ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी खत्म कर दी थी। इस तख्तापलट के मुख्य नेता और पूर्व आर्मी चीफ प्रयुत चान-ओ-चा अब देश के प्रधानमंत्री हैं। उनके खिलाफ प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सबसे ज्यादा है। लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं का कहना है कि देश में अमीर-गरीब के बीच खाई गहराती जा रही है।

अद्भुत कलाकारी

हंगरी की मशहूर सर्कस डांस कंपनी ‘Recirquel’ की कलाकार स्टेज पर परफॉर्म करते हुए। बुडापेस्ट आर्ट्स पैलेस में हंगरी के आर्ट डायरेक्टर बेन्स वैगी ने इस इस शो Solus Amor को डायरेक्ट किया है।

कुछ ऐसे मिले लोकतंत्र समर्थक

कनाडा के विदेश मंत्री फ्रांकोइ-फिलिप शैंपेन और बेलारूस की विपक्ष की नेता स्वेतलाना तिखानोस्काया लिथुएनिया के विलनिऊ के होटेल में एक-दूसरे का संबोधन करते हुए। स्वेतलाना देश-निकाला के बाद लिथुएनिया में हैं। फिलिप ने बेलारूस में हुए राष्ट्रपति चुनावों को फर्जी बताया था और स्वेतलाना के साथ समर्थन जताया था। चुनाव परिणाम के बाद लोगों के विरोध प्रदर्शन पर स्वेतलाना ने कहा था कि भले ही चुनाव हार गई हूं, पर हिम्मत नहीं। तानाशाही के खिलाफ मेरा संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने चुनाव परिणाम में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि मेरी रैलियों में उमड़ी भीड़ से तय था कि लोग बदलाव चाहते हैं, पर ऐसा होने नहीं दिया गया।



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